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'इराक़ में चुनाव 12-15 महीने नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इराक़ में अमरीकी प्रशासक पॉल ब्रैमर ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र का आकलन है कि इराक़ में 12-15 महीने से पहले चुनाव कराना संभव नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने घोषणा की थी कि इराक़ियों को सत्ता सौंपने के लिए इस वर्ष 30 जून से पहले चुनाव कराना संभव नहीं होगा. उसके बाद यह पॉल ब्रैमर की पहली टिप्पणी है जो उन्होंने अरबी टीवी चैनल अल अरबिया के साथ एक इंटरव्यू में दी है. बीबीसी संवाददाता जॉनी डायमंड का कहना है ब्रैमर की इस टिप्पणी से ऐसा जान पड़ता है कि मोटे तौर पर संयुक्त राष्ट्र, इराक़ में अमरीकी गठबंधन की चुनावी समय-सारिणी से सहमत है. ब्रैमर ने कहा, ''इराक़ में अभी चुनाव कराए जाने के रास्ते में सबसे बड़ी समस्याएँ, तकनीकी समस्याएँ हैं, जैसा कि पिछले हफ़्ते इराक़ गई, संयुक्त राष्ट्र की टीम ने बताया है.'' उन्होंने कहा, ''इराक़ में चुनाव से संबंधित कोई क़ानून नहीं है. चुनाव के बारे में कोई क़ानून बनाने के लिए राष्ट्रीय चुनाव आयोग तक नहीं है. राजनीतिक दलों के लिए नियम-अधिनियम तैयार करने के लिए कोई क़ानून नहीं है. कोई मतदाता-सूची नहीं है. लगभग बीस सालों से इराक़ में कोई विश्वसनीय जन-गणना नहीं हुई है. चुनाव-क्षेत्रों के लिए कोई हदबंदी नहीं है.'' उनका कहना था कि इन तकनीकी समस्याओं को सुलझाने में अभी वक़्त लगेगा. इराक़ में ज़्यादातर लोगों को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि देश में चुनावों के लिए, उन्हें अभी पंद्रह महीने और इंतज़ार करना पड़ सकता है. कुछ ही सप्ताह पहले तक, देश का बहुसंख्यक शिया समुदाय अपनी इस माँग पर ज़ोर दे रहा था कि तीस जून को इराक़ियों को सत्ता सौंपे जाने से पहले, देश में चुनाव होने चाहिए. मगर लगता है कि संयुक्त राष्ट्र से अमरीकियों का यह अनुरोध कारगर साबित हुआ है कि इराक़ में चुनावी संभावनाओं का जायज़ा लेने और देश के राजनीतिक तथा धार्मिक नेताओं से बातचीत करने के लिए वो अपना एक दल इराक़ भेजे. |
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