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इराक़ में विरोध पर क़ाबू के लिए कोशिश जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी सेना ने इराक़ में जारी ताज़ा विरोध पर नियंत्रण के लिए अपना अभियान जारी रखा है. पिछले कई दिनों से जारी संघर्ष में अब तक 100 से भी अधिक इराक़ी और गठबंधन सेना के कम-से-कम 30 सैनिक मारे जा चुके हैं. अमरीका के रक्षा मंत्री डोनल्ड रम्सफ़ेल्ड ने कहा है कि इराक़ में बढ़ रहे संघर्ष से वहाँ अमरीका की योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वाशिंगटन में आनन-फानन में बुलाए गए एक संवाददाता सम्मेलन में रम्सफ़ेल्ड ने ज़ोर देकर कहा कि गठजोड़ सेना ने इराक़ में अपना नियंत्रण नहीं खोया है. इस बीच इराक़ में शियाओं के प्रमुख नेता आयतोल्ला अली अल सिस्तानी ने विरोध पर क़ाबू पाने के अमरीका के तरीक़े की निंदा की है. उन्होंने सभी पक्षों से समझदारी भरे और शांतिपूर्ण उपाय पर ध्यान देने की अपील की. हिंसा पिछले कई दिनों से अमरीकी गठजोड़ को इराक़ में शिया और सुन्नी समुदाय के ज़बरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है. बुधवार को अमरीकी सेना ने सुन्नी आबादी वाले शहर फ़लूजा में एक मस्जिद पर बमबारी की जिसमें एक इराक़ी की मौत हो गई. पहले अमरीकी सेना ने कहा था कि इस हमले में 40 लोग मारे गए थे. अमरीकी रक्षा विभाग पेंटागन ने कहा है कि फ़लूजा में पाँच अमरीकी सैनिक भी मारे गए हैं. फ़लूजा के निकट रमादी और उत्तरी इराक़ के शहर हविजा से भी संघर्ष की ख़बरें आई हैं. कर्बला में पोलैंड के सैनिकों और शिया नेता मुक़्तदा अल सदर के हथियारबंद समर्थकों के बीच झड़प हुई जिसमें शिया नेता के एक सहयोगी की मौत हो गई. मुक़्तदा अल सदर के समर्थकों ने दक्षिणी इराक़ के कुट शहर में भी विरोध किया और भारी संघर्ष के बाद यूक्रेन के सैनिकों को शहर छोड़ना पड़ा. |
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