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बदावी का मुक़ाबला महाथिर के कद से
मलेशिया के नए प्रधानमंत्री अब्दुल्ला अहमद बदावी के सामने सबसे बड़ी समस्या है 22 साल से देश की गद्दी संभाल रहे महाथिर मोहम्मद के राजनीतिक क़द का मुक़ाबला. मलेशिया के ज़्यादातर लोग बदावी के बारे में बहुत कम जानते हैं. जो लोग उनके बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखते हैं वे भी देश के विदेश मंत्री के रूप में उनके छोटे से कार्यकाल के कारण. 63 वर्षीय पूर्व नौकरशाह बदावी को एक अच्छे प्रशासक के रूप में ज़रूर देखा जा सकता है लेकिन एक दूरदृष्टि वाले नेता के रूप में उनकी पहचान नहीं है. डॉक्टर महाथिर मोहम्मद की तरह अब्दुल्ला अहमद बदावी के पिता मलेशिया के सत्ताधारी नेशनल फ़्रंट गठबंधन में सबसे प्रभावी पार्टी यूनाइटेड मलय नेशनल ऑर्गनाइज़ेशन यानी यूएमएनओ के संस्थापक सदस्य रहे हैं. इसी पार्टी ने 1957 में देश से ब्रिटिश शासन की समाप्ति के बारे में बातचीत की थी. राजनीतिक जीवन मलेशिया के पेनांग प्रांत में जन्मे बदावी ने इस्लाम मज़हब में डिग्री हासिल की और 1978 में अपने पिता की मृत्यु तक सिविल सेवा से जुड़े रहे.
इसके बाद उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन शुरू किया और संसद में अपनी जगह बनाई. महाथिर के शासनकाल में बदावी शिक्षा, रक्षा और विदेश मंत्री रहे. 1998 में उन्हें अनवर इब्राहीम की जगह उप प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया. दरअसल महातिर मोहम्मद ने अनवर इब्राहीम को ही अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया था लेकिन 1998 में अनवर को भ्रष्टाचार और समलैंगिक यौनाचार के आरोप में जेल हो गई. जानकारों का कहना है कि ऐसी स्थिति में सत्ता तक अपनी पहुँच बनाने वाले बदावी के लिए शीर्ष तक पहुँचना आसान नहीं रहा है. लेकिन फिर भी उनकी उदार छवि से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मलेशिया के उदार शासन का संकेत जाएगा और बदावी का नरम रुख़ अच्छे कूटनीतिक संबंध बनाने में भी असरदार साबित हो सकता है. जानकारों का कहना है कि मलेशिया में ये परंपरा सी रही है कि उप प्रधानमंत्री का क़द उतना बड़ा नहीं होता और बदावी का असली चेहरा उसी समय उभरेगा जब महाथिर मोहम्मद देश के राजनीतिक परिदृश्य से हट जाएँगे. |
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