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मलेशिया में महाथिर युग की समाप्ति
मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने 22 वर्ष सत्ता में रहने के बाद शुक्रवार को अपनी कुर्सी को अलविदा कह दिया. शुक्रवार को एक साधारण समारोह में महाथिर मोहम्मद ने अपने सहयोगी अब्दुल्ला बदावी को सत्ता सौंप दी. अब्दुल्ला बदावी दक्षिण पूर्व एशियाई देश मलेशिया के पाँचवें प्रधानमंत्री बने हैं. मलेशिया को ब्रिटेन से 1957 में स्वतंत्रता मिली थी. कुआलालंपुर में बीबीसी संवाददाता जोनाथन केंट का कहना है कि बदावी को अपनी कार के दरवाज़े से दफ़्तर पहुँचने में दस मिनट लगे क्योंकि बहुत से लोग उन्हें मुबारकबाद देने के लिए उतावले थे. उससे पहले डॉक्टर महाथिर मोहम्मद राजा सिराजुद्दीन से मिलने शाही महल गए और वहाँ उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया. दो दशक महाथिर मोहम्मद एशिया में सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले पहले नेता हैं और उन्होंने 22 साल शासन किया. हालाँकि महाथिर मोहम्मद पर कभी-कभी तानाशाहों जैसे रवैए का भी आरोप लगाया जाता है लेकिन यह भी सच है कि उन्होंने अपनी सत्ता अपनी मर्ज़ी से ही छोड़ी है. दरअसल उन्होंने पिछले साल ही जून में सत्ता त्यागने की मंशा ज़ाहिर की थी लेकिन उन्हें सत्ता में टिके रहने के लिए मना लिया गया था. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि अब नए प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बदावी को महाथिर मोहम्मद के शासन काल से तुलना का सामना करना पड़ेगा और उन्हें इस मामले में फूँक-फूँक कर क़दम रखना होगा.
देश के आर्थिक कायाकल्प और औद्योगीकरण का श्रेय डॉक्टर महाथिर मोहम्मद को ही दिया जाता है. हालाँकि उनके आलोचक उन पर लोकतंत्र को ताक पर रखने के आरोप भी लगाते हैं लेकिन बहुत से लोगों का मानना है कि उन्होंने देश में स्थिरता क़ायम की और विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द बनाया. एक युग अब अब्दुल्ला बदावी के सामने मुख्य चुनौती यह होगी कि वे अपनी सत्तारूढ़ पार्टी यूएमएनओ में अपना समर्थन आधार मज़बूत करें और विपक्षी इस्लामी परंपरावादियों के समर्थन को कम करें.
बहरहाल बदावी जो कुछ भी करें लेकिन उनकी तुलना महाथिर मोहम्मद से ज़रूर की जाएगी कि अगर उन हालात में महातिर होते तो वह क्या करते. इससे पहले गुरुवार को महाथिर मोहम्मद ने प्रधानमंत्री की हैसियत से आख़िरी बार संसद को संबोधित किया. उन्होंने कहा, "मैंने अपना वक़्त गुज़ार लिया है अब दूसरे लोगों की बारी है. मैने 22 साल तक सरकार चलाई है, अब मैं कोई शिकायत नहीं कर सकता." कुआलालंपुर में बीबीसी संवाददाता जोनाथन केंट का कहना है कि डॉक्टर महाथिर मोहम्मद 1981 में सत्ता में आए थे तब देश की क़रीब 40 प्रतिशत आबादी पैदा भी नहीं हुई थी. "डॉक्टर महाथिर मोहम्मद का नाम इतना जीवन में छा चुका है कि उनके नाम के बिना लोगों को ज़िंदगी जीने के लिए कुछ वक़्त लगेगा." |
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