क्या हुआ था फुकुशिमा में?

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जापान में 11 मार्च 2011 को आए भूकंप के बाद उठी विनाशकारी सुनामी लहरों की चपेट में फुकुशिमा परमाणु ऊर्जा संयंत्र आ गया था. इस संयंत्र को भारी नुकसान हुआ था.
संयंत्र से हुए विकिरण रिसाव के चलते आस-पास के इलाके को खाली करवाना पड़ा था. इस घटना ने परमाणु ऊर्जा की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े किए थे.
फुकुशिमा एक बार फिर खबरों में है क्योंकि जापान की एक संसदीय समिति ने फुकुशिमा में विकिरण रिसाव के बाद उठाए गए कदमों की जांच की है.
फुकुशिमा मामले पर पहले आई रिपोर्टों के अनुसार जापान के पूर्व प्रधानमंत्री नाओटो कान और उनके सहयोगियों ने बार-बार सीधे फुकुशिमा में बचाव कार्य में जुटे अधिकारियों ने जानकारियां मांगी जिससे विकिरण रिसाव के काम में बाधा पहुंची.
फुकुशिमा हादसे के बाद उठाए गए कदम कितने कारगर थे ये जानना बहुत जरूरी है क्योंकि इसी से ऐसी परमाणु दुर्घटनाओं से निपटने के लिए कई सीखें मिल सकती हैं.
फुकुशिमा में जो कुछ हुआ उसके बाद, दुनिया भर में एक बार फिर परमाणु ऊर्जा की सुरक्षा को लेकर एक नई और गर्मागर्म बहस छिड़ गई थी.
भारत में भी कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र का विरोध कर रहे कार्यकर्ता परमाणु ऊर्जा के विरुद्ध तर्क रखते हुए फुकुशिमा हादसे की मिसाल देते रहे हैं.








