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और अमरीकी सैनिक इराक़ भेजने पर विचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इराक़ में अगर स्थिति नियंत्रण से बाहर हुई तो वहाँ सैनिकों को नए सिरे से तैनात किया जाएगा. अमरीकी केंद्रीय कमान के सैनिक कमांडरों को इस संबंध में प्रस्ताव भेजने को कहा गया है हालाँकि कमान के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि इसके लिए वहाँ अतिरिक्त सैनिकों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी. वाशिंगटन में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने इराक़ में शिया लड़ाकों और अमरीका की अगुआई वाली गठबंधन सेना के बीच जारी संघर्ष पर चिंता जताई. लेकिन प्रवक्ता ने इससे इनकार किया कि यह इराक़ के पूरे शिया समुदाय का विद्रोह है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ़ एक शिया मौलवी मुक्तदा सदर की ओर से सत्ता पाने की कोशिश है.
शनिवार से शुरू हुई इस हिंसा में अभी तक 50 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 20 से ज़्यादा गठबंधन सैनिक हैं. आलोचना उधर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने सदर के समर्थकों द्वारा इराक़ में जारी हिंसा की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने मुक्तदा सदर पर आरोप लगाया कि वे हिंसा का सहारा लेकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को रोकना चाहते हैं. राष्ट्रपति बुश ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अमरीका अपनी योजना के मुताबिक़ इराक़ियों को जून के आख़िर तक सत्ता सौंप देगा. इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने चेतावनी दी है कि वे सदर के समर्थकों द्वारा हिंसा की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेंगे. |
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