श्याबाओ पर नोबेल पुरस्कार समारोह का बहिष्कार

नार्वे की नोबेल समिति ने कहा है कि शुक्रवार को चीन के कार्यकर्ता लू श्याबाओ को दिए जाने वाले नोबेल शांति पुरस्कार समारोह में चीन और 18 अन्य देश भाग नहीं लेंगें.
नार्वे नोबेल समिति को रुस, सऊदी अरब, पाकिस्तान, इराक़ और ईरान ने इस समारोह में शामिल न होने की जानकारी दी है.
इससे पहले चीन के अधिकारियों ने ये दावा किया था कि दुनिया के कई देश इस समारोह में भाग नहीं लेंगे.
इस समिति ने लू श्याबाओ के बारे में कहा, ''चीन में मानवधिकारों के लिए लड़ने वाले प्रतीक में से एक प्रतिमान हैं''.
नॉर्व समिति ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि रुस, क़ज़ाकिस्तान, कोलंबिया, ट्यूनीशिया, सऊदी अरब, पाकिस्तान, इराक़, ईरान, वियतनाम, अफ़ग़ानिस्तान, वेनेज़ुएला, फ़िलीपींस, मिस्र, सूडान, यूक्रेन, क्यूबा और मोरोक्को के राजदूत विभिन्न कारणों से इस समारोह में शामिल नहीं होंगे.
इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता जियेंग यू का कहना है कि 100 से ज़्यादा देशों ने इस समारोह में शामिल न होने का फैसला लेकर बीजिंग का समर्थन किया है.
उनका कहना था, ''नोबेल समिति के ही सदस्य चीन के विरोध में ग़लतफ़हमी पैदा कर रहे हैं''
उन्होंने कहा, ''हम उनका विरोध करेंगें जो लू श्याबाओ को चीन के ख़िलाफ़ मुद्दा बना रहे हैं और चीन की क़ानूनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं.''
54 वर्षीय लू श्याबाओ चीन में मानवधिकारों को लेकर लड़ाई लड़ते रहे हैं और 1989 में तिआनमन चौराहे पर हुए विद्रोह में शामिल हुए नेताओं मे से एक थे.
पिछले साल उन्हें विध्वंस भड़काने के आरोप में 11 साल कैद दी गई थी.
श्याबाओ ने चीन में बहुदलीय लोकतंत्र और मानवधिकारों को लेकर एक चार्टर -8 का मसौदा तैयार किया था जिसके विरोध में उन्हें ये कैद की सज़ा सुनाई गई.












