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महातिर के बचाव में उतरे मुस्लिम देश
यहूदियों को लेकर दिए गए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद के बयान से विवाद खड़ा हो गया है. और अब मुसलमानों के प्रभाव वाले देशों के नेता उनका बचाव कर रहे हैं. मुस्लिम आबादी वाले देशों के सम्मेलन (ओआईसी) के अध्यक्ष और मेज़बान डॉक्टर मोहम्मद ने कहा था कि उनकी राय में दुनिया पर 'गुप्त रुप से यहूदियों का ही राज है'. डॉक्टर मोहम्मद का कहना था, "यहूदी इस राज़ के दौरान दूसरों का इस्तेमाल गुप्त रुप से अपने लिए लड़ने और मरने के लिए कर रहे हैं." इसके बाद उनके बयान की पश्चिमी देशों में कड़ी आलोचना हुई और उस बयान को 'नस्लवादी' करार दिया गया. इस बीच मलेशियाई सरकार ने भी इस बयान से पश्चिमी देशों में उभरी नाराज़गी को ठंडा करने की कोशिश की है. कहा जा रहा है कि इस बयान का मक़सद शायद मुसलमान प्रभाव वाले देशों और मुसलमानों को सचेत करना था मगर इससे यूरोप और अमरीका में ख़ासी प्रतिक्रिया हुई है. वहीं सम्मेलन में हिस्सा ले रहे प्रतिनिधियों ने उनके बयान का बचाव किया है. प्रतिक्रिया और बचाव डॉक्टर महातिर मोहम्मद का कहना था, "यहूदियों ने लोकतंत्र, समाजवाद और मानवाधिकार जैसी चीज़ें अपने हाथ मज़बूत करने के लिए बनाई हैं और वे दूसरों का इस्तेमाल अपने लिए लड़ने और मरने के लिए कर रहे हैं." इसके बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय ने इस बयान को 'अवमाननापूर्ण' बताया वहीं इटली की ओर से इसे दुर्भावनापूर्ण कहा गया. जर्मनी ने मलेशिया के प्रतिनिधि को बुलाकर विरोध भी दर्ज कराया.
इसके बाद मलेशिया के विदेश मंत्री सैयद हामिद अलबर ने कहा कि उन्हें इस चीज़ का अफ़सोस है कि बयान का ग़लत अर्थ लगाया गया. सैयद अलबर के अनुसार बयान यहूदी विरोधी कतई नहीं था. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा कि डॉक्टर मोहम्मद का बयान नस्लवादी नहीं था. करज़ई ने तो इस्लामी देशों में शिक्षा और विकास पर ज़ोर देने के उनके बयान का ख़ास तौर पर स्वागत किया. यमन के विदेश मंत्री का कहना था कि डॉक्टर मोहम्मद ने तो सिर्फ़ तथ्य ही रखे थे. मलेशियाई नेता वैश्वीकरण और पश्चिमी देशों की विदेश नीति के कटु आलोचक रहे हैं जबकि मुसलमानों के प्रभाव वाले देशों और विकासशील देशों का समर्थन करते रहे हैं. उन्होंने 1997 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की सलाह ठुकराते हुए अपने देश को पूर्वी एशियाई देशों के आर्थिक संकट से बचा लिया था. |
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