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मुस्लिम देशों ने बुश की आलोचना की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुस्लिम देशों के संगठन (ओआईसी) ने एक आपात बैठक कर फ़लस्तीन में इसराइल की एकतरफ़ा कार्रवाई का समर्थन करने के लिए अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश के रूख़ की आलोचना की है. ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉंफ़्रेंस (ओआईसी) की गुरूवार को मलेशिया में हुई इस बैठक में प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि अमरीकी और इसराइली नीतियों से अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन हुआ है. संगठन के देशों ने कहा है कि मध्य पूर्व शांति योजना में 'रोडमैप' के बहाने कोई भी एकतरफ़ा तौर पर इसराइल को रियायत नहीं दे सकता या फ़लस्तीनियों के प्रतिनिधित्व के बिना उनकी तरफ़ से मध्यस्थता नहीं कर सकता. ओआईसी ने इराक़ संकट पर भी चर्चा की और इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की केंद्रीय भूमिका की माँग की. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से आहवान किया है कि इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले मुस्लिम सेनाएं तैनात करने का रास्ता साफ़ किया जाना चाहिए ताकि वहाँ जल्द से जल्द शांति बहाल हो सके. ग़ौरतलब है कि इनमें पाकिस्तान, मलेशिया और इंडोनेशिया सहित कई मुस्लिम देशों ने संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले ही अपनी सेना इराक़ भेजने की बात कही है. इन देशों ने कहा है कि इराक़ में संयुक्त राष्ट्र के झंडे तले ही शांति लाई जा सकती है साथ ही बैठक में ये भी माँग की गई कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद एक प्रस्ताव पारित करे जिससे इराक़ के लोगों को पूरी तरह से स्वतंत्रता दी जा सके. बैठक ओआईसी ने इराक़ और मध्य पूर्व की ताज़ा स्थिति पर विचार करने के लिए मलेशिया में यह आपात बैठक की थी. बैठक में दोनों मामलों में अमरीकी राष्ट्रपति बुश के रूख़ की आलोचना हुई. मलेशिया के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अहमद बदावी ने पूरी स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया. ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कॉंफ़्रेंस (ओआईसी) नाम के संगठन में 56 देश शामिल हैं. मगर कुआलालंपुर के निकट पुत्रजया नामक जगह पर हुई बैठक में केवल 20 देशों के प्रतिनिधि आए. इनमें भी केवल पाकिस्तान, इंडोनेशिया और फ़लस्तीनियों ने ही अपने विदेश मंत्रियों को बैठक में भेजा. |
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