इसराइल ने यहूदियों को मारने वाले आइशमन को कैसे पकड़ा था

लेफ़्टिनेंट कर्नल एडोल्फ़ आइशमन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, लेफ़्टिनेंट कर्नल एडोल्फ़ आइशमन
    • Author, रेहान फ़ज़ल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

शायद हिटलर के अलावा यूरोप के यहूदियों को मारने का जितना जुनून लेफ़्टिनेंट कर्नल एडोल्फ़ आइशमन में था, उतना किसी में भी नहीं.

दूसरे महायुद्ध के समाप्त होने के कई साल बाद अर्जेंटीना में छिपे रहने के दौरान आइशमन ने एक डच व्यक्ति विलेम सैसेन को दिए गए इंटरव्यू में कहा था, "आपको सच बताऊं, अगर हमने यूरोप में रह रहे सभी एक करोड़ तीस लाख यहूदियों को ख़त्म कर दिया होता तो मैंने अपना काम पूरा किया होता."

"चूँकि ये हुआ नहीं, इसलिए मैं अपनी भावी पीढ़ियों की परेशानियों के लिए अपने आप को ज़िम्मेदार ठहराता हूँ. हम चूँकि संख्या में कम थे इसलिए इस काम को अंजाम नहीं दे पाए. लेकिन हम जितना कर सकते थे, हमने किया."

दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति पर आइशमन किसी तरह अर्जेंटीना भागने में सफल रहे.

वर्ष 1957 में इसराइल की ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद को अपने जर्मन सूत्रों से ख़बर लगी कि आइशमन पिछले कई वर्षों से अर्जेंटीना में नाम बदल कर रह रहे हैं.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

सारे सबूतों की पुष्टि के बाद मोसाद के निदेशक इसेर हैरल ने प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियों के निवास स्थान पर जाकर उन्हें बताया कि हमने आइशमन को अर्जेंटीना में खोज लिया है.

गुरियों का जवाब था, "हमें वो ज़िंदा या मुर्दा चाहिए." फिर उन्होंने एक क्षण सोचने के बाद कहा, "बेहतर ये होगा कि तुम उसे ज़िंदा ही पकड़ो. हमारे युवाओं के लिए ये बहुत ज़रूरी है."

रफ़ी ऐतान को इस मिशन का कमांडर बनाया गया.

मोसाद के निदेशक इसेर हैरल

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मोसाद के निदेशक इसेर हैरल

मोसाद के जासूसों की टीम अर्जेंटीना पहुंची

अप्रैल 1960 के अंत तक मोसाद के चार जासूसों की एडवांस टीम ने अलग-अलग दिशाओं से अर्जेंटीना में प्रवेश किया.

उन्होंने ब्यूनस आयर्स में एक घर किराए पर लिया जिसे कोडनेम 'कासिल' दिया गया. इस बीच इसेर को पता चला कि 20 मई को अर्जेंटीना अपनी आज़ादी की 150वीं वर्षगाँठ मनाएगा.

तय हुआ कि इसराइल भी शिक्षा मंत्री अब्बा इबान के नेतृत्व में अपना एक प्रतिनिधिमंडल अर्जेंटीना भेजेगा. इसको ले जाने के लिए इसरायली एयरलाइंस एलाई ने एक ख़ास विमान 'विस्परिंग जायंट' उपलब्ध कराया.

वीडियो कैप्शन, यहूदियों को मरवाने वाले आइकमेन को पकड़ने की कहानी. Vivechna

इबान को इसकी हवा भी नहीं लगने दी गई कि इस दरियादिली का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन आइशमन है. तय हुआ कि 11 मई को एलाई की फ़्लाइट नंबर 601 अर्जेंटीना के लिए उड़ान भरेगी.

विमान के चालक दल को बहुत सावधानी पूर्वक चुना गया. पायलट ज़्वी तोहार से कहा गया कि वो अपने साथ एक मेकेनिक भी ले जाएं ताकि अगर उन्हें अर्जेंटीना के लैंड क्रू की मदद के बगैर अचानक उड़ान भरनी पड़े तो उनके सामने कोई मुश्किल न आए.

लेफ़्टिनेंट कर्नल एडोल्फ़ आइशमन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, एडोल्फ़ आइशमन अपनी जवानी के दिनों में

आइशमन को पकड़ने के मिशन को एक दिन के लिए आगे बढ़ाया गया

योजना बनी कि 10 मई को आइशमन को उनके घर के पास से उठा लिया जाएगा.

11 मई को इसराइली विमान वहाँ पहुंचेगा और 12 मई को वो लोग वापस इसराइल के लिए चल देंगे.

लेकिन आख़िरी समय पर ये योजना खटाई में पड़ गई.

हुआ ये कि अर्जेंटीना के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मेहमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अर्जेंटीना के विदेश मंत्रालय के प्रॉटोकोल विभाग ने इसराइली प्रतिनिधिमंडल को सूचित किया कि उन्हें अपना आना 19 मई तक टालना होगा.

इसराइल

इमेज स्रोत, Michael Bar-Zohar and Nissim Mishal

इमेज कैप्शन, माइकल बार ज़ोहार और निसिम मिशाल की किताब 'द ग्रेटेस्ट मिशन ऑफ़ द इसराइली सीक्रेट सर्विस मोसाद'

मोसाद के कारनामों पर अपनी किताब 'द ग्रेटेस्ट मिशन ऑफ़ द इसराइली सीक्रेट सर्विस मोसाद' में माइकल बार ज़ोहार और निसिम मिशाल लिखते हैं, "इसेर हैरल के लिए इसका मतलब था कि या तो आइशमन के अपहरण को 19 मई तक टाला जाए और या फिर पहले से तय योजना के अनुसार उसको 10 मई को ही उठा लिया जाए और उन्हें नौ या दस दिनों तक कहीं छिपा कर रखा जाए."

"ये बहुत बड़ा जोखिम था और इस बात का डर था कि कहीं आइशमन के परिवार की माँग पर उनकी तलाश न शुरू कर दी जाए. लेकिन इसके बावजूद इसेर ने पहले से तय योजना के अनुसार ही बढ़ना तय किया. अभियान को सिर्फ़ एक दिन के लिए आगे बढ़ाया गया. तय हुआ कि आइशमन को 11 मई को शाम सात बजकर 40 मिनट पर उसके घर के पास से उठा लिया जाएगा."

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

बस नंबर 203 से आइशमन नहीं उतरे

आइशमन हर शाम 7 बज कर 40 मिनट पर बस नंबर 203 से घर लौटते थे और थोड़ी दूर पैदल चल कर अपने घर पहुंचते थे. योजना बनी कि इस ऑपरेशन में दो कारें भाग लेंगी. एक कार में आइशमन को उठाने वाले एजेंट मौजूद रहेंगे.

दूसरी कार उनकी सुरक्षा के लिए होगी. 11 मई की शाम 7 बज कर 35 मिनट पर दो कारें बस स्टॉप के आसपास पार्क कर दी गईं. पहली कार काले रंग की शेवरले थी. दो एजेंट बाहर निकल कर ये दिखाने लगे जैसे उनकी कार ख़राब हो गई हो.

ज़्वी अहारोनी ड्राइविंग सीट पर बैठे थे और चौथा एजेंट कार के अंदर ही सिकुड़ कर उस जगह पर नज़र रखे हुए था जहाँ से आइशमन को चलते हुए आना था. दूसरी काले रंग की ब्यूक कार को थोड़ी दूर पर सड़क के दूसरे छोर पर खड़ा किया गया था.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

दो एजेंट कार के बाहर खड़े थे. तीसरा व्यक्ति ड्राइवर सीट पर था. उसका काम था जैसे ही आइशमन आते दिखाई दें, वो कार की हेडलाइट जला कर उसकी आँखों को चौंधिया दे.

माइकल बार ज़ोहार और निसिम मिशाल लिखते हैं, "सात बज कर 40 मिनट पर बस नंबर 203 रुकी तो लेकिन उसमें से आइशमन नहीं निकले. 7 बज कर 50 मिनट तक एक के बाद एक दो बसें और आईं लेकिन आइशमन का कहीं पता नहीं था."

"एजेंटों की परेशानी बढ़ती ही जा रही थी. क्या आइशमन ने अचानक अपनी आदतें बदल ली थीं? या उनको इस योजना की भनक लग गई थी? इसेर ने टीम को पहले ही ब्रीफ़ कर दिया था कि अगर आइशमन 8 बजे तक नहीं पहुंचता है तो मिशन को वहीं छोड़ दिया जाए और वो लोग वापस आ जाएं. लेकिन रफ़ी ऐतान ने तय किया कि वो साढ़े आठ बजे तक इंतज़ार करेंगे."

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

आइशमन को ज़बरदस्ती कार में बैठाया गया

आठ बज कर पाँच मिनट पर एक और बस आ कर रुकी. पहले तो उन्हें बस से कोई भी उतरता नहीं दिखाई दिया. लेकिन दूसरी कार पर बैठे अवरूम शालोम को एक परछाई सी आती दिखाई दी.

उन्होंने तुरंत अपनी कार की हेडलाइट ऑन कर आते हुए व्यक्ति को लगभग अंधा कर दिया. तभी शेवरले कार पर सवार एक एजेंट ज़्वी मालकिन ने चिल्ला कर स्पैनिश में कहा 'मोमेंतितो सेन्योर' (एक मिनट महाशय). आइशमन ने अपनी जेब में हाथ डालकर फ़्लैशलाइट खोजने की कोशिश की.

मोसाद पर एक किताब 'राइज़ एंड किल फ़र्स्ट' के लेखक रोनेन बर्गमैन लिखते हैं, "ज़्वी मालकिन को लगा कि आइशमन शायद अपनी पिस्टल निकाल रहा है. इसलिए उसे पीछे से पकड़ने और कार तक लाने के बजाए मालकिन ने उसे एक गड्ढे में धक्का दे दिया और उसके ऊपर चढ़ बैठे. आइशमन चिल्लाया लेकिन वहाँ उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था."

इसराइल

इमेज स्रोत, Ronen Bergman

इमेज कैप्शन, रोनेन बर्गमैन की किताब 'राइज़ एंड किल फ़र्स्ट'

ज़्वी अहारोनी ने आइशमन से जर्मन में कहा, "अगर तुमने हिलने की भी कोशिश की तो तुम्हें गोली से उड़ा दिया जाएगा."

उन लोगों ने आइशमन को उठा कर पिछली सीट के फ़र्श पर लिटा दिया. कार आगे बढ़ी और उसके पीछे दूसरी कार भी चलने लगी.

चलती कार में ही एजेंटों ने आइशमन के हाथ पैर बाँध कर उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

अपेंडिक्स ऑपरेशन के निशान से आइशमन की पहचान हुई

रोनेन बर्गमैन लिखते हैं, "इस बीच ऐतान उन निशानों को खोजने लगे जिससे कोई शक न रहे कि उन्होंने जिस शख़्स को पकड़ा है वो और कोई नहीं बल्कि आइशमन ही हैं. उनकी बाँह के नीचे गुदे एसएस के टैटू को तुरंत पहचान लिया गया."

"अब उनके सामने समस्या थी उसके पेट में अपेन्डिक्स के ऑपरेशन के निशान को खोजने की जिसका कि एसएस की फ़ाइलों में वर्णन किया गया था. ये देखने के लिए ऐतान ने आइशमन की बेल्ट खोली और उसकी पैंट में अपना हाथ घुसा दिया."

"जैसे ही उन्हें वो निशान दिखाई दिया वो हेब्रू में चिल्लाए 'ज़ेह हू ज़ेह हू' जिसका मतलब था- ये वही है, ये वही है..."

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

आइशमन ने अपना सही नाम उगला

आठ बज कर 55 मिनट पर दो कारें मोसाद के जासूसों के ठिकाने के ड्राइव वे पर रुकीं. आइशमन को घर के अंदर लाया गया. जब एजेंटों ने उसके कपड़े उतारने शुरू किए तो उसने कोई विरोध नहीं किया. उन्होंने जर्मन में आइशमन से अपना मुँह खोलने के लिए कहा.

आइशमन ने वैसा ही किया. वो देखना चाहते थे कि कहीं आइशमन ने अपने मुँह में ज़हरीसा कैप्सूल तो नहीं छिपा रखा है. तभी जर्मन में एक आवाज़ गूँजी, "तुम्हारे जूते और टोपी की साइज़? जन्मतिथि? पिता का नाम, माँ का नाम?"

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

आइशमन ने रोबोट की तरह सभी सवालों के जवाब दिए. फिर उन्होंने पूछा तुम्हारे नात्ज़ी पार्टी के कार्ड का क्या नंबर है? और एसएस का नंबर भी बताओ. आइशमन ने जवाब दिया 45326 और 63752. उनका आख़िरी सवाल था तुम्हारा नाम?

आइशमन का जवाब था रिकार्डो क्लेमेंट. मोसाद के एजेंट ने फिर पूछा तुम्हारा नाम? आइशमन ने काँपते हुए जवाब दिया, ओटो हेंनिंगर. एजेंट ने तीसरी बार फिर पूछा तुम्हारा नाम? इस बार उनका जवाब था एडोल्फ़ आइशमन.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

इसराइली विमान ब्यूनसआयर्स पहुंचा

इसराइली आइशमन को रेज़र नहीं दे सकते थे. इसलिए उन्होंने खुद उसकी हज़ामत बनाई. वो उनको एक सेकेंड के लिए भी अकेला नहीं छोड़ सकते थे. जब वो टॉयलेट भी जाते थे तो मोसाद का एक एजेंट उनके साथ होता था.

टीम की एक सदस्य येहूदिथ निसीयाहू ने आइशमन के लिए खाना बनाया लेकिन उसके जूठे बर्तनों को धोने से इनकार कर दिया. अगले दस दिन इसराइली जासूसों की ज़िंदगी के सबसे लंबे दस दिन थे. वो विदेश में अपने कैदी के साथ छिपे हुए थे.

ज़्वी मालकिन

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, मोसाद एजेंट ज़्वी मालकिन जिन्होंने एडोल्फ़ आइशमन को पकड़ा था

उनकी एक ग़लती से पुलिस का छापा पड़ सकता था और एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय बखेड़ा खड़ा हो सकता था. 18 मई, 1960 को दिन के 11 बजे तेल अवीव के लोद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक इसराइली विमान ने उड़ान भरी.

अगले दिन यानी 19 मई को दोपहर बाद विमान ने ब्यूनसआयर्स हवाई अड्डे पर लैंड किया. दो घंटे बाद इसेर ने पायलट ज़्वी तोहार से बात कर 20 मई की आधी रात को विमान के टेक ऑफ़ करने का समय तय किया.

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

आइशमन को इंजेक्शन लगा कर विमान पर चढ़ाया गया

20 मई की रात 9 बजे आइशमन को नहला धुला कर इसराइली एयरलाइंस एलाई की वर्दी पहनाई गई. उनकी जेब में ज़ीव ज़िकरोनी के नाम से एक झूठा परिचय पत्र रखा गया.

माइकल बार ज़ोहार और निसिम मिशाल लिखते हैं, "डॉक्टर ने आइशमन को ऐसा इंजेक्शन लगाया जिससे उसे नींद तो नहीं आई लेकिन उसे धुँधला दिखाई देने लगा. वो सुन, देख और यहाँ तक कि चल सकता था लेकिन बातचीत नहीं कर सकता था."

"आइशमन को कार की पिछली सीट पर बिठाया गया. उसी समय ब्यूनसआयर्स के एक मशहूर होटल से दो और कारें रवाना हुईं जिसमें इसराइली एयरलाइंस के असली विमानकर्मी बैठे हुए थे. रात 11 बजे सभी कारों ने एक साथ हवाई अड्डे में प्रवेश किया."

"जैसे ही कार बैरियर पर पहुंची विमान दल के एक सदस्य ने चिल्ला कर कहा 'हाए एलाई.' गार्ड्स उसे पहचानते थे. उन्होंने कार के अंदर झाँक कर देखा. सभी इसराइली एयरलाइंस की यूनिफ़ॉर्म पहने हुए थे."

"ये जताने के लिए कि सब कुछ सामान्य है कुछ विमानकर्मी गाना गा रहे थे तो कुछ ठहाके लगा रहे थे या ज़ोर-ज़ोर से बाते कर रहे थे. गार्डस ने बैरियर उठा दिया और तीनों कारें इसराइली विमान के पास जा कर रुकीं."

आइशमन को कई विमानकर्मियों ने घेर रखा था. दो लोगों ने उसे पकड़ा और उसके हाथ अपने कंधे में लटकाते हुए विमान के ऊपर ले आए. आइकमेन को फ़र्स्ट क्लास की विंडो सीट पर बैठाया गया. 11 बज कर 15 मिनट पर इसराइली विमान ने तेल अवीव के लिए टेक ऑफ़ किया.

प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियों

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियों ने आइकमेन को इसराइल ज़िंदा लाने के मिशन को मंज़ूरी दी थी

डेविड बेन गुरियों का क्नेसेट में ऐलान

22 मई, 1960 की सुबह विमान ने तेल अवीव के लोद हवाई अड्डे पर लैंड किया. नौ बज कर 50 मिनट पर मोसाद के निदेशक इसेर हैरल यरूशलम में प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियों के दफ़्तर पहुंचे. उनके सचिव इतज़ाक निवोन उन्हें सीधे प्रधानमंत्री के कमरे में ले गए.

आश्चर्यचकित बेन गुरियों ने उनसे पूछा 'तुम कब पहुंचे?' इसेर ने जवाब दिया, '2 घंटे पहले. आइशमन हमारी गिरफ़्त में है.' गुरियों ने पूछा कहाँ है वो? इसेर का जवाब था, 'यहाँ इसराइल में ही. अगर आप इजाज़त दें तो उसे तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया जाए.'

चार बजे शाम इसराइली संसद नेसेट में डेविड बेन गुरियों ने खड़े हो कर एक संक्षिप्त वक्तव्य दिया, "मुझे नेसेट को बताना है कि इसराइल के सुरक्षा बलों ने सबसे बड़े नाज़ी अपराधियों में से एक साठ लाख यूरोपीय यहूदियों की मौत के जिम्मेदार एडोल्फ़ आइशमन को पकड़ लिया है. वो इस समय इसराइल में एक जेल में हैं. जल्दी ही उन पर इसराइली क़ानून के अनुसार मुक़दमा चलाया जाएगा."

लेफ़्टिनेंट कर्नल अडोल्फ़ आइकमेन

इमेज स्रोत, Getty Images

जैसे ही डेविड बेन गुरियों ने ये शब्द कहे इसराइली संसद ताली की गड़गड़ाहट से गूँज उठी. 15 दिसंबर 1961 को आइशमन को फाँसी की सज़ा सुनाई गई और 31 मई , 1962 को उसे फाँसी पर चढ़ा दिया गया.

आइशमन के आखिरी शब्द थे, "हम दोबारा मिलेंगे. मैं ईश्वर में विश्वास करते हुए जिया. मैंने युद्ध के क़ानूनों का पालन किया और अपने झंडे के प्रति हमेशा वफ़ादार रहा."

इसराइल के इतिहास में ये पहली और आखिरी फाँसी थी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)