पैसे खर्च करवाने का अनोखा तरीका

संगीत

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    • Author, लेनॉक्स मॉरिसन
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

कहते हैं संगीत में रूहानी ताक़त होती है. ये आपको हंसा सकता है, रुला सकता है, ख़ुश कर सकता है, मदहोश कर सकता है.

मगर, क्या ये आपको ज़्यादा पैसे ख़र्च करने के लिए भी उकसा सकता है?

आप इस सवाल का जवाब भले ना में देना चाहें, मगर है ये सच. इस बारे में हुए ताज़ा तजुर्बे तो इसी तरफ़ इशारा करते हैं.

लंदन में लग्ज़री फ़ैशन ब्रांड स्टोर हार्वे निकोल्स के स्टोर को ही लीजिए.

यहां पर ग्राहकों को ज़्यादा पैसे ख़र्च करने के लिए अलग तरह का संगीत सुनाया जाता है.

वो जब स्टोर में घुसते हैं तो उन्हें अलग ही तरह का तजुर्बा होता है.

वो संगीत तलाशने वाले मोबाइल ऐप से, हार्वे निकोल्स के स्टोर में बज रहे संगीत को पहचानने की कोशिश करते हैं.

कुछ लोग सीधे स्टोर के कर्मचारियों से ही पूछ लेते हैं कि कौन सा संगीत बज रहा है.

ग्राहकों को अपने माल के बजाय संगीत से लुभाने का ये ख़्याल, स्टोर के मैनेजमेंट को क़रीब 18 महीने पहले आया था.

इसके लिए उसने म्यूज़िक कंसियर्ज नाम की संगीत सलाहकार कंपनी की मदद ली थी.

ये कंपनी, अलग-अलग ब्रांड के लिए ख़ास तरह का संगीत तैयार करती है, जो उनके स्टोर में बजता है.

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हार्वे निकोल्स के मार्केटिंग और क्रिएटिव डायरेक्टर शादी हालीवेल कहते हैं कि ग्राहक आज नया तजुर्बा चाहते हैं.

वरना वो ऑनलाइन ख़रीदारी कर लेंगे. इसीलिए उन्होंने ये प्रयोग किया है. अपने स्टोर में कस्टम मेड संगीत की धुने ग्राहकों को सुना रहे हैं.

हालीवेल कहते हैं कि तमाम रिसर्च ये बताते हैं कि दुकानों में ख़ास तरह से उत्पादों की नुमाइश, उनके लिए अलग तरह की रौशनी का इंतज़ाम करने के साथ अगर संगीत की धुनों पर भी ध्यान दिया जाए, तो ग्राहक स्टोर में ज़्यादा देर रुकते हैं.

वो ज़्यादा देर रुकेंगे तो पैसे भी ख़र्च करेंगे. संगीत का हमारे दिल-दिमाग़ पर गहरा असर होता है.

इस बात का फ़ायदा आज होटल, बार, रेस्टोरेंट, स्पा और नाइटक्लब से लेकर बड़े-छोटे ब्रांडेड स्टोर तक सब उठा रहे हैं.

अपने यहां आने वाले ग्राहकों के लिए ये सभी कारोबारी नई, ख़ास धुनें तैयार करा रहे हैं.

ऐसी मांग पूरी करने के लिए म्यूज़िक कंसियर्ज जैसी कंपनियां भी बाज़ार में आ गई हैं.

ताकि संगीत के ज़ोर से ग्राहकों को कुछ और देर, स्टोर में रोका जा सके. वो रुकेंगे तो ख़रीदारी करेंगे. कंपनी की आमदनी बढ़ेगी.

ब्रिटेन के युवा जैक वार्न को ही लीजिए. वो हार्वे निकोल्स के स्टोर में जूते तलाश रहे हैं.

जैक कहते हैं कि यहां के संगीत ने उन्हें ठहरने पर मजबूर कर दिया. वरना एक दिन पहले ही वो ऑक्सफोर्ड स्ट्रीट पर गए थे जूते ख़रीदने.

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वहां इतना शोर था कि सेल्समैन से बात करना भी मुश्किल हो रहा था. जैक बिना जूते लिए ही वहां से लौट आए थे.

जब हार्वे निकोल्स ने म्यूज़िक कंसियर्ज को अपने स्टोर्स के लिए ख़ास धुनें तैयार करने को कहा, तो उनका इरादा किसी ख़ास उम्र के ग्राहकों को टारगेट करना नहीं था.

वो बस ये चाहते थे कि उनके स्टोर में आने वाले ग्राहकों को एकदम अलग, थोड़ा रईसाना तजुर्बा हो.

ये उनके लग्ज़री उत्पादों से मेल खाने वाला होना चाहिए. ऐसा लगे कि नए-नए फ़ैशन को हार्वे निकोल्स स्टोर बढ़ावा देता है.

रॉब वुड ने साल 2007 में म्यूज़िक कंसियर्ज कंपनी बनायी थी. उन्हें संगीत की ताक़त का एहसास था.

वो जानते थे कि संगीत लोगों को हंसा सकता है और रुला भी सकता है.

वो लोगों को सोच में भी डाल सकता है और दीवानों की तरह उछलने-कूदने पर मजबूर भी कर सकता है.

संगीत की इसी ताक़त का आज कारोबारी फ़ायदा उठाना चाहते हैं.

वैसे शॉपिंग मॉल्स में, बड़े ब्रांडेड स्टोर में संगीत की धुनें पहले भी सुनने को मिलती थीं.

मगर, आज बहुत से ब्रांड ख़ास अपने लिए धुनें तैयार करा रहे हैं.

मक़सद है, ग्राहकों को देर तक अपने स्टोर में रोकना. आपकी जेब से पैसे निकलवाना.

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वैज्ञानिक भी मानते हैं कि संगीत में इतनी ताक़त होती है कि वो आपसे ज़्यादा पैसे ख़र्च करा सके.

ऑस्ट्रेलिया की कर्टिन यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर एड्रियन नॉर्थ ऐसे ही वैज्ञानिकों में से एक हैं.

एड्रियन ने संगीत से इंसान के बर्ताव पर पड़ने वाले असर के बारे में रिसर्च किया है.

प्रोफेसर एड्रियन कहते हैं कि संगीत की मदद से इंसान के दिमाग़ को उकसाया जा सकता है.

लोग संगीत के असर से उछलने-कूदने लगते हैं. तेज़ चलने लगते हैं. उनकी रफ़्तार को धीमा भी किया जा सकता है.

इसी तरह उन्हें ज़्यादा ख़रीदारी के लिए भी संगीत की मदद से उखसाया जा सकता है.

प्रोफ़सर एड्रियन कहते हैं कि अगर आप शास्त्रीय संगीत की धुनें बजाएंगे, तो लोग ज़्यादा पैसे ख़र्च करने को तैयार होंगे.

अगर आप लोकगीत बजाएंगे तो लोग ज़रूरी सामान ख़रीदकर चलते बनेंगे.

प्रोफ़ेसर एड्रियन जैसे रिसर्च सामने आने के बाद संगीत की धुनों की सलाह देने वाली कंपनियों के लिए एक बाज़ार खड़ा हो गया है.

जैसे कि इंग्लैंड की म्यूज़िक कंसियर्ज को ही लीजिए. इंग्लैंड के हर्टफोर्डशायर में इसका मुख्यालय है.

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इसके दफ़्तर लंदन, दुबई, हॉन्गकांग, जोहानेसबर्ग, मैड्रिड और ब्रिसबेन तक में हैं.

आज इसका सालाना कारोबार क़रीब 17 लाख डॉलर का है.

म्यूज़िक कंसियर्ज की बनायी धुनें आप लंदन के क्लैरिज़ेस होटल से लेकर, हॉन्गकांग के अपर हाउस बुटीक होटल और अबू धाबी के यास शॉपिंग मॉल, कैथे पैसिफ़िक एयरलाइन के एग्ज़ीक्यूटिव लाउंज तक में सुन सकते हैं.

इनका काम सिर्फ़ कंपनियों के लिए ख़ास धुनें बनाना नहीं, वो कितनी तेज़ या धीरे बजेंगी, ये बताना भी है.

कंपनी के मालिक रॉब वुड कहते हैं कि कुछ रेस्तरां चाहते हैं कि आप आइए, खाइए और जाइए.

वहीं कुछ ये चाहेंगे कि आप आकर आराम से वहां बैठें और फोर कोर्स खाना ऑर्डर करें.

तो दोनों के लिए अलग-अलग धुने चाहिए होंगी. उनकी आवाज़ भी कम या ज़्यादा होगी, ज़रूरत के हिसाब से.

बहुत से कलाकार भी कई कंपनियों के ब्रांड के हिसाब से धुनें बनाते हैं.

जैसे कि ब्रिटिश रॉक बैंड, 'आर्कटिक मंकीज़' की धुनें, फैशन ब्रांड बरबेरी के लिए एकदम सटीक हैं. लेकिन फिल कॉलिंस के लिए बिल्कुल नहीं.

लंदन के लग्ज़री रेस्तरां और बार डी एंड डी ने जब अपना नया रेस्टोरेंट खोला.

तो यहां ग्राहकों को छत पर खुले में बैठने के लिए उकसाने के लिए इसके मालिकों ने संगीत की धुनों का सहारा लिया था.

इसके लिए भी धुन म्यूज़िक कंसियर्ज ने ही तैयार की थी.

डी एंड डी के पर्चेज़िंग डायरेक्टर पॉल जेनकिंस बताते हैं कि संगीत की नई धुनें बजाने से उनके छत वाले हिस्से में ज़्यादा लोग बैठने लगे, बिक्री भी बढ़ गई.

खेल के सामान बनाने वाली कंपनी एडिडास, बरसों से अपनी सेल्स बढ़ाने के लिए संगीत का सहारा ले रही है.

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जब उन्होंने 'ओरिजिनल्स' के नाम से अपने सामानों की नई रेंज उतारी, तो ख़ास 'ओरिजिनल्स' स्टोर्स के लिए धुने बनवायी गईं.

इसके लिए कंपनी ने रिकॉर्ड-प्ले नाम की संगीत सलाहकार कंपनी की मदद ली.

रिकॉर्ड-प्ले कंपनी की स्थापना, 2003 में डेनियल क्रॉस ने की थी.

वो बताते हैं कि दुनिया भर में फैले अपने एजेंट्स के ज़रिए संगीत की नई-नई धुनें तलाशते रहते हैं.

आज के युवा कुछ नया चाहते हैं. इसलिए उन्हें तरह-तरह का संगीत सुनाना ज़रूरी है.

कंपनी, पूरी दुनिया से संगीत की धुनें इकट्ठा करती है. फिर इन्हें अपनी ग्राहक कंपनियों की ज़रूरतें पूरी करने में इस्तेमाल करती है.

कुल मिलाकर ये कहें कि नई धुनें तैयार करने वालों के लिए नया बाज़ार खड़ा हो गया है.

नई धुनों की मदद से कारोबार बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.

ग्राहकों के लिए भी ये नया तजुर्बा है. यानी इस नए चलन से सबको कुछ न कुछ मिल रहा है.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160704-the-music-that-makes-you-spend-the-most" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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