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सोमवार, 23 फ़रवरी, 2004 को 21:35 GMT तक के समाचार
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इराक़ में साल के अंत तक चुनाव की शर्त
कोफ़ी अन्नान
संयुक्त राष्ट्र ने अमरीका के अनुरोध पर इराक़ की राजनीतिक परिस्थियों का जायज़ा लेने के लिए टीम भेजी थी
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने कहा है कि इराक़ में चुनाव इस साल के अंत तक करवाए जा सकते हैं यदि इराक़ी इस बात पर राज़ी हो जाएँ कि चुनाव किस तरह होंगे.

कोफ़ी अन्नान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक रिपोर्ट दे दी है.

इस रिपोर्ट में उन्होंने कहा है कि हालाँकि कई सवाल सामने हैं और उनमें सबसे बड़ा यह है कि जून में जो प्रशासन अमरीकी सेना के हाथों से सत्ता लेगा उसका क्या स्वरुप होगा.

वैसे इस रिपोर्ट के बारे में इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रेमर ने दो दिनों पहले संकेत दिए थे कि इराक़ में चुनाव 12-15 महीनों से पहले नहीं करवाए जा सकते.

उल्लेखनीय है कि इराक़ी चाहते हैं कि अमरीकी नेतृत्व वाली सेना जल्दी से जल्दी चुनाव करवाकर इराक़ियों को सत्ता सौंप दे.

फ़ैसला इराक़ी ही करेंगे

यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की उस टीम ने दी है जो इस महीने की शुरुआत में इराक़ में राजनीतिक स्थिति का जायज़ा लेने गई थी.

बग़दाद में प्रदर्शन
इराक़ी जल्दी चुनाव करवाने की मांग कर रहे हैं

बीबीसी संवाददाता सुज़ाना प्राइस का कहना है कि इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले इराक़ियों इस बात पर एकमत होना होगा कि वे इराक़ में किस तरह की व्यवस्था चाहते हैं और मतदाताओं की सूची बनाने का क्या तरीक़ा होगा.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इस बात का फ़ैसला मई महीने तक किया जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके बाद परिस्थियों के अनुसार आठ महीनों का समय और लग सकता है.

इससे पहले अमरीका ने निर्णय लिया था कि पहले सत्ता की बागडोर एक अंतरिम प्रशासन को सौंप दी जाए और अगले साल के अंत तक चुनाव करवा लिए जाएँ.

लेकिन इस अमरीकी योजना का इराक़ियों ने इतना विरोध किया कि मजबूरी में अमरीका को संयुक्त राष्ट्र से अनुरोध करना पड़ा कि वह इराक़ जाकर चुनाव करवाने के लिए स्थितियों का जायज़ा ले.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट महासचिव कोफ़ी अन्नान के सलाहकार लखदर ब्राहिमी ने तैयार की है और उन्होंने इस बारे में कोई सुझाव नहीं दिया है कि जून में जो प्रशासन सत्ता संभालेगा उसका स्वरुप क्या होगा.

इससे कई तरह के विकल्प सामने आ गए हैं.

एक विकल्प तो यह है कि वर्तमान अंतरिम प्रशासन को जून के बाद भी काम करने को कहा जाए या फिर इसका राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार किया जाए या एक राष्ट्रीय सम्मेलन बुलाकर इसका फ़ैसला किया जाए.

कुल मिलाकर संयुक्त राष्ट्र ने भी इस विवादित मुद्दे पर फ़ैसले का सारा ज़िम्मा इराक़ियों पर ही छोड़ दिया है.

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