मछुआरों के गांव में बगुलों की चांदी

मुंबई के पास स्थित मढ आइलैंड में बड़ी आबादी मछुआरों की है. यहां मानसून की वजह से तीन महीने मछली पकड़ने का काम बंद रहता है और इस दौरान लोग मछलियां सुखाने और उनकी पैकिंग का काम करते हैं.

मुंबई का मढ आइलैंड
इमेज कैप्शन, मुंबई के उत्तर-पश्चिमी तट के नज़दीक मढ आइलैंड है. यहां बड़ी आबादी मछुआरों की है. जून से सितंबर तक मानसून के समय मछली पकड़ने का काम बंद हो जाता है क्योंकि उस समय समंदर में ऊंची-ऊंची लहरें उठने लगती हैं.
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इमेज कैप्शन, मुंबई की मशहूर मछली 'बॉम्बे डक' को सुखाने के लिए खुले में तार पर टांगा जाता है. मछली के इस कारोबार में बहुत से प्रवासी मज़दूर भी जुड़े होते हैं, जो झींगा, बॉम्बे डक आदि मछलियों को सुखाने और उनकी साफ-सफाई, छंटाई व पैकिंग का काम करते हैं.
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इमेज कैप्शन, इन दिनों यहां द्वीप के तट पर तारों पर सूखती बॉम्बे डक मछलियों की क़तार की क़तार मिल जाएगी.
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इमेज कैप्शन, झींगा मछली को पकड़ने के बाद इसे सुखाने के लिए तट पर खुले में ही फैला दिया जाता है. सूखने के बाद सबसे पहले उन्हें साफ किया जाता है.
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इमेज कैप्शन, मई जून के महीने में तट पर सूखती झींगा मछलियों की चादर सी फैली दिखती है. एक बगुला अपनी चोंच में झींगा मछली लेकर उड़ने को तैयार.
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इमेज कैप्शन, एक मज़दूर सूखी झींगा मछलियों को पैकिंग के लिए अलग करती हुई.
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इमेज कैप्शन, मढ आइलैंड मछुआरों के छोटे-छोटे गांवों का समूह है. यहां कृषि भूमि भी है. इन गांवों को पुर्तगालियों ने बसाया था. पहले यह निगरानी के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में सैन्य प्रशिक्षुओं के लिए प्रशिक्षण स्थल के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा. अभी हाल ही में इसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है. यहां अब कई लोकप्रिय बंगले, रिसॉर्ट और पिकनिक-पार्टियों के लिए कई आकर्षक जगहें विकसित हो गई हैं.
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इमेज कैप्शन, खेती-किसानी की तरह ही इस काम में घर के सभी सदस्य सहयोग करते हैं, क्योंकि यहां आजीविका का यही मुख्य स्रोत है.
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इमेज कैप्शन, झींगा मछलियों को सुखा कर पैक करने के अलावा उन्हें ताज़ा बनाए रखने के लिए बर्फ में रख कर भी पैकिंग की जाती है.
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इमेज कैप्शन, सूखी मछलियों की पैकिंग के काम में लगे मज़दूर मछली पकड़ने वाले जाल पर आराम करते हुए.