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अमरीका ने इसराइल को आगाह किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने एक बार फिर इसराइल को आगाह किया है कि वह फ़लस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात को नुक़सान पहुँचाने का कोई प्रयास नहीं करे. अमरीकी विदेश उपमंत्री रिचर्ड आर्मिटेज ने कहा कि अमरीका ने इसराइल को ये बात साफ-साफ बता दी है. आर्मिटेज का बयान इसराइली प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन की इस परोक्ष चेतावनी के बाद आई है कि अराफ़ात को भी इसराइली हमले का निशाना बनाया जा सकता है. शेरॉन ने इसराइली अख़बारों को बताया कि अराफ़ात और लेबनानी चरमपंथी संगठन हिज़बुल्ला के नेता ख़ुद को सुरक्षित नहीं समझें. उन्होंने कहा, "जो कोई भी किसी यहूदी की हत्या करता है या इसराइली नागरिकों को नुक़सान पहुँचाता है, या यहूदियों की हत्या के लिए हमलावरों को भेजता है- वो हमारे निशाने पर होगा." उल्लेखनीय है कि इसराइली मंत्रिमंडल के सुरक्षा मामलों की कमेटी ने पिछले साल सिद्धांत रूप में अराफ़ात पर जानलेवा हमले को जायज़ माना था. उस फ़ैसले की चौरतरफ़ा आलोचना के बाद शेरॉन ने कहा था कि अराफ़ात को मारने की कोई योजना नहीं है. उन्होंने अमरीका को आश्वासन दिया था कि अराफ़ात को कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया जाएगा. लेकिन एक बार फिर शेरॉन ने कड़ा रुख़ अपनाया है. 'मारिव' अख़बार को उन्होंने कहा, "अराफ़ात का कोई जीवन बीमा नहीं है...हर कोई जानता है कि अराफ़ात मध्य पूर्व समस्या के समाधान की राह में रोड़ा हैं." शेरॉन चरमपंथी हमलों में इसराइलियों की मौत के लिए अराफ़ात को ज़िम्मेवार मानते हैं, जबकि अराफ़ात हमेशा ही इस बात से इनकार करते रहे हैं कि हमलावार चरमपंथियों को उनका समर्थन प्राप्त है. |
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