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संयुक्त राष्ट्र दूत मिले सिस्तानी से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में चुनाव जल्दी करवाने पर विचार के लिए संयुक्त राष्ट्र के दूत लख़दर ब्राहमी ने शिया नेता आयतुल्ला अली अल सिस्तानी से बातचीत की है. सिस्तानी ने इराक़ में सत्ता ग़ैर निर्वाचित लोगों के हाथ में सौंपे जाने की अमरीका की योजना के विरोध की शुरूआत की थी. शिया समुदाय के पवित्र शहर नजफ़ में दो घंटे की मुलाक़ात के बाद लख़दर ब्राहमी ने कहा कि सिस्तानी के रूख़ में कोई बदलाव नहीं आया है. अमरीका अभी ये चाहता है कि इराक़ में निर्वाचित लोगों की जगह पर कुछ लोगों को नियुक्त कर नई सरकार बनाई जाए और चुनाव अगले साल से पहले ना हों.
मगर शिया मुसलमान इस बात से डर रहे हैं कि इस व्यवस्था में उनका प्रभाव नहीं रहेगा. संयुक्त राष्ट्र दल के साथ शिया नेता की ये बातचीत इराक़ में लड़ाई ख़त्म होने के बाद अब तक के सबसे हिंसक दिन के बाद हुई है. मंगलवार और बुधवार को दो आत्मघाती हमलों में इराक़ में फ़ौज और पुलिस में भर्ती होने के लिए आवेदन करनेवाले लगभग 100 इराक़ी मारे गए. आशंका इराक़ में मौजूद अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि मुस्लिम चरमपंथियों ने संयुक्त राष्ट्र टीम के दौरे के वक़्त ये जताने के लिए जान-बूझकर ये हमले किए हैं कि अभी वहाँ चुनाव नहीं कराए जा सकते. अमरीकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है इराक़ में सत्ता हस्तांतरण के लिए 30 जून की समय सीमा के नज़दीक आने के साथ-साथ और भी ऐसे हमले हो सकते हैं. अमरीकी अधिकारियों ने अबू मुसाब अल ज़रक़ावी नाम के एक चरमपंथी की एक कथित चिट्ठी का ब्यौरा जारी किया है. चिट्ठी ज़रकावी के संबंध अल क़ायदा से बताए जाते हैं और उनके पत्र में ऐसे हमले करने का आह्वान किया है जिनसे इराक़ में शिया और सुन्नी समुदाय के बीच गृहयुद्ध जैसी नौबत आ जाए. 11 पन्नों की ये चिट्ठी सोमवार को बग़दाद में एक छापे के दौरान मिली और इसमें कहा गया है कि अमरीका के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना को हराने का एकमात्र तरीक़ा गृहयुद्ध शुरू करवाना है. अमरीका ने अबू मुसाब अल ज़रक़ावी को पकड़ने के लिए घोषित इनाम की रक़म दोगुना कर एक करोड़ डॉलर कर दी है. |
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