जारवा जनजाति की महिलाओं के दो और वीडियो सामने आए

ब्रितानी अख़बार 'ऑब्ज़र्वर' ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जारवा जनजाति की महिलाओं के अर्धनग्न रूप में नाचते दो नए वीडियो जारी किए हैं.
माना जा रहा है कि ये वीडियो इस मामले में कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों के लिप्त होने के ताज़ा सबूत हैं.
'ऑब्ज़र्वर' के एक पत्रकार को हासिल हुआ पहला वीडियो तीन मिनट 19 सेकेंड का है और एक मोबाइल फ़ोन के ज़रिए लिया गया है.
इस वीडियो में जारवा युवतियों को कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के सामने नाचते हुए दिखाया गया है. साथ ही सुरक्षाकर्मियों की कुछ टिप्पणियां भी इस वीडियो का हिस्सा हैं.
अख़बार के मुताबिक़ वीडियो में लगातार युवतियों के निर्वस्त्र अंगों को दिखाया गया है.
पहला वीडियो
जारवा लोगों को पर्यटकों के सामने खाने के बदले में नाचते दिखाए जाने को लेकर 'ऑब्ज़र्वर' की ओर से जनवरी में जारी किए गए पहले वीडियो के बाद काफ़ी हंगामा मचा था जिसके बाद राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने अंडमान प्रशासन को इस मामले की जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया था.
आयोग के अध्यक्ष रामेश्वर उराव ने बताया कि अंडमान में आदिवासी कल्याण विभाग के सहायक निदेशक ने उन्हें बताया है कि जांच पूरी हो चुकी है और अंडमान प्रशासन अब यह रिपोर्ट शीघ्र ही आयोग के पास भेजेगा.
लेकिन पहले वीडियो का मामला अभी पूरी तरह ठंडा भी नहीं पड़ा था कि ऐसे दो और वीडियो सामने आ गए हैं.
इन वीडियो में आदिवासियों को विदेशी सैलानियों के सामने नचाने में कथित तौर पर स्थानीय पुलिसवालों की मिलीभगत भी सामने आ गई है.
वीडियो को देखकर कहा जा सकता है कि कथित तौर पुलिस ने उन विदेशी सैलानियों की मदद की जो कुछ पैसों और खाना का लालच देकर आदिवासियों को अर्धनग्न अवस्था में नाचने पर मजबूर करते हैं.
वीडियो में एक पुलिसवाला दिखाई देता है जो नाच रही आदिवासी महिलाओं के सामने आराम से बैठा है.
हालाकि पहली बार वीडियो जारी होने के समय अंडमान निकोबार प्रशासन ने दावा किया था वीडियो में जिस व्यक्ति ने जरवा महिलाओं को डांस करने के लिए कहा है, वह पुलिस वाला नहीं है.
जारवा जनजाति
सरकारी आंकड़ों में जारवा जनजाति के लोगों की संख्या क़रीब 403 है. ये जंगलों में रहने वाली आदिवासी प्रजाति है.
ये अंडमान द्वीप के हिंद महासागर से लगते उत्तरी छोर पर रहते हैं.
1990 में ये पहली बार बाहरी दुनिया के संपर्क में आए.
जारवा जनजाति के पुरुष व महिलाएं अपने शरीर के सिर्फ़ निचले धड़ पर पत्ते या कपड़े के छोटे टुकड़े पहनते हैं.












