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शराब, ड्रग्स, सेक्स और जेल में मेरी वो आख़िरी रात!
जेल में रहना बेहद बुरा तजुर्बा होता है. कोई भी जेल में क़ैद होकर नहीं रहना चाहता. खाने-पीने से लेकर एक कोठरी में ज़िंदगी गुज़ारने तक की बेबसी, दिलो-दिमाग़ पर गहरा ज़ख़्म छोड़ जाती है.
लेकिन कुछ लोग होते हैं जो ज़िंदगी में ऐसे फेर में पड़ जाते हैं कि वो बार-बार जेल जाते हैं. ख़ास तौर से नशे और दूसरी बुरी आदतों के शिकार लोग.
पिछले कुछ सालों में किसी जुर्म में जेल जाने वाली महिलाओं की तादाद भी काफ़ी बढ़ गई है. इनमें से कई ऐसी महिलाएं हैं, जो एक बार इस दुष्चक्र में फंसीं तो फिर जेल मानो उनका असल घर हो गया.
आख़िर कैसे इन महिलाओं को हौसला दिया जाए कि वो आम ज़िंदगी जी सकती हैं? उन्हें किस तरह से समझाया जाए कि वो एक सामान्य महिला हैं. उन्हें इस बार-बार जेल जाने के जंजाल से आज़ाद कराने के लिए क्या करना होगा?
ब्रिटेन में सरकार की मदद से कई ऐसी संस्थाएं काम कर रही हैं, जो नशे और जेल जाने की आदी हो चुकी महिलाओं को बुरी आदतें छोड़ने में मदद करती हैं.
ऐसी महिलाओं के तजुर्बे बाक़ी लोगों से साझा किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को जेल और नशे के जाल से छुटकारा दिलाया जा सके.
बीस बरस की उम्र में...
लंदन की रहने वाली पैट ऐसी ही एक महिला हैं. 52 बरस की पैट अश्वेत महिला हैं, जो 14 बरस की उम्र में ही घर छोड़कर भाग गई थीं. 19 साल की उम्र तक वो शराब की आदी हो चुकी थीं. इस दौरान उन्होंने जेब काटने से लेकर दुकानों से चोरी करने तक के जुर्म करने सीख लिए थे. बीस बरस की उम्र में वो ड्रग लेने लगी थीं.
इस दौर में ही पैट के जेल जाने का जो सिलसिला शुरू हुआ, तो वो फिर थमा ही नहीं. वो बरसों बरस इस दुष्चक्र में फंसी रहीं. वो जेल में रहतीं. सज़ा पूरी करतीं. बाहर आने पर वो फिर से नशे की लत की शिकार हो जातीं. इसकी ज़रूरत पूरी करने के लिए पैट ने वेश्यावृत्ति से लेकर चोरी तक के काम किए.
इसकी शुरुआत तो पैट ने 19 बरस की उम्र में ही कर दी थी, जब वो घर से भागकर लंदन पहुंची थीं. वहां उन्हें एक दलाल ने अपने जाल में फंसा लिया. फिर उसने पैट को शराबखोरी की आदत लगवा दी और वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया. पैट पैसे कमाकर लातीं और वो शख़्स उनकी कमाई पर ऐश करता.
एक बार जब वो ड्रग लेते हुए पकड़ी गईं, तो उन्हें जेल भेज दिया गया. तब जाकर उन्हें उस दलाल से छुटकारा मिला. लेकिन जेल से बाहर आने पर पैट को फिर से शराब और ड्रग्स की आदत पड़ गई. इस तरह जो सिलसिला बीस बरस की उम्र में शुरू हुआ, वो अगले तीस सालों तक जारी रहा.
इस दौरान पैट ने शादी भी की. उनके बच्चे भी हुए. लेकिन हर बार वो नशे और दूसरी बुरी आदतों की वजह से जेल गईं. घर वालों ने उनसे नाता तोड़ लिया था. परिवार भी नहीं बस सका. तीन साल में ही उनकी शादी टूट गई. पति, बच्चों को लेकर अलग हो गया. वो उन्हें एक नशेड़ी मां के हवाले नहीं करना चाहता था.
ब्रिटिश सरकार
जेल की कोठरी में बंद पैट बस परिवार का ख़याल करके, दीवारों को बिसूरती रहती थीं. एक बार जब वो जेल से निकलीं, तो उन्होंने तय किया कि अब नशे की लत में नहीं पड़ना है. लेकिन बाक़ी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तो पैसे चाहिए थे. सो उन्होंने अपने पुराने ब्वॉयफ्रैंड से संपर्क साधा. उसने पैट को फिर से वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया. वहां उन्हें फिर से ड्रग्स की लत लग गई.
एक रात उन्हें बेचैन देखकर साथ रहने वाली एक लड़की ने एक वैन में जाने को कहा. वो वैन वन25 प्रोजेक्ट की थी. ये ब्रिटिश सरकार की तरफ़ से चलाई जाने वाली योजना है, जिसमें नशे की आदी महिलाओं की मदद की जाती है. इस वैन में आप आराम कर सकते हैं. ख़ुद को रिलैक्स कर सकते हैं. पैट बताती हैं कि उन्होंने उसका बहुत ख़याल रखा. खाने का सामान भी दिया. उनका प्यार देखकर पैट को रोना आ गया. पैट को लगा कि अगर कोई उनका ऐसे ख़याल रखता तो शायद वो जेल और ड्रग्स के जंजाल में नहीं फंसतीं.
वैन से बाहर आने के बाद उनकी दुनिया फिर से वैसी ही हो गई. कोई पूछने वाला नहीं था. एक बार फिर वो जेल पहुंच गईं. लेकिन इस बार पैट ने ठान लिया था कि हर हाल में उन्हें इस ज़िंदगी से छुटकारा पाना है. वो दिन-रात बस इसी ख़याल में जुटी रहतीं कि अबकी बार जेल से बाहर निकलीं तो वापस यहां नहीं आना है. जेल की कोठरी से उन्हें घिन हो गई थी.
आख़िरकार पैट की सज़ा पूरी हुई और उन्हें जेल से रिहा कर दिया गया. आख़िरी दिन उन्होंने अपनी कोठरी को ख़ूब साफ़ किया. वो चाहती थीं कि उनके बाद जो महिला क़ैदी यहां आए उसे बेहतर महसूस हो. गंदगी न रहे. बदबू न आए.
महिलाओं की मदद
जेल से बाहर आने के बाद, पैट को वन25 प्रोजेक्ट के लोग मिले. ऐसा पहली बार हुआ था जब जेल से बाहर निकलने पर कोई उनका इंतज़ार कर रहा था. वो लोग पैट को एक सुधार गृह ले गए. जहां महिलाएं थीं. ये महिलाएं ख़ुद भी कभी नशे की शिकार रह चुकी थीं. लेकिन अब उनकी बुरी लत छूट चुकी थी. अब वो पैट जैसी महिलाओं की मदद के लिए काम कर रही थीं.
उनका प्यार और साथ पाकर पैट को हौसला हुआ कि वो अब अपनी ज़िंदगी को बेहतर बना सकेगी. उसे बार-बार ड्रग और शराब की याद आती, मगर पैट ने इस बार ठान लिया था कि वो वापस उस दुनिया में नहीं जाएगी.
उसे नेल्सन ट्रस्ट जैसी संस्थान की भी मदद मिली. ये भी एक सरकारी संस्था है जो पैट जैसे लोगों को अपने पैर पर खड़े होने में मदद करती है.
आज पैट को जेल से आज़ाद हुए दो साल बीत चुके हैं. अब उसके बच्चे, मां और बहन भी उससे मिलने आते हैं. 34 सालों बाद पैट को लगता है कि उसका भी परिवार है. उसके भी अपने लोग हैं.
लेकिन सबसे ज़्यादा शुक्रगुज़ार वो वन25 प्रोजेक्ट और नेल्सन ट्रस्ट के लोगों की है, जिन्होंने उस पर यक़ीन किया. उसे मदद देकर नई ज़िंदगी शुरू करने का हौसला दिया.
जेल सुधार
पैट जैसी नशे की शिकार महिलाओं को ऐसी हमदर्दी और मदद की ज़रूरत होती है. नशे के शिकार लोग जब एक बार इसके जाल में फंसते हैं तो बस फंसते चले जाते हैं. इसकी वजह यही होती है कि उनके परिवार के लोग और समाज उनसे कट जाते हैं. उनका हाथ नहीं थामते. हौसला नहीं बढ़ाते.
आज ज़रूरत वन25 प्रोजेक्ट और नेल्सन ट्रस्ट जैसी संस्थाओं की है, जो पैट जैसी महिलाओं को नई ज़िंदगी शुरू करने में मदद करें.
ब्रिटेन में आज की तारीख़ में क़रीब 4800 महिलाएं जेल में हैं. ये पिछले कुछ सालों में सबसे ज़्यादा संख्या है. वहां की सरकार इन महिलाओं की मदद के लिए कई प्रोजेक्ट चलाती है. इनमें वन25 और नेल्सन ट्रस्ट के अलावा ओपन गेट, वुमन्स ब्रेकआउट और प्रिज़न रिफॉर्म ट्रस्ट जैसी संस्थाएं शामिल हैं.
सरकार के आंकड़े बताते हैं कि महिलाएं अगर एक बार नशे और छोटे मोटे जुर्म के चलते जेल गईं, तो उनके दोबारा जेल जाने की आशंका 45 से 75 फ़ीसद तक बढ़ जाती है.
वो दोबारा अपराध और जेल के चक्कर में न पड़ें, इसके लिए सरकार के साथ-साथ समाज की हमदर्दी की भी ज़रूरत है. परिजनों को भी उनके बारे में सोचना होगा, तभी ये महिलाएं नशे और जेल के दुष्चक्र से छुटकारा पा सकेंगी.
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