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इराक़ के मामले पर इस्लामी देशों की चिंता
इस्लामी देशों के संगठन(ओआईसी) ने इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका बढ़ाने पर ज़ोर दिया है. मलेशिया में चल रही संगठन की बैठक में सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने इराक़ पर अमरीकी नियंत्रण पर चिंता व्यक्त की है. ओआईसी के विदेश मंत्रियों ने कहा है कि बैठक के बाद जारी किए जाने वाले बयान में इराक़ मुद्दे पर इस्लामी देशों की चिंताओं को स्वर दिया जाना चाहिए. इस्लामी देशों ने सुरक्षा परिषद में नए अमरीकी प्रस्ताव का आम तौर पर स्वागत किया है. ग़ौरतलब है कि प्रस्ताव के मसौदे में इराक़ी शासकीय परिषद के लिए नया संविधान बनाने और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम पेश करने की तारीख़ 15 दिसंबर निर्धारित की गई है. गुरुवार से शुरू ओआईसी की शिखर बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा होने की उम्मीद है. सैनिक भेजने पर सहमति नहीं समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मेज़बान देश मलेशिया के विदेश मंत्री सैयद हामिद अलबार ने कहा, "अमरीकी प्रस्ताव में सबसे महत्वपूर्ण बात एक निश्चित तारीख़ का होना है. लेकिन मैं समझता हूँ उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है संयुक्त राष्ट्र को केंद्रीय भूमिका में लाया जाना."
इस बीच बैठक में इराक़ में इस्लामी देशों के सैनिक भेजे जाने के मुद्दे पर कोई प्रस्ताव पारित किए जाने की संभावना कम हो गई है. दरअसल, पाकिस्तान की ओर से प्रस्तुत इस प्रस्ताव पर ओआईसी के 57 सदस्य देशों के बीच बहुत मतभेद हैं. बैठक में इराक़ी शासकीय परिषद को इराक़ का प्रतिनिधित्व करने दिया गया है. परिषद इराक़ में विदेशी सैनिकों की तैनाती की पक्षधर है लेकिन उसने पड़ोसी देशों के सैनिक भेजे जाने के किसी प्रस्ताव का विरोध किया है. |
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