सद्दाम हुसैन को फांसी दी गई

दो दशक से ज़्यादा समय तक इराक़ के शासक रहे, देश के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को उत्तरी बग़दाद में फाँसी दी गई है. उन्हें स्थानीय समयानुसार तड़के छह बजे फाँसी दी गई.
इराक़ की एक अदालत ने पिछले साल उन्हें मानवता के ख़िलाफ़ अपराध करने का दोषी पाया था.
इराक़ी उप विदेश मंत्री लाबीद अबावी ने बीबीसी के साथ बातचीच में सद्दाम को फाँसी दिए जाने की पुष्टि की है.
इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मौफ़ाज़ अल-रूबेई फाँसी दिए जाने के प्रत्यक्षदर्शी थे और उन्होंने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की वीडियो फ़िल्म बनाई गई है.
उनका कहना था कि हथकड़ियों में सद्दाम को चुपचाप फाँसी के तख़ते तक ले जाया गया. उनका कहना था कि सद्दाम के हाथ में पवित्र क़ुरान था और वे काफ़ी हताश नज़र आ रहे थे.
सद्दाम हुसैन ने फाँसी दिए जाते समय किसी तरह का विरोध नहीं किया लेकिन काला नकाब पहनने से इनकार कर दिया.
इराक़ में सुरक्षा
इराक़ में अमरीकी सैनिक और इराक़ी सुरक्षाकर्मी पूरी सतर्कता बरत रहे हैं ताकि यदि कोई हिंसक प्रतिक्रिया होती है तो स्थित का सामना किया जा सके.
इराक़ में कई जगह तनाव है और हिंसा होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है.
अमरीकी विदेश मंत्रालय ने अपने सभी दूतावासों को सतर्क रहने की चेतावनी दी थी.
ख़बरें मिली हैं कि बग़दाद में शिया बहुल इलाक़ों में कई जगह ख़ुशायाँ मनाई गई हैं और लोगों ने हवा में फ़ायर भी किए हैं लेकिन वैसे शहर में शांति है.
दुजैल नरसंहार मामला

सद्दाम हुसैन को वर्ष 1982 में इराक़ में हुए दुजैल जनसंहार मामले में दोषी पाया गया था और पिछले साल नवंबर में उन्हें फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी.
वर्ष 1982 में सद्दाम हुसैन पर जानलेवा हमले की कोशिश के बाद दुजैल में 148 शियाओं को मार दिया गया था.
सद्दाम हुसैन और उनके सहयोगियों को इसी मामले में दोषी पाया गया था और इसी महीने इराक़ की एक अपील अदालत ने उनकी अपील ख़ारिज कर दी थी.
उन्हें फाँसी दिए जाने से एक दिन पहले सद्दाम के वकील ने वाशिंगटन में एक अदालत से अपील की थी कि सद्दाम को इराक़ी अधिकारियों के हवाले न करने के निर्देश दिए जाएँ. लेकिन अमरीकी अदालत ने इस अपील को ख़ारिज कर दिया.
दो दशक रहे शासक
सद्दाम हुसैन दो दशक से ज़्यादा समय तक इराक़ के शासक रहे.
सद्दाम हुसैन का जन्म वर्ष 1937 के अप्रैल महीने में बग़दाद के उत्तर में स्थित तिकरित के एक गाँव में हुआ था.
वर्ष 1957 में युवा हुसैन ने बाथ पार्टी की सदस्यता ली जो अरब राष्ट्रवाद के एक समाजवादी रूप का अभियान चला रही थी.
वर्ष 1962 में इराक़ में विद्रोह हुआ और ब्रिगेडियर अब्दुल करीम क़ासिम ने ब्रिटेन के समर्थन से चल रही राजशाही को हटाकर सत्ता अपने क़ब्ज़े में कर ली. सद्दाम भी इस विद्रोह में शामिल थे.
1968 में फिर विद्रोह हुआ और इस बार 31 वर्षीय सद्दाम हुसैन ने जेनरल अहमद हसन अल बक्र के साथ मिलकर सत्ता पर क़ब्ज़ा किया.
1979 में सद्दाम हुसैन ने ख़राब स्वास्थ्य के नाम पर जनरल बक्र को इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर दिया और ख़ुद देश के राष्ट्रपति बन बैठे.
उन्होंने वर्ष 1980 में नई इस्लामिक क्रांति के प्रभावों को कमज़ोर करने के लिए पश्चिमी ईरान की सीमाओं में अपनी सेनाएँ उतार दीं.
इसके बाद आठ वर्षों तक चले युद्ध में लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी.
वर्ष 2003 में इराक़ अमरीका और ब्रिटन ने इराक़ पर सामूहिक विनाश के हथियार होने का आरोप लगाया लेकिन इराक़ ने इसका खंडन किया.
जब संयुक्त राष्ट्र में इस मसले पर आम राय नहीं बन पाई तो अमरीका और ब्रिटेन के नेतृत्व वाली सेनाओं ने इराक़ पर हमला किया और अप्रैल 2003 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से बाहर कर दिया.












