'परफ़ेक्ट बॉडी ने मुझे लोगों का चहेता बनाया, पर साथ ही तनाव भी दिया’

    • Author, विनिसियस लेमोस
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, ब्राज़ील

इसाबेला रूसो अपने शरीर को 'विशालकाय' बताती हैं. वो कहती हैं उनके कंधे काफी चौड़े हैं और हाथ-पैर काफी लंबे, लेकिन यह ठीक है.

लेकिन अब से लगभग कुछ दो सालों पहले तक यही वो बातें थीं जिनसे इसाबेला को चिढ़ थी और वो इसे बदलना भी चाहती थीं. वो चाहती थीं कि उनकी शारीरिक बनावट 'परफ़ेक्ट' हो.

साल 2015 में उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने खान-पान की अलग-अलग आदतों, डाइट और रोज़ाना की शारीरिक कसरत-व्यायाम के बारे में पोस्ट्स डालना शुरू किया.

बहुत जल्दी ही 28 साल की इस ब्राज़ीलियन लड़की ने लोगों को प्रभावित करना शुरू कर दिया. दसियों हज़ार लोग उनसे जुड़ गए जो उन्हें सुनना चाहते थे.

रूसो ने बीबीसी से कहा, "मुझे स्वीकार्यता का अनुभव हुआ."

लेकिन जो वो दिखती थीं, उससे इतर वो एक दुखी युवती थीं.

"मैं लगातार वज़न कम करने के दबाव से जूझती रहती थी और इससे हटकर खूबसूरती को मैं देख ही नहीं पा रही थी."

इस चिंता ने उन पर असर भी डाला और बाद में पता चला कि वो इसी कारण बीमार भी हो गई थीं. वो कहती हैं, "जो मैं कर रही थी वो कहीं से भी स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए किये जा रहे प्रयासों में से नहीं था यह सिर्फ़ वज़न कम करने और पतला दिखने को लेकर था."

खाने को लेकर लगाईं पाबंदियां

रूसो अपने बारे में बात करते हुए कहती हैं कि उनके अंदर अपने कूल्हों और पैरों की बनावट को लेकर भारी असुरक्षा का भाव था.

जब वो 18 साल की हुईं तो अमरीका चली गईं लेकिन यहां पहुंचने के बाद उनके हालात और ख़राब हो गए. उन्होंने जिम ज्वाइन किया और यह एक ऐसी जगह थी जहां लोग सारा वक़्त डाइटिंग के बारे में बात करते रहते थे.

उन्होंने अपने लिए खाने को लेकर पाबंदियां तय कीं. वो कहती हैं, "कभी-कभी ऐसा होता था कि मैं खाने पर नियंत्रण नहीं रखती थी और वज़न बढ़ जाता था. लेकिन इसके बाद मैं तनाव में आ जाती थी और अपने लिए बेहद सख़्त डाइट प्लान तैयार करती थी."

खाने के साथ इतने संघर्ष के बावजूद साल 2015 में उन्होंने वो शारीरिक बनावट प्राप्त कर ली जिसकी उन्हें कामना थी और फिर उन्होंने लोगों के साथ अपनी डाइट शेयर करनी शुरू की. उन्होंने इंस्टाग्राम पर लोगों को टिप्स देने शुरू किये. धीरे-धीरे उनके फॉलोवर्स बढ़ते गए.

वो कहती हैं, "मुझे ऐसे लोगों का होना पसंद था जो मुझे प्रेरणा मानते थे. मुझे लगता था कि इस परफ़ेक्ट बॉडी को पाने के लिए मैंने जितनी भी मुश्किलों का सामना किया है यह उसका फल है.'

"अब मुझे एहसास होता है कि यह कितना ज़िम्मेदारी भरा काम है कि जब लोग आपको प्रेरणा मानने लगें. बहुत से लोग प्रेरक बनना चाहते हैं लेकिन वो छरहरी काया पाने के पीछे पूरे संघर्ष और कहानी को सामने नहीं रखते. ना ही वो ये बताते हैं कि परफ़ेक्ट बॉडी पाने के दौरान कई तरह के मनोवैज्ञानिक दबाव से भी गुज़रना होता है."

फ़ॉलोअर्स को खोने का डर

रूसो को भी ये महसूस हुआ कि वो लोगों को खुलकर अपने लाइफ़स्टाइल के बारे में नहीं बता सकतीं.

वो स्वीकार करती हैं, "बहुत बार मैं अपनी परेशानियों के बारे में बात करना चाहती हूं और खाने-पीने को लेकर सख़्त नियम जो मैं मानती हूं उसे छोड़ना भी चाहती हूं लेकिन मुझे डर होता है कि कहीं ऐसा करके मैं अपने फ़ॉलोअर्स ना खो दूं."

उनका तनाव और मजबूरी में खाने की आदत धीरे-धीरे ही सही बदतर हो गई थी.

रूसो बताती हैं कि दो साल से ज़्यादा समय हो गया था लेकिन पीरियड नहीं हुए लेकिन उन्होंने ये बात डॉक्टर तक को नहीं बतायी.

साल 2019 में उनका एक्सीडेंट हो गया. एक कार ने उनके स्कूटर को टक्कर मार दी. ये वो वक़्त था जब उन्हें अपने शरीर को समझने का मौक़ा मिला.

इस दुर्घटना में उनके घुटने के तीन लिगामेंट्स में चोट लगी थी और ये पहला मौक़ा था जब उन्होंने अपने शरीर को सौ फ़ीसदी समझा.

उन्हें बिना किसी सहारे के चलने में महीनों लग गए लेकिन यह पहला मौक़ा था जब वो व्यायाम नहीं कर रही थीं और बावजूद इसके खुद को फ़िट महसूस कर रही थीं. वो इस दौरान कोई सख़्त डाइट प्लान भी फ़ॉलो नहीं कर रही थीं.

वो कहती हैं, "मुझे हमेशा से इस बात का अंदाज़ा था कि मैं स्वस्थ हूं लेकिन मैंने ये कभी देखा नहीं था. मेरे पास जो था मैं उससे कुछ अलग पाना चाहती थी. लेकिन अब जो मुझे दिख रहा था वो मेरे लिए ख़ुद को ख़ुद के बारे में जगाने वाला था.'

नुक़सानदेह डाइट

पिछले साल मई महीने में रूसो की एक सर्जरी हुई जो कि उनके पूरी तरह से रिकवर करने के लिए थी. यह सब कुछ होने के बाद डॉक्टर ने उन्हें बताया कि उनकी हड्डियों की डेनसिटी उनकी उम्र के लिहाज़ से काफी कम है.

"उन्होंने मुझे कहा कि मुझे अपनी हड्डियों को मज़बूत बनाना चाहिए. मेरी डाइट बहुत सख़्त थी और उसके साथ ही मैं भरपूर व्यायाम भी कर रही थी और इसी ने मेरे शरीर को नुक़सान पहुंचाया था."

वो अब पहले की तरह एक्सरसाइज़ नहीं कर सकतीं लेकिन वो हल्की-फुल्की फ़िजिकल एक्टिविटी करके खुश हैं.

वो कहती हैं, "अब मैंने सिर्फ़ यह ध्यान देना शुरू किया है कि मैं और मेरा शरीर बेहतर महसूस करें और कुछ भी अति में किये बिना. अब मैं वो खाती हूं जो मेरा मन करता है और उस समय खाना बंद कर देती हूं जब लगता है कि पेट भर चुका है. मैं हेल्दी खाना पसंद करती हूं लेकिन मीठा खाने का काफी मन होता है. अब मैं ख़ुद को रोकती नहीं हूं क्योंकि खाने के साथ एक अच्छा रिश्ता होना ज़रूरी है."

'मैं लोगों की मदद करना चाहती हूं'

पुरानी पोस्ट्स के ठीक विपरीत अब उनके इंस्टाग्राम पर ऐसी पोस्ट्स हैं जो लोगों को संदेश देती हैं कि वो जैसे हैं ख़ुद को स्वीकार करें. परफ़ेक्शन के पीछे ना भागें.

जब रूसो ने इस तरह की पोस्ट्स डालना शुरू किया तो शुरुआती दौर में उनके फ़ॉलोअर्स कुछ घटे ज़रूर लेकिन आज भी उनके 78 हज़ार फ़ॉलोअर्स हैं.

रूसो मानती हैं कि वो अब अपने को और अपने शरीर को कहीं बेहतर ढंग से समझती हैं. वो अब भी अपने शरीर का पूरा ध्यान रखती हैं लेकिन अब अंतर सिर्फ़ इतना है कि वो अपने लुक्स को लेकर जुनूनी नहीं हैं.

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