पहले कहा ईयू से बाहर, अब ब्रितानी रहे पछता

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ब्रिटेन में 10 लाख से अधिक लोगों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर यूरोपीय संघ के साथ रहने या न रहने पर फिर से जनमतसंग्रह करवाने की मांग की है.

इनका कहना है कि कुल मतदान का प्रतिशत 75 था जिसमें से मात्र 52 फ़ीसद ने संघ से अलग होने पर हामी भरी थी इसलिए इस आधार पर फ़ैसला लिया जाना सही नहीं है.

एक समय इतने लोग याचिका पर एक साथ हस्ताक्षर करने की कोशिश कर रहे थे कि ये वेबसाइट क्रैश कर गया.

कुछ लोगों ने जिन्होंने संघ से अलग होने का पक्ष में मत दिया था अब पछता रहे हैं और कह रहे हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि वो जीत जाएंगे.

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अफ़सोस ज़ाहिर करने का सिलसिला कुछ इस तरह चल पड़ा है कि सोशल मीडिया पर रिग्रेक्सिट ट्रेंड करने लगा है.

लंदन में भी एक ऑनलाइन याचिका शुरू हुई जिसमें लंदन को 'स्वतंत्र राष्ट्र' घोषित करने का आह्वान किया गया है. अब तक हज़ारों लोग इस याचिका को अपना समर्थन दे चुके हैं.

इस बीच स्कॉटिश नेशनल पार्टी की नेता निकोला स्टरगियोन का कहना है कि स्कॉटलैंड में दोबारा जनमत संग्रह करवाने के लिए आवश्यक क़ानून तैयार किया जाएगा.

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वे यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का ब्रिटेन पर क्या असर होगा इसकी चर्चा के लिए हुई बैठक के बाद बोल रही थीं.

स्कॉटलैंड ने ईयू में रहने के पक्ष में भारी मतदान किया था. निकोला का कहना है कि कोई भी उन्हें ईयू छोड़ने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.

उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ से रिश्ता बरक़रार रहे इसे सुनिश्चित करने के लिए उनकी सरकार यूरोपीय संघ से तुरंत एक वार्ता शुरू करने वाली है.

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