राष्ट्रपति की छवि बनाती-बिगाड़ती फ़िल्में

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    • Author, टॉम ब्रुक
    • पदनाम, बीबीसी कल्चर

फ़िल्में कई बार बड़े और चर्चित लोगों के किरदार को नए नज़रिए से पेश करती हैं. अमरीका में मौजूदा राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल इस साल ख़त्म हो रहा है. तो इस मौक़े पर उन पर बनने वाली फ़िल्मों की चर्चा हो रही है.

बराक ओबामा पर दो फ़िल्में आने वाली हैं. हालांकि दोनों ही फ़िल्में उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की घटनाओं पर आधारित हैं.

अमरीका में राष्ट्रपतियों पर फ़िल्में बनाने का चलन है. अब्राहम लिंकन से लेकर जॉन कैनेडी, रिचर्ड निक्सन और जॉर्ज बुश तक पर फ़िल्में बन चुकी हैं. इन फ़िल्मों में उनके कार्यकाल के दौरान हुई बड़ी घटनाओं को फ़िल्मी तरीक़े से पेश किया जाता है.

लेकिन इन फ़िल्मों को बनाने के लिए शर्त यही होती है कि राष्ट्रपतियों ने बहुत बड़े फ़ैसले लिए हों, या उनके किसी फ़ैसले के दूरगामी नतीजे निकले हों. जैसे कि अब्राहम लिंकन या फिर निक्सन जैसे राष्ट्रपति जिनका कार्यकाल विवादों में घिरा रहा हो.

जॉन कैनेडी जैसे राष्ट्रपतियों की ज़िंदगी पर भी कई फ़िल्में बनी हैं. कैनेडी बेहद लोकप्रिय थे. मगर कार्यकाल के दौरान ही उनका क़त्ल कर दिया गया था.

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राष्ट्रपति बराक ओबामा भाषण देने के उस्ताद हैं. लेकिन, उनके कार्यकाल के आधार पर फ़िल्में बनाना फिलहाल बड़ी चुनौती है. क्योंकि उन्होंने न तो लिंकन की तरह की मुश्किलों का सामना किया. न ही वो रिचर्ड निक्सन की तरह विवादों में रहे. ओबामा की एक ही बात बाक़ी राष्ट्रपतियों से उन्हें अलग करती है. वो है उनकी नस्ल. वो अमरीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति हैं.

जबकि हाल के कुछ दूसरे राष्ट्रपतियों पर ग़ौर करें तो बिल क्लिंटन का सेक्स स्कैंडल, कैनेडी के क़त्ल की कहानी, निक्सन के वाटरगेट कांड का क़िस्सा, फ़िल्मों में तब्दील करने लायक़ दिखता है.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में अमरीकी मामलों के प्रोफ़ेसर इवान मॉर्गन कहते हैं कि ओबामा ने नया क़ानून बनाने के मोर्चे पर कोई इतिहास नहीं रचा. उन्होंने कोई ऐतिहासिक फ़ैसला भी नहीं लिया. ऐसे में सिर्फ़ उनकी सेहत की पॉलिसी यानी ओबामाकेयर पर फ़िल्म बनाना मुश्किल है.

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यही वजह है कि ओबामा पर जो दो फ़िल्में बन रही हैं, वो उनके राष्ट्रपति बनने से पहले की कहानी सुनाती हैं. एक फ़िल्म, ओबामा की मिशेल से मुलाक़ात की दास्तान बयां करती है. इसका नाम है, 'साउथसाइड विद यू'. ये फ़िल्म इसी महीने रिलीज़ होगी. इसमें शिकागो में ओबामा के एक दिन का क़िस्सा है, जिस दिन वो मिशेल से मिले थे. इसमें ओबामा की भूमिका पार्कर सॉयर्स ने निभाई है. पार्कर कहते हैं कि तब शायद ओबामा के ज़ेहन में राजनीति में जाने का बस शुरुआती ख़याल रहा होगा.

ओबामा पर बन रही दूसरी फ़िल्म का नाम है, 'बैरी'. ये फ़िल्म ओबामा के न्यूयॉर्क के कॉलेज में बिताए दिनों पर आधारित है. हालांकि इसके अलावा फ़िल्म के बारे में कोई और जानकारी सामने नहीं आई है.

अब ये दोनों फ़िल्में राष्ट्रपति के तौर पर ओबामा की उपलब्धियों पर कुछ नहीं बतातीं. ऐसे में रिटायर होने के बाद ओबामा की नई इमेज इन फ़िल्मों से तो नहीं बनेगी. फिर इन फ़िल्मों को ज़्यादा दर्शक मिलेंगे, इसकी उम्मीद भी कम ही है.

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अब शायद आगे चलकर जब ओबामा की जीवनी बाज़ार में आएगी, तब कोई बड़े बजट वाली फ़िल्म बने. जिससे ओबामा के बारे में लोग अलग राय क़ायम करें.

जानकार कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन का ख़ात्मा, ओबामा के कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि है. इस पर कैथरीन बिग्लो ने पहले ही 'ज़ीरो डार्क थर्टी' के नाम से फ़िल्म बनाई है. प्रोफ़ेसर इवान मोर्गन मानते हैं कि उस घटना को नए नज़रिए से फ़िल्मों में पेश किए जाने की पूरी उम्मीद है.

वैसे, ओबामा की अभी उम्र कम है. राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद भी वो लंबे वक़्त तक सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहेंगे. इसलिए शायद आगे चलकर वो हॉलीवुड के फ़िल्मकारों को अपनी ज़िंदगी की कोई नई कहानी दे दें, फ़िल्म बनाने के लिए. मगर, लिंकन जैसे राष्ट्रपतियों के मुक़ाबले वो काफ़ी पीछे रहने वाले हैं. लिंकन पर अब तक 40 फ़िल्में बन चुकी हैं. सबसे नई फ़िल्म 2012 में स्टीवन स्पीलबर्ग ने बनाई थी. लेकिन वो बहुत मज़बूत राष्ट्रपति थे. जिन्होंने अमरीका में दास प्रथा ख़त्म की. इसे लेकर उन्होंने गृह युद्ध का भी सामना किया था. ओबामा ने ऐसा कुछ नहीं किया.

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इसी तरह रिचर्ड निक्सन पर उनके वाटरगेट कांड की वजह से कई फ़िल्में बनीं. वहीं जॉन कैनेडी का ग्लैमर और उनकी रहस्यमयी हत्या भी फ़िल्मकारों को लुभाते रहे हैं. निक्सन पर बनी फ़िल्म, 'ऑल द प्रेसिडेंट्स मेन' ने निक्सन को एक भ्रष्ट और षडयंत्रकारी राजनेता के तौर पर पेश किया. निक्सन की वही इमेज आज भी अमरीकी जनता के ज़ेहन में है.

हालाकि ओलिवर स्टोन की 1995 में आई फ़िल्म निक्सन ने उनकी छवि को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश की थी. इसी तरह 2008 की फ्रॉस्ट/निक्सन फ़िल्म ने भी निक्सन के किरदार के प्रति नरमी बरती थी. जिससे लोगों ने मन में निक्सन के प्रति नफ़रत का भाव कुछ कम हुआ.

वहीं जॉन कैनेडी को लोग सिर्फ़ उनके क़त्ल की वजह से याद रखते हैं. क्योंकि कमोबेश हर फ़िल्म में कैनेडी के क़त्ल की ही कहानी बताई गई है.

वैसे कम चर्चा में रहे अमरीकी राष्ट्रपतियों की इमेज न फ़िल्मों से बनी और न बिगड़ी. जैसे कि आइज़नहॉवर, जेराल्ड फोर्ड या जिमी कार्टर. प्रोफ़ेसर मोर्गन कहते हैं कि इन राष्ट्रपतियों में करिश्मे की कमी थी. भले ही इन्होंने बड़े फ़ैसले किए हों. मगर जनता की नज़र में उनकी ज़्यादा अहमियत नहीं बन सकी. ऐसे नेताओं में हॉलीवुड ने भी दिलचस्पी नहीं ली.

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हालांकि राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद जिमी कार्टर का किरदार और भी दिलचस्प हो गया. मगर उन पर अभी ज़बरदस्त फ़िल्में बननी बाक़ी हैं.

अमरीकी राष्ट्रपतियों पर फ़िल्मों के अलावा डॉक्यूमेंटरी भी बनी हैं. इनसे भी नेताओं के बारे में जनता की राय बनी और बिगड़ी हैं. जैसे कि फारेहाइट 9/11. इससे राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को पसंद करने वाले उन्हें और पसंद करने लगे. जबकि उनसे चिढ़ने वाले ये डॉक्यूमेंट्री देखकर और चिढ़ गए.

इन मिसालों से साफ़ है कि अभी ओबामा के पास जनता के बीच अपनी नई इमेज गढ़ने के लिए काफ़ी वक़्त और मौक़े हैं. अगले दस सालों में वो फ़िल्मों के लायक़ कोई दिलचस्प कहानी अपनी ज़िंदगी में गढ़ सकते हैं.

आख़िर वो अभी युवा हैं. राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद भी उन्हें अभी काफ़ी लंबी ज़िंदगी बितानी है.

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