आईएसआई-लश्कर की मिलीभगत: हेडली

- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शिकागो से
शिकागो की एक अदालत में सरकारी गवाह डेविड हेडली ने कहा है की वर्ष 2008 में मुंबई हमलों में पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए- तैबा दोनों का हाथ था. उन्होंने कहा कि इस मामले में दोनों की मिलीभगत थी.
वे अदालत में मुंबई हमलों से संबंधित एक मुक़दमे में पाकिस्तान में जन्मे केनेडियन नागरिक तहव्वुर राणा के ख़िलाफ़ गवाही दे रहे थे.
राणा पर आरोप है कि उन्होंने नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों की योजना में अमरीकी नागरिक डेविड हेडली और चार पाकिस्तानी अभियुक्तों की मदद की थी. उन पर आरोप है की उन्होंने निशाना बनाए जाने वाली जगहों की पहचान करने में डेविड हेडली की सहायता की थी.
नवंबर 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों में कम से कम 166 लोग मारे गए थे जिनमें छह अमरीकी भी थे. अनेक अन्य लोग इन घटनाओं में घायल हुए थे और भारत-पाकिस्तान समग्र वार्ता पर इसके बाद विराम लग गया था.
हेडली अब सरकारी गवाह
हेडली भी इस मामले में अभियुक्त थे लेकिन उन्होंने अपने खिलाफ़ लगे आरोपों को स्वीकार कर लिया है. अब वह सरकारी गवाह बन गए हैं. राणा के खिलाफ़ अब वह सब से अहम गवाह हैं.
हेडली ने पहले ही अदालत में बयान दिया है की वे मुंबई हमलों की साज़िश में शामिल थे. उन्होंने सोमवार को अदालत में बताया कि किस तरह वे दस साल पहले लश्कर की तरफ़ आकर्षित हुए और बाद में उन्होंने कई बार ट्रेनिंग ली.
उन्हें ख़ास तौर से भारत के खिलाफ़ हमलों के लिए चुना गया था. उन्होंने कहा की वह भारत से पाकिस्तान के विभाजन का बदला लेना चाहते थे.
उन्होंने बताया की मेजर इक़बाल नाम के एक व्यक्ति ने उन्हें मुंबई में हमलों की तैयारी के लिए पच्चीस हज़ार डालर दिए. उनके अनुसार मेजर इक़बाल का संबंध पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई से था. उन्होंने कहा की लश्कर के प्रमुख हफ़िज सईद भी हमलों की योजना में शामिल थे.
'आईएसआई और लश्कर दोनों शामिल'
हेडली ने कहा की वह आईएसआई के एक कर्नल और कई और अफ़सरों से संपर्क में थे. उन्होंने दावा किया की आईएसआई लश्कर, हिज़्बुल मुजाहिदीन और दूसरे चरमपंथी संगठनों को सहायता देता था.
उनका कहना था की एक बार जब उन्होंने अमरीका के ख़िलाफ़ अदालती कारवाई का ज़िक्र किया तो हफ़ीज सईद और उनके साथियों ने कहा की उन्हें आईएसआई से इजाज़त लेनी पड़ेगी.
मुंबई में हेडली ने कई लोगों से दोस्ती कर ली थी. इनमें शिवसेना के एक नेता थे और बोलीवुड के निर्माता महेश भट्ट के बेटे भी शामिल थे. लेकिन उनके बयान से यह साफ़ हो गया कि इन दोनों को हेडली की असलियत का पता नहीं था.
अक्टूबर 2001 में उनकी और अभियुक्त राणा की गिरफ़्तारी के बाद दोनों सोमवार को पहली बार अदालत में आमने सामने नज़र आए. दोनों बचपन के दोस्त थे. हेडली साफ़ साफ़ और ठहर ठहर कर सवालों का जवाब दे रहे थे.
सफ़ेद बाल और दाढ़ी वाले राणा

सफ़ेद बाल और दाढ़ी वाले राणा हाँलाकि हेडली की उम्र के हैं लेकिन सोमवार को वह उनसे अधिक उम्र के नज़र आ रहे थे. वह काफ़ी शांत नज़र आ रहे थे और अपने वकीलों से मुस्कुरा कर बातें भी कर रहे थे.
कल के दोस्त आज एक दूसरे के ख़िलाफ़ हैं. राणा के वकील चार्ली स्विफ़्ट ने कहा की हेडली की गवाही को स्वीकार नहीं करना चाहिए क्योंकि वह हमेशा झूठ बोलते रहे हैं.
उनके अनुसार वह एक साथ आईएसआई, लश्कर और अमरीकी सरकार के लिए काम कर रहे थे. उनकी तीन बीवियां थीं और तीनों को एक दूसरे के बारे में नहीं पता था.
यह मुक़दमा तीन हफ़्ते तक जारी रहेगा. जूरी को राणा के वकील यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि राणा को मालूम नहीं था हेडली किस मुहीम में शामिल थे. जबकि सरकारी वकील की कोशिश यह समझाने की है कि राणा को सब पता था और उन्होंने जानबूझ कर मुंबई हमलों में मदद की थी.












