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इराक़ प्रस्ताव का जर्मनी और फ़्रांस ने स्वागत किया
इराक़ के राजनीतिक और आर्थिक पुनर्निर्माण के बारे में अमरीकी प्रस्ताव के मसौदे पर फ़्रांस और जर्मनी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है. इस प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र में चर्चा होनी है. एक ओर जहाँ इराक़ संबंधी अमरीका के प्रस्ताव का फ़्रांस और जर्मनी के प्रस्ताव का स्वागत किया है.
प्रस्ताव के मसौदे में इराक़ी शासकीय परिषद के लिए नया संविधान बनाने और उसके बाद चुनाव कार्यक्रम पेश करने की तारीख़ 15 दिसंबर निर्धारित की गई है. संवाददाता का कहना है कि लेकिन इसमें अंतरिम सरकार को प्रभुसत्ता सौंपने की बात नहीं कही गई है जबकि उसे संविधान के निर्माण की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है. शुरुआत में अमरीका प्रस्ताव को ज़रूरी समर्थन न मिल पाने के कारण इस प्रस्ताव में संशोधन किया गया है. पहले के प्रस्ताव का सुरक्षा परिषद के कुछ सदस्यों के अलावा संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कोफ़ी अन्नान ने भी निंदा की थी और कहा था कि इससे इराक़ में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका नहीं बढ़ेगी. अमरीका इस प्रस्ताव के माध्यम से इराक़ में शांति रक्षक सैनिक भेजना चाहता है और वहाँ पुनर्निर्माण भी कराना चाहता है. प्रगति फ़्रांस के विदेश मंत्री डोमिनिक डी विलेपाँ ने कहा है कि नए प्रस्ताव में कुछ प्रगति हुई है.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री जैक स्ट्रॉ ने बैठक में उम्मीद जताई कि इस सप्ताह इस प्रस्ताव पर मतदान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि संशोधनों में कई देशों की आपत्तियों का ख़्याल रखा गया है. संयुक्त राष्ट्र चाहता है कि पहले इराक़ में चुनाव हों फिर वहाँ संविधान बने लेकिन अमरीका चाहता है कि संविधान बनने के बाद ही वहाँ चुनाव हों. |
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