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शेरॉन के समर्थन पर बुश की आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की विवादित मध्यपूर्व योजना के समर्थन के कारण अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की आलोचना हो रही है. अरियल शेरॉन इस समय अमरीका के दौरे पर हैं और बुधवार को राष्ट्रपति बुश ने शेरॉन की मौजूदगी में उनकी विवादित योजना पर उनकी पीठ थपथपाई. बुश ने इस योजना को साहसिक और ऐतिहासिक तक कह डाला. इस योजना के तहत ग़ज़ा और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से इसराइली सेना और बस्तियों के हटने की बात तो कही गई है. लेकिन पश्चिमी तट के बड़े हिस्से की इसराइली बस्तियों को इस योजना में बनाए रखने की बात कही गई है.सारा विवाद इसी पर है. आलोचना संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि राष्ट्रपति बुश का समर्थन इसराइल और फ़लस्तीन के बीच बातचीत रोकने की कोशिश लगती है.
उन्होंने कहा कि कोई भी स्थायी शांति समझौता सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत दोनों पक्षों में बातचीत के आधार पर होना चाहिए. फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद क़ुरई ने भी शेरॉन की योजना को बुश के समर्थन पर अपनी आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि राष्ट्रपति बुश अपने अधिकारक्षेत्र का उल्लंघन कर रहे हैं और इससे पूरे क्षेत्र की शांति पर असर पड़ सकता है. क़ुरई का कहना था, "जब राष्ट्रपति बुश ने कहा कि 1967 की सीमाओं पर वापसी नहीं हो सकती तो वे पहले (अमरीकी) राष्ट्रपति बने जिन्होंने फ़लस्तीनी क्षेत्र में बस्तियों को वैध ठहराया." शेरॉन की योजना का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने भी स्वागत किया है लेकिन थोड़ा संभल कर. प्रधानमंत्री ब्लेयर का कहना है कि यह योजना व्यापक शांति की दिशा में एक क़दम है. इस योजना के तहत इसराइल एकतरफ़ा कार्रवाई करते हुए गज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से सैनिकों और वहाँ बसाए यहूदियों को बाहर निकाल लेगा. लेकिन प्रधानमंत्री शेरॉन पश्चिमी तट की छह यहूदी बस्तियों को इसराइली नियंत्रण में रखना चाहते हैं जहाँ लगभग 90 हज़ार यहूदी रहते हैं. फ़लस्तीनी वार्ताकार और मंत्री साएब अराकात ने अमरीका की आलोचना करते हुए कहा कि इस योजना से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन होता है. फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात ने कहा कि 'अमरीकी समर्थन का मतलब है मध्यपूर्व शांति प्रक्रिया का अंत जिससे हिंसा का चक्र शुरु हो जाएगा.' नीति में बदलाव अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि यदि सब पक्ष इस मौके का फ़ायदा उठाएँ तो लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान हो सकता है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने प्रधानमंत्री शेरॉन से बातचीत के बाद इस योजना को ऐतिहासिक बताया. पर्यवेक्षकों के अनुसार राष्ट्रपति बुश ने फ़लस्तीनियों की उस राय को नज़रअंदाज़ किया है जिसके अनुसार नए देश का गठन 1967 की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए बातचीत के बाद होना चाहिए. इसराइल ने 1967 में पश्चिमी तट और गज़ा पट्टी पर कब्ज़ा कर लिया था. पर्यवेक्षक मानते हैं कि ये अमरीका की लंबे समय से चली आ रही नीति में महत्वपूर्ण बदलाव है. बीबीसी संवाददाता जॉन लेन का कहना है कि ऐसी संभावना बहुत कम है कि राष्ट्रपति बुश की दी गई रियायतों को कोई भावी अमरीकी राष्ट्रपति मानने से इनकार कर दें. |
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