अगर बेटे की उम्र का हो बॉस तो...

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    • Author, एलिज़ाबेथ गारोन
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

हम में से ज़्यादातर लोग जहां भी काम कर रहे हैं, वहां बॉस उम्र में बड़े होते हैं. मगर, दुनिया तेज़ी से बदल रही है. अब कम उम्र के लोग भी मैनेजर, टीम लीडर बनाए जा रहे हैं.

क्या बेहतर है - अपने से कम उम्र के बॉस के साथ काम करना या फिर उम्रदराज़ बॉस के साथ काम करना?

भारत में हुए एक सर्वे में 80 फ़ीसद लोगों ने कहा कि वो खुद से ज़्यादा उम्र के बॉस के साथ काम करना पसंद करेंगे. और अमरीका में 45 फ़ीसद लोगों को ऐसा लगता है कि युवा टीम लीडर के साथ तालमेल बैठाना मुश्किल है.

मगर ये राय हमेशा सही हो, ऐसा नहीं है. कई बार युवा बॉस के साथ काम करना आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है.

अमरीका की हॉली पावलिका की ही मिसाल लीजिए. वो कई ऐसे मैनेजरों के साथ काम कर चुकी हैं, जो उम्र में उनसे छोटे थे. लेकिन उन्हें इससे ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा.

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हॉली कहती हैं, "युवा बॉस के साथ काम करने से आप भी जवां महसूस करते हैं. शर्त बस एक है कि आप उसका सम्मान करें. और, वो भी आपका लिहाज़ करे. फिर उम्र कम हो या ज़्यादा, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. आपको अपने पेशे में ख़ुद को सबसे आगे रखने की फ़िक्र करनी है. बॉस की उम्र का इससे कोई वास्ता नहीं."

अब बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते लोगों की औसत उम्र ज़्यादा हो रही है. लोग लंबी उम्र तक काम कर रहे हैं. ऐसे में कई बार उन्हें अपने से कम उम्र के टीम लीडर के नीचे भी काम करना होगा.

कई बार ऐसा भी हो सकता है कि आपका मैनेजर आपके बेटे या बेटी की उम्र का हो.

ऐसे में पहली बात तो ये याद रखिए कि इससे सिर्फ़ आपको अजीब नहीं महसूस होता. युवा मैनेजर को भी थोड़ी परेशानी होती है, मातहतों के ख़ुद से ज़्यादा उम्र का होने पर.

जानकार सलाह देते हैं कि ऐसे में बेहतर होगा कि आप अपने युवा मैनेजर से बात करें. इसमें कोई शिकायत का भाव नहीं होना चाहिए कि आपको कम उम्र से परेशानी है.

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बल्कि बात कुछ यूं रखी जानी चाहिए जिससे ये लगे कि आपको टीम के परफ़ॉर्मेंस की फ़िक्र है. तो आप अपनी बात कुछ यूं रख सकते हैं, "मुझे लगता है कि ये हम दोनों के लिए अजीब है. मगर, इस हालात से कैसे बेहतर नतीजे निकाले जा सकते हैं?"

आपके बात करने का लहजा बिल्कुल भी ऐसा न हो कि नया बॉस आपके लिए परेशानी का सबब है. बल्कि उसे ये ज़ाहिर कीजिए कि आप इस स्थिति को अपने लिए एक सुनहरा मौक़ा मान रहे हैं.

कुछ नया करने और सीखने के लिए. बल्कि सुझाव मांगने के अंदाज़ में आप पूछ सकते हैं कि, "हम दोनों इस हालात में कैसे बेहतर काम कर सकते हैं?"

ये हमेशा याद रखिए कि युवा पीढ़ी से सीखने को बहुत कुछ मिल सकता है. वो तकनीक के साथ ही पैदा हुए हैं. उन्हें एक साथ कई काम करने की आदत होती है.

तो नई नई तकनीक का इस्तेमाल पुरानी पीढ़ी उनसे सीख सकती है. मल्टीटास्किंग का गुण उनसे सीखा जा सकता है. युवा मैनेजर, पुराने लोगों की तरह बात भी नहीं करते.

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पहले के दौर में आमने-सामने बात हो जाया करती थी. या टीम लीडर अपने मातहतों से फोन पर बात कर लेते थे. मगर, आज व्हाट्सऐप या टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए भी बॉस अपना संदेश आप तक पहुंचा सकते हैं.

तो संचार के और संवाद के नए ज़रियों के प्रति आपको हिचक नहीं होनी चाहिए. बल्कि युवा टीम लीडर से ये नई चीज़ें सीखनी चाहिए.

अगर आपको लगता है कि आपके युवा मैनेजर आपके काम से ख़ुश नहीं, तो खुलकर बात कीजिए. उनसे अपनी कमी पूछिए और उसे दूर करने की कोशिश कीजिए.

रोज़ाना नए तजुर्बे करने से तो बिल्कुल मत हिचकिचाइए. युवा पीढ़ी अक्सर नए तजुर्बे करती है. पसंद आया तो कुछ देर उस पर टिके, वरना आगे बढ़ लिए. तो आपको भी नई-नई चीज़ें, नए तरीक़े, नई तकनीक आज़माने में हिचकना नहीं चाहिए.

ये तो बिल्कुल नहीं कहना चाहिए कि मुझे ये पसंद नहीं. मैं ये नहीं कर सकता या सकती हूँ.

सबसे बड़ी बात ये है कि उम्र पर ध्यान देने से ज़्यादा इस बात पर ज़ोर दीजिए कि टीम को आपकी ज़रूरत महसूस हो. आपकी कमी लगे. आप अपने काम से ये ज़ाहिर करें कि आप टीम के लिए कितने ज़रूरी हैं.

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हॉली पालविका कहती हैं कि ये मसला उम्र का नहीं, आपके आगे बढ़ने का है. अक्सर युवा मैनेजर अपने से ज़्यादा उम्र के मातहतों के बारे में ये कहते हैं कि वो पुराने ज़माने में अटके हैं. आगे बढ़ने को तैयार नहीं हैं.

ऐसे में आपकी ज़िम्मेदारी है कि आप उन्हें ग़लत साबित करें. नए नुस्खे आज़माने में उनसे भी आगे रहें. ख़ूब पढ़ें, नई चीज़ों, बदलावों के बारे में जानकारी रखें. युवा पीढ़ी से जुड़ें. कुछ भी नया आज़माने से डरें नहीं.

और हां, अपने तजुर्बे बांटने में भी पीछे न रहें. लेकिन अंदाज़ ऐसा हो कि आप अपने बॉस को सिखा नहीं रहे, बल्कि आप तो टीम की बेहतरी के लिए अपने अनुभव साझा कर रहे हैं.

आख़िर आपने अपने बाल धूप में तो सफ़ेद किए नहीं!

(अंग्रेज़ी में मूल लेख पढ़ने के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20160701-how-a-younger-boss-will-help-you-get-ahead" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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