ब्रेक के बाद फिर से कैसे पाएं नौकरी

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- Author, लेनॉक्स मॉरिसन
- पदनाम, बीबीसी कैपिटल
महंगाई बढ़ने के साथ ही ज़रूरतें भी बढ़ गई हैं, लिहाज़ा मर्द और औरत दोनों का कमाना ज़रूरी हो गया है. लेकिन कई बार हम अपने काम से कुछ देर के लिए ब्रेक लेते हैं. अपने परिवार पर ध्यान देने के लिए औरतें तो अक्सर ही ऐसा करती हैं.
तो क्या इस ब्रेक के साथ ही उनकी पेशेवर ज़िंदगी का अंत हो जाता है? और अगर वो फिर से इस ज़िंदगी में लौटना चाहें तो क्या उनकी वापसी की राह आसान होगी?
एक बार ब्रेक लेने के बाद फिर से नौकरी बिल्कुल मिल सकती है. रियूनियन, यानी पुराने साथियों से मेल-मुलाक़ात इसके लिए बेहतरीन ज़रिया है. ज़िंदगी की भागदौड़ और उलझनों में हम अक्सर लोगों से मिलना-जुलना कम कर देते हैं, लेकिन ये सही नहीं है. काम से ब्रेक आपने लिया है, आपके बाक़ी साथी अपने करियर में आगे बढ़ रहे हैं. यही लोग आपको काम दिलाने में आपकी मदद भी करेंगे.
अपने स्कूल-कॉलेज के दोस्तों, यहां तक कि जो लोग आपको पसंद नहीं हैं, उनसे भी एक दोस्ताना रिश्ता तो रखिए ही. साथ ही पुराने ऑफ़िस के साथियों वग़ैरा के साथ मिलते-जुलते रहिए. इससे आपकी याद और आपकी ख़ूबियां उनके ज़हन में ताज़ा रहेंगी. लिहाज़ा रियूनियन एक अच्छा ज़रिया है.

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ईसेड बिज़नेस स्कूल बार्सिलोना के पूर्व करियर एक्सपर्ट इयान मैक्लॉगिन कहते हैं कि पुराने दोस्तों से मिलना बड़े काम का होता है. ख़ास तौर से उनके लिए जो करियर में ब्रेक ले रहे हैं, ऐसे लोगों को पुराने दोस्तों से ज़्यादा से ज़्यादा मेल-जोल रखना चाहिए.
अमरीकी प्रोफ़ेशनल कैरोल फ़िशमेन कोहेन ने इस रियूनियन का बख़ूबी फ़ायदा उठाया. कैरोल ने अपने चार छोटे बच्चों की देखभाल के लिए काम से ब्रेक लिया था. लेकिन उन्होंने लोगों से मिलना नहीं छोड़ा. वो हार्वर्ड बिज़नेज़ स्कूल के रियूनियन में अपने पुराने साथियों से मिलीं. बहुत से लोगों से उनकी मुलाक़ात हुई और इस रियूनियन के एक साल बाद ही उन्हें ग्लोबल इनवेस्टमेंट फर्म में नौकरी मिल गई. आज उन्होंने आई-रिलॉन्च नाम की करियर कंस्लटेंसी कंपनी खोली है. उनकी कंपनी ब्रेक के बाद काम पर लौटने वालों की मदद करती है.
कैरोल कहती हैं रियूनियन के ज़रिए आपको अपने आपको पहचानने का मौक़ा भी मिलता है, जब आप अपने पुराने साथियों से मिलते हैं, बातें करते हैं तो आपको और बहुत से विकल्पों के बारे में पता चलता है. आप अपनी ख़ूबियों और क़ाबिलियत को खुद अपनी नज़र से देख पाते हैं. अगर आप अपना करियर बदलना चाहते हैं तो आपको इसमें मदद भी मिलती है.

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कामयाबी की शर्त है खुद को हर मौक़े और हर लिहाज़ से तैयार रखना. आज सोशल मीडिया का ज़माना है. आप व्यक्तिगत तौर पर किसी से नहीं भी मिलें, तो भी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें. खुद को अपने पेशे से जुड़े लोगों से संपर्क में बनाए रखने के लिए लिंक्ड इन एक बेहतरीन जगह है.
इमेज कंसलटेंट डोरिन डोव कहती हैं सबसे पहले अपनी प्रोफ़ाइल पिक्चर ऐसी लगाइए जैसे अभी आप नज़र आते हैं और जैसा आप अपनी ज़िंदगी में नज़र आना चाहते हैं. दूसरी बात ये कि आपका मक़सद सामने वाले को इम्प्रेस करने का होना चाहिए. क्योंकि आप नौकरी के मौक़े की तलाश में हैं.
अपने बारे में जो भी लिखें छोटा और साफ-साफ लिखें. डोरेन डोव के मुताबिक़ आपके पास अच्छा सा बिज़नेज़ कार्ड होना चाहिए. अपने बिज़नेज़ कार्ड पर अपनी अच्छी तस्वीर भी लगाएं ताकि लोग आपको नाम के साथ आपका चेहरा भी याद रखें.

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आपके कपड़ों का भी आपकी शख्सीयत पर खासा असर पड़ता है. डोव का मानना है लड़कियां अक्सर ऐसे कपड़े पहन कर इंटरव्यू के लिए चली जाती हैं, जिसमें वो अपनी उम्र से ज़्यादा लगती हैं, यही हाल मर्दों का है. वो कुछ ज़्यादा ही ढ़ीले कपड़े पहन कर चले जाते हैं. इससे उनकी शख्सीयत ही ख़त्म हो जाती है. अगर आप अच्छे फिट वाले कपड़े पहनते हैं तो आप ज़्यादा कॉन्फिडेंट लगते हैं. सामने वाले पर भी इसका अच्छा असर पड़ता है.
डोव, मर्दों को ख़ास तौर पर सलाह देती है कि वो जब भी किसी इंटरव्यू के लिए जाएं तो अपने जूतों का ख़ास ख़्याल रखें. वो अच्छी तरह से पॉलिश होने चाहिए. आपके कपड़े आगे और पीछे दोनों तरफ़ से अच्छी फ़िटिंग वाले होने चाहिए. डोव कहती हैं कि तैयार होने के बाद आईने के सामने खड़े होकर अच्चे से ख़ुद का मुआयना ज़रूर कर लें. क्योंकि जब आप लोगों की तरफ़ जा रहे होते हैं तो लोग आप कम देखते हैं. वो घूरकर देखने से बचना चाहते हैं. लेकिन जब आप वापस जा रहे होते हैं, तो लोग आपको सिर से पांव तक देखते हैं.
एक और बात का ख़्याल रखें, अपने ब्रीफ़केस को तमाम ज़रूरी काग़ज़ात और चीज़ों के साथ पहले ही तैयार करके रखें. आख़िरी वक्त की भागदौड़ से बचने के लिए ज़रूरी है, ताकि कोई ज़रूरी काग़ज़ छूट ना जाए.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के एलुमनी रिलेशन डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर गाय कोलैंडर कहते हैं अगर आप सोशल नेटवर्किंग से दूर रहते हैं तो फिर आप यूनिवर्सिटी के रियूनियन में होने वाले पैनल डिस्कशन का फ़ायदा उठाएं. कोलैंडर खुद भी अपने पुराने छात्रों के लिए तीन दिन का ऑक्सफोर्ड एलुमनी वीक एंड आयोजित करते हैं.
2006 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटेशनल बायोकेमेस्ट्री में पीएचडी करने वाली छात्रा शिवा आमिरी का कहना है कि एलुमनी वीकएंड रियूनियन का उन्हें बहुत फ़ायदा हुआ है. यहां उन्हें अपने कारोबार में पैसा लगाने के लिए अच्छे और भरोसेमंद निवेशक मिल गए.

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आमिरी कहती हैं वो यूनिवर्सिटी की रियूनियन में इसलिए भी जाती हैं, क्योंकि वो खुद को जज़्बाती तौर पर उस यूनिवर्सिटी से हमेशा वाबस्ता रखना चाहती हैं. साथ यहां आने से उन्हें ये भी पता चलता रहता है कि क्या नए रिसर्च हो रहे हैं.
रियूनियन अपने तजुर्बों साझा करने का भी एक अच्छा ज़रिया हैं. अमरीकन यूनिवर्सिटी ऑफ पेरिस में फाइन आर्ट के प्रोफेसर मूर्तिकार और फ़नकार जोनाथन शिमोनी कहते हैं कि हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रियूनियन में वो अपने पुराने साथियों से मिले.
इस रियूनियन के कुछ ही समय बाद उन्हें न्यूयॉर्क की एक मशहूर आर्ट गैलरी में अपनी पेंटिंग की नुमाइश लगाने का न्यौता मिल गया.
शिमोनी ने आर्ट के शौक़ीनों के लिए प्रिंट मेकिंग वर्कशॉप शुरू की. दिलचस्प बात ये रही कि इस वर्कशॉप में क़रीब 20 लोग शामिल हुए. जिन लोगों ने इस वर्कशॉप में हिस्सा लिया था, उनमें से बहुत से वकील के पेशे से थे, कुछ व्यापारी थे. अपने अपने पेशे में उन्हों ने तरक्क़ी की बुलंदियों को तो छू लिया था. लेकिन स्कूल में जो कल्चरल चीजें उन्हों ने सीखीं थी, उनसे वो दूर हो गए थे. अलबत्ता ललक बाक़ी थी.
कैरोल कोहेन कहती हैं कभी भी अपनी प्रतिभा को कम मत आंकिए. हमेशा अपना आत्मविश्वास मज़बूत रखिए. आपके पास जो भी जानकारियां हैं उन्हें दूसरों से खुलकर बांटिए. जहां तक औऱ जैसे भी आप अपने दोस्तों और साथियों की मदद कर सकते हैं उनकी मदद कीजिए.
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