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मुक़्तदा की मेहदी सेना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शिया मौलवी मुक़्तदा अल सद्र की पहल पर मेहदी सेना का गठन 2003 में किया गया था. मेहदी सेना ने इराक़ में अमरीकी गठजोड़ वाली सेनाओं के ख़िलाफ़ व्यापक प्रदर्शन किए हैं. सल में देखा जाए तो मेहदी सेना के कुछ हज़ार सदस्य ही होंगे लेकिन इसके असर की इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इसने देश के शिया बहुल इलाक़ों में विदेशी सेनाओं के ख़िलाफ़ व्यापक और असरदार प्रदर्शन किए हैं. मस्जिदों के पास दफ़्तरों के ज़रिए युवाओं को इस सेना में भर्ती किया गया और इसका मक़सद विदेशी सेनाओं से शिया मुसलमानों और देश की हिफ़ाज़त करना बताया गया. इराक़ पर अमरीकी नेतृत्व वाले गठजोड़ के हमले का एक साल पूरा होने के बाद तक मेहदी सेना में युवाओं की भर्ती जारी है. शुरू में शिया समुदाय ने सद्दाम हुसैन को हटाए जाने का स्वागत किया था लेकिन धीरे-धीरे इस समुदाय में अमरीकी नेतृत्व वाले गठजोड़ का विरोध बढ़ता जा रहा है. मेहदी सेना ख़ासतौर से उन युवाओं को भर्ती करती है जो शहरी इलाक़ों में रहते हैं और जो सद्दाम हुसैन को हटाए जाने के बाद के हालात से संतुष्ट नहीं हैं. इस्लाम के मुताबिक़ मेहदी का मतलब होता है 'जिसका वादा किया गया हो' और उसी के नाम पर मेहदी सेना का गठन किया गया है. मेहदी सेना अपने संस्थापक नेता के प्रति जान देने की हद तक वफ़ादार है. मेहदी सेना के 29 साल के एक सदस्य क़दम रिसान का कहना था, "मैं नहीं जानता कि इस सेना का उद्देश्य क्या है और हमें कब लड़ाई करनी होगी लेकिन मैं इतना जानता हूँ कि मैं मुक़्तदा अल सद्र का हुक़्म हर हालत में मानूंगा." ताक़त मेहदी सेना की ताक़त का अंदाज़ा इस सप्ताह सिर्फ़ तब हुआ जब उसने सड़कों पर उतरकर विदेशी सेनाओं के ख़िलाफ़ व्यापक और ख़ूनी प्रदर्शन किए.
हालाँकि ज़रूरी नहीं कि ये सारे प्रदर्शनकारी लड़ाके ही रहे होंगे, बहुत से ऐसे लोग भी रहे होंगे जो अपने इलाक़े की हिफ़ाज़त करना चाहते हों. इस सप्ताह के संघर्ष से अंदाज़ा होता है कि मेहदी सेना के पास न सिर्फ़ अत्याधुनिक बंदूकें हैं बल्कि उसके पास रॉकेट से दागे जाने वाले गोले भी मौजूद हैं. लंदन के वारविक विश्वविद्यालय में इराक़ मामलों के जानकार डॉक्टर टोबी डॉज का कहना है कि मशीन गन और कलाशनिकोव रायफ़लें अब हर जगह आसानी से मिल जाती हैं. इराक़ पर जब विदेशी सेनाओं का हमला हुआ तब तक वहाँ लोगों के पास हथियार होना एक सामान्य बात बन गई थी और सद्दाम हुसैन को हटाए जाने के बाद जो सत्ताहीनता की स्थिति बनी उस दौरान हथियारों के गोदाम महीनों तक खुले पड़े रहे थे. मेहदी सेना पहला ऐसा शिया गुट है जो संगठित है और उसमें सैनिक अनुशासन नज़र आता है इसीलिए यह शिया इलाक़ों में विदेशी सेनाओं के ख़िलाफ़ बढ़त ले रही है. सीधा टकराव मेहदी सेना और विदेशी सेनाओं के बीच इस महीने सीधा टकराव शुरू हो गया है और इसी सप्ताह तो इस टकराव में अनेक लोग और सैनिक मारे जा चुके हैं. जब मेहदी सेना का गठन किया जा रहा था तभी इसमें भर्ती होने वालों से यह छुपा नहीं था कि उनका काम अमरीकी गठजोड़ की सेनाओं से लड़ाई करना होगा. 27 साल के मोहम्मद अब्बास का कहना था, "इंशाअल्लाह, हमारी सेना अमरीकियों, इसराइलियों और तमाम क़ाफ़िरों को बाहर निकाल देगी." |
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