माल्टा में तलाक़ पर जनमत संग्रह

माल्टा में चर्च का एक पोस्टर

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इमेज कैप्शन, चर्च के इस पोस्टर में कहा गया है कि 'ईसा को हाँ, तलाक़ को ना'

रोमन कैथोलिक बहुल भूमध्यसागरीय देश माल्टा के निवासी शनिवार को एक जनमतसंग्रह में भाग ले रहें हैं.

इस जनमत-संग्रह का उद्देश्य यह तय करना है कि माल्टा में तलाक़ को क़ानूनी रूप से वैध क़रार दिया जाए या नहीं.

वैटिकन सिटी के अलावा फ़िलीपिन्स और माल्टा ही दुनिया के दो ऐसे देश हैं जहां तलाक़ लेने या देने की इजाज़त नहीं है.

माल्टा में दंपत्तियों के क़ानूनी रुप से अलग-अलग रहने की बातें बहुत आम है लेकिन अख़बारों के ज़रिए किए गए सर्वे के मुताबिक़ माल्टा के ज़्यादातर नागरिक अभी भी कैथोलिक चर्च के उपदेशों का समर्थन करते हैं जिनमें कहा जाता है कि शादी ज़िंदगी भर के लिए होती है और इस रिश्ते को बहुत ही ग़ैरमामूली हालात में तोड़ा जाना चाहिए.

जनमत-संग्रह के ज़रिए माल्टा में एक नया क़ानून बनाने के बारे में जनता से उनकी राय ली जा रही है.

तलाक़ का क़ानून

इस नए क़ानून के तहत माल्टा के दंपत्तियों को वैवाहिक संबंध में दरार पड़ने के चार साल बाद तलाक़ की इजाज़त मिल जाएगी.

माल्टा के मौजूदा क़ानून के मुताबिक़ अगर माल्टा के किसी नागरिक ने किसी विदेशी से शादी की है और विदेशी का़नून के अनुसार उससे तलाक़ ले लिया है तो उसे वैध माना जाएगा और तलाक़ लेने वाले को दूसरी शादी करने की अनुमति है.

पिछले साल एक सांसद जेफ़रे पूलिसिनो ऑरलैंडो ने एक दूसरे सांसद के साथ मिलकर एक प्राइवेट मेंबर बिल संसद में पेश किया था जिसमें तलाक़ का प्रावधान था.

लेकिन प्रधानमंत्री लॉरेंस गौंज़ी ने इस पर जनमत-संग्रह कराने का निर्णय ले लिया.

इस फ़ैसले के बाद तलाक़ के समर्थक और विरोधियों में बहस शुरू हो गई है.

माल्टा का स्थानीय कैथोलिक चर्च जनमत-संग्रह में नए क़ानून को ख़ारिज करने के लिए अभियान चला रहा है.

बहस

सांसद जेफ़रे पुलिसिनो ऑरलैंडो
इमेज कैप्शन, सांसद जेफ़रे पुलिसिनो ऑरलैंडो ने संसद में बिल पेश किया था

चर्च का कहना है कि तलाक़ संबंधित नए क़ानून से परिवार अस्थिर होंगें.

लेकिन तलाक़ का समर्थन करने वालों का कहना है कि 21वीं सदी में तलाक़ की अनुमति मानवाधिकार का हिस्सा है.

तलाक़ का समर्थन करने वाले विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जोसेफ़ मसकट का कहना है कि दंपत्तियों के अलग होने के रोज़ाना दो मामले माल्टा की अदालतों में आते हैं.

उसके अलावा अदालतें लगातार विदेशों में माल्टा के किसी नागरिक के तलाक़ का रिकॉर्ड दर्ज करते हैं.

हालाकि लेबर पार्टी ने इस जनमत-संग्रह के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई फ़ैसला नहीं किया है.

बिल पेश करने वाले ऑरलैंडो का मानना है कि यह मामला सिर्फ़ तलाक़ का नहीं है. उनके मुताबिक़ इसका संबंध इस बात से है कि माल्टा के समाज में चर्च की क्या भूमिका है और माल्टा की राजनीति और समाज में चर्च कितना असर रखता है.

अनुमान लगाया जा रहा है कि जनमत-संग्रह में कांटे की टक्कर है. रविवार को नतीजे आने की संभावना है लेकिन नतीजा चाहे जो भी हो इतना ज़रूर है कि माल्टा में तलाक़ को लेकर बहस जारी रहेगी.