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मध्य पूर्व में शांति प्रक्रिया की नई पहल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने मध्य पूर्व में नए सिरे से शांति प्रक्रिया की पहल शुरू की है. इस के तहत मिस्र, इसराइल और जॉर्डन के नेता अगले महीने अमरीका जाकर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से मुलाक़ात करेंगे. 12 अप्रैल को राष्ट्रपति बुश मिस्र के राष्ट्रपति होस्नी मुबारक से मिलेंगे. दो दिन बाद उनकी मुलाक़ात इसराइल के प्रधानमंत्री अरियल शेरॉन से होगी. उसके बाद जॉर्डन के शाह अब्दुल्ला से उनकी मुलाक़ात का कार्यक्रम है. बातचीत इसराइल की ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से एकतरफा हटने की योजना पर केंद्रित होने की उम्मीद है. बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता का कहना है कि व्हाइट हाउस ने पहले इसराइल की योजना को बहुत गंभीरता से नहीं लिया था लेकिन अब उसका मानना है कि इसराइल का यह प्रस्तावित क़दम व्यापक शांति वार्ता को शुरू करने में मददगार हो सकता है. चुनाव अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव नवंबर में हैं और राष्ट्रपति बुश इससे पहले मध्य पूर्व में कुछ कर दिखाना चाहते हैं.
बुश और शेरॉन के बीच वार्ता के बारे में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता स्कॉट मैकक्लीलेन ने कहा, "राष्ट्रपति बुश प्रधानमंत्री शेरॉन से द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे और इलाक़े की स्थिति की भी समीक्षा करेंगे." उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत में आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के साथ-साथ इसराइल-फ़लस्तीन शांति प्रक्रिया का मुद्दा भी उठेगा. इसराइल के प्रधानमंत्री शेरॉन चाहते हैं कि उनके ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के कुछ हिस्सों से हटने की घोषणा के बदले उन्हें भी अमरीका की ओर से कुछ राहत मिले. वे चाहते हैं कि इसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी जाए कि पश्चिमी तट की दो बड़ी यहूदी बस्तियाँ स्थायी रूप से इसराइल के क़ब्ज़े में रहेंगी. इसराइली मीडिया में इसकी चर्चा है कि राष्ट्रपति बुश इसराइल की माँग मानने के पक्ष में नहीं हैं. लेकिन अमरीका पश्चिम एशिया में दूसरी समस्याओं से निपटने के क्रम में स्थिरता भी चाहता है. |
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