युद्ध में बमबारी कितनी कारगर होती है, क्या है बमों का इतिहास

बम शब्द सुनते ही तबाही का मंजर सामने आ जाता है. लेकिन ये कोई नई ईजाद नहीं है. दुनिया में बम 11वीं सदी से ही मौजूद हैं.

लेकिन 1911 में लीबिया पर बम गिराने से पहले तक बड़े पैमाने पर इससे हमले का रिकार्ड नहीं था.

पहले विश्व युद्ध के दौरान में कुछ हवाई हमले हुए थे लेकिन उस समय तक हवाई उड़ानें इतनी विकसित नहीं हुई थीं कि युद्ध के दौरान बड़े पैमाने पर ऐसे हमले हो सकें.

लेकिन 1937 में तस्वीर बदल गई. उस साल स्पेन के ग्योरनिका पर जर्मनी और इटली के विमानों ने आसमान से बम गिराए.

इन बमों से जो तबाही मची उसने पूरी दुनिया को भारी गुस्से से भर दिया. मशहूर पेंटर पाब्लो पिकासो ने एक प्रसिद्ध पेंटिंग बम हमलों की खौफनाक यादों को ताजा कर दिया है. दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान तेजी से बम विकसित किए.

जर्मन लेफ्टवेफ (जर्मनी के हवाई सुरक्षा के लिए जिम्मेदार) ने ब्ल्टि्ज के दौरान एससी250 बमों का खूब इस्तेमाल किया, वहीं ब्रिटिश सेना के पसंदीदा बम थे ब्लॉकबस्टर.

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटेन के खिलाफ जर्मनी के बमबारी अभियान का नाम ब्लिट्ज था.

युद्ध में बमबारी कितनी कारगर

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान 'बॉम्बरट हैरिस के तौर पर चर्चा में आए ब्रिटिश कमांडर सर आर्थर हैरिस का कहना है, "कई लोग हैं, जो कहते हैं कि बमबारी से आप कभी भी युद्ध नहीं जी सकते. लेकिन यह भी सच है कि इस दावे को अभी तक आजमाया नहीं गया है."

दरअसल बम दुश्मन को नुकसान पहुंचाने का सबसे कारगर हथियारों के तौर पर देखे जाते हैं.

अकेले ब्लिट्ज के दौरान ही 29 हजार टन बम गिराए गए थे. इसमें 43,500 लोग मारे गए थे. वहीं मित्र राष्ट्रों की बमबारी में जर्मनी के 80 हजार लोगों की जान गई.

ब्लिट्ज हमले में बच गईं जॉयस फे से 1989 में एक इंटरव्यू लिया गया था.

उन्होंने कहा, "यह बेहद डरावना था. मुझे वर्षों तक रातों को डरावने सपने आते रहे. ऐसा लगता था कोई काली, घनी मुलायम चीज से मेरा दम घुटा जा रहा है."

धरती को बदसूरत बना देते हैं बम

बम किसी जगह की सूरत भी बदल देते हैं या कह सकते हैं उसे बदसूरत कर देते हैं.

बमबारी में ब्रिटेन का शहर कॉवेंटरी चूर-चूर हो गया था और जर्मनी का शहर ड्रेसडेन तो लगभग पूरी तरह जमींदोज ही हो गया था. तीन साल में इस शहर में 4000 टन बम गिरा दिए गए थे. इस हमले में 25 हजार लोग मारे गए थे. इनमें से अधिकतर महिलाएं और बच्चे थे.

ड्रेसडेन हमले में बच गए माशा डेविस कहते हैं, "साल 1985 में एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था... ऐसा लगता था कि मैं नर्क में हूं."

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ही अमेरिका, सोवियत रूस और जर्मनी के बीच परमाणु बम बनाने की होड़ पैदा हुई.

बम बनाना वैज्ञानिक प्रतिभा का चरम था लेकिन इसके पीछे भारी विनाश भी छिपा था. परमाणु बम भारी तबाही मचा सकता हैं.

जब अमेरिका ने 1945 में जापानी शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु बम गिराया तो 1,20,000 लोग मारे गए थे. हजारों लोग रेडिएशन से मर गए.

इन शहरों पर बम गिराने वाले विमानों के चालक दल में शामिल थियोडोर वान किर्क ने बताया, "बम गिराने से पहले कोई भी यह अंदाजा नहीं लगा पाया था कि यह कैसी तबाही मचाएगा."

इस हमले में बच गए थॉमस ताकाशी तेनेमोरी कहते हैं, "आकाश में एक जोरदार चमक फैली और तबाही मच गई. बमबारी के बाद के शुरुआती दिनों में लोगों को ऐसा लगता था कि वे मर जाएंगे."

क्या इन भयावह बमों की वजह से दूसरा विश्वयुद्ध खत्म हुआ. इस पर विवाद है. लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि परमाणु युद्ध के मंजर ने दुनिया को वर्षों तक खौफ़जदा किए रखा.

परमाणु हथियार रखने वाले देश भी असुरक्षित

परमाणु युद्ध की तबाही को देखते हुए परमाणु हथियारों के खिलाफ़ अभियान चले.

कैंपेन फॉर न्यूक्लियर डिसआर्मामेंट की चेयरपर्सन जॉन रुडोक ने 1982 में कहा था, "सचाई तो यह है कि ब्रिटेन जैसी घनी आबादी वाले देश में परमाणु हथियारों के होने से हम भी उतने ही जोखिम में जी रहे हैं, जितने दूसरे देश."

हालांकि 1945 के बाद से परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं हुआ है लेकिन दुनिया भर में अब भी ये विकसित किए जा रहे हैं. आज के वक्त के कुछ न्यूक्लियर वॉरहेड्स तो हिरोशिमा में गिराए गम बम की तुलना में 300 गुना तक ताकतवर हैं.

दक्षिण पूर्वी एशियाई देश लाओस इस वक्त सबसे ज्यादा बमों से लैस देश माना जा रहा है. अपनी आबादी की तुलना में इस देश ने बहुत अधिक बम रखा है.

वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिका ने लाओस के आसमान के ऊपर से 5,80,000 बमबारी मिशनों के लिए उड़ान भरी थी.

इस दौरान 20 लाख बम गिराए गए थे. यानी आबादी के हिसाब से हर शख्स के ऊपर औसतन आधा टन बम गिराया था.

देसी बम भी कम नहीं

देसी बम भी बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकते हैं. घरों में तैयार होने वाले इन बमों ने 1999 में सोहो और लंदन के दूसरे हिस्सों में भारी तबाही मचाई थी. इन बमों के हमले में तीन लोग मारे गए थे.

इसके साथ ही आज के दौर में सुसाइड बॉम्बिंग का भी खौफ मौजूद है.

आज के युद्ध में हमलावर के लिए ड्रोन हमले कम खतरनाक माने जाते हैं. लेकिन जिन पर हमला होता उन पर यह बेहद खतरनाक साबित होता है.

ड्रोन का जल्दी पता नहीं चलता है. ये अचानक हमले करते हैं. इस साल चर्चित कलाकार एई विवि ने इंपीरियल वॉर मेमोरियल में एक प्रदर्शनी आयोजित की थी.

इसका नाम था- हिस्ट्री ऑफ बॉम्बस यानी बमों का इतिहास. प्रदर्शनी का मकसद था बमों बारे में लोगों के अनुभवों को बारे में बताना.

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