सोशल मीडिया पर सावधानी हटी और दुर्घटना घटी

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- Author, सादिया हाशमी- एल्सबी
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
आज लगभग सारी दुनिया सोशल मीडिया पर है. ट्विटर पर अपने ख़याल शेयर कर रही है. फ़ेसबुक पर अपने इमोशन और इंस्टाग्राम पर अपनी तस्वीरें शेयर कर रही है. लोगों को लगता है कि सोशल मीडिया पर उन्हें पूरी आज़ादी हासिल है. कुछ भी कहने-सुनने की, कुछ भी शेयर करने की.
मगर ऐसा नहीं है. सोशल मीडिया पर बेरोक-टोक कुछ भी शेयर करना आपको मुसीबत में डाल सकता है.
लंदन की रेबेका अल्वारेज़ को ही लीजिए. वो मीडिया कंपनी में काम करती हैं. एक दिन उन्होंने अपने बच्चे की एक तस्वीर फ़ेसबुक पर शेयर की. इस पर पहले तो बहुत लाइक्स मिले. मगर बाद में लोगों ने उनके इस क़दम की निंदा शुरू कर दी.
उनके बेटे की बिना कपड़ों की तस्वीर शेयर करने पर सवाल उठने लगे. कुछ लोग सलाह देने लगे. तो, कइयों ने सीधा हमला ही कर दिया, ये कहकर कि इंटरनेट पर बच्चे की ऐसी तस्वीर डालना ख़तरनाक हो सकता है.
रेबेका को समझ में नहीं आया कि आख़िर इसमें ग़लत क्या है? उन्हें लगा कि उनकी भावनाएं समझे बग़ैर ही लोग नतीजे पर पहुंच गए. लोग उन्हें शर्मिंदा कर रहे थे. लेकिन इस तजुर्बे से रेबेका ने एक सबक़ लिया है. अब वो कोई भी तस्वीर सोशल मीडिया पर डालने से पहले सौ बार सोचती हैं.
लंदन की वक़ील क्लेयर नोल्स कहती हैं कि सब लोग इतने ख़ुशक़िस्मत नहीं. एक सोशल मीडिया पोस्ट के चलते उनकी एक मुवक़्क़िल की नौकरी जाते-जाते बची.

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उसने फ़ेसबुक पर ये लिखा था कि उनका मैनेजर मूर्ख है और अपने काम के लिए फिट नहीं. बस फ़ेसबुक पोस्ट को उनके दफ़्तर के साथियों ने ख़ूब साझा किया. बात कंपनी और मैनेजर तक जा पहुंची. उस कर्मचारी को नोटिस देकर नौकरी से निकालने की चेतावनी दी गई. माफ़ी मांगने और लिखित में आगे ऐसा न करने का भरोसा देने पर उसकी नौकरी बची.
जब आपके दफ़्तर के साथी सोशल मीडिया पर आपके दोस्त हों, तो वहां और भी सावधानी बरतने की ज़रूरत है. वहां बात करते वक़्त भी सतर्क रहना चाहिए. फिर चाहे आप अपनी डेस्क पर बात कर रहे हों. या फिर, सोशल मीडिया पर कोई चर्चा हो रही हो. आपकी कोई राय, कंपनी या अपने सीनियर अधिकारी के ख़िलाफ़ मानी जा सकती है.
तो, क्या सोशल मीडिया जो आज़ाद माध्यम माना जा रहा था अब पाबंदियों का शिकार होने लगा है. लोग अब खुलकर अपनी बात नहीं रख पा रहे हैं. कुछ हद तक ये बात सच है. अमरीका में हुए प्यू रिसर्च में लोगों ने माना है कि सोशल मीडिया पर कोई बात खुलकर कहने में वो हिचकते हैं. इसीलिए आज व्हाट्सऐप जैसे माध्यमों के ज़रिए ज़्यादा बात कही जा रही है. जहां गिने-चुने भरोसेमंद साथियों से कुछ भी साझा किया जा सकता है.
ये ध्यान रखने वाली बात है कि आप दफ़्तर से भले ही काम ख़त्म करके निकल जाएं, मगर सोशल मीडिया पर आपकी हलचल पर किसी न किसी की नज़र पड़ ही जाती है. ऐसे में वहां कुछ भी बेहिचक कहना आपको मुसीबत में डाल सकता है.
हाल ही में ब्रिटिश काउंसिल की एंजेला गिबिंस के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई. क्योंकि उन्होंने सोशल मीडिया पर राजकुमार जॉर्ज के बारे में एक लेख लिखा था. इसी तरह एक मशहूर ब्रिटिश शेफ को एक तस्वीर सोशल मीडिया पर डालने पर नौकरी से हटा दिया गया था. इस फोटो में शेफ ने दिखाया था कि कैसे शाकाहारी लोगों को बीफ़ खिलाया जा रहा है, उनके अनजाने में.

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असल में कंपनी के कर्मचारी जब सोशल मीडिया पर कुछ लिखते हैं, तो उससे कंपनी का नाम भी जुड़ जाता है. भले ही कंपनी का उससे कुछ भी लेना-देना न हो. कई बार ये भी होता है कि सोशल मीडिया पर भावनाओं के ज्वार में बहते हुए कोई कर्मचारी कोई ख़ुफ़िया जानकारी बाक़ी दुनिया से साझा कर सकते हैं. इससे कंपनी को नुक़सान हो सकता है.
पिछले ही साल ब्रिटिश कंपनी गेम रिटेल ने अपने एक कर्मचारी को ऊटपटांग के ट्वीट करने पर नौकरी से निकाल दिया था. क्योंकि उससे कंपनी को अपना नाम ख़राब होने का डर था.
आज की तारी़ख़ में सोशल मीडिया का आपका प्रोफ़ाइल आपकी नौकरी के लिए बहुत अहम है. बहुत सी कंपनियां, नौकरी देने से पहले आपके सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल को, आपकी फ़ेसबुक पोस्ट, आपके ट्वीट और आपके इंस्टाग्राम फोटो देखती हैं. इससे आपके किरदार के बारे में राय बनाती हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर आपकी हर हरकत आज दुनिया की नज़र में है.
बहुत से लोग ऐसे हैं जो इन बातों का ख़याल किए बग़ैर खुलकर अपनी बात सोशल मीडिया पर कहते हैं. वो ये नहीं जानते कि उनकी बातें, उनके पोस्ट, उन्हीं के लिए नुक़सानदेह साबित हो सकते हैं.
बहुत से लोग होते हैं जो ऑनलाइन सेल्फ़ प्रमोशन में जुटे रहते हैं. ख़ुद ही अपनी तारीफ़ करते हैं. ये लोग हमेशा क़ाबिल हों, ये ज़रूरी नहीं. कई बार इससे कुछ लोगों के बारे में हम अच्छी राय कायम कर लेते हैं. जो हक़ीक़त से परे होती है.
अपने तमाम ख़तरों के बावजूद सोशल मीडिया ने हमें दिया ज़्यादा है और लिया कम है. इस बात के कोई सबूत नहीं कि सोशल मीडिया पर हमारी पोस्ट की वजह से हमारे रिश्तों पर असर पड़ता है.
मतलब साफ़ है. आपको हमेशा संभलकर, दूसरों की भावनाओं का ख़याल करके, अपनी कंपनी के हितों को ध्यान में रखकर अपनी बात सोशल मीडिया पर कहनी चाहिए.
वरना, सावधानी हटी और दुर्घटना घटी.
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