अमरीकी सपना टूटा, सेक्स स्लेव बनाई गई

इमेज स्रोत, Les Menocal
होटल उद्योग में करियर शुरू करने की उम्मीद के साथ शांद्रा वोवोरुंटु अमरीका पहुँची थीं. लेकिन उन्हें वेश्यावृति, ड्रग्स, हिंसा और यौन दासता की दुनिया में धकेल दिया गया.
कुछ ही महीने पहले उन्हें मौक़ा मिला कि ऐसा करने वालों को वह बेनकाब कर सकें. कुछ पाठकों को शांद्रा वोवोरुंटु की यह कहानी विचलित कर सकती है, जो उन्हीं की ज़ुबानी दी जा रही है:
मैं जून 2001 के पहले हफ़्ते में अमरीका पहुंची. मेरे लिए अमरीका, सपनों को साकार करने वाला देश था. मैं जैसे ही पहुंची, एक आदमी मेरी तस्वीर के साथ मेरा इंतज़ार कर रहा था, जिसका नाम जॉनी था.
उसने मुस्कराते हुए मुझे आवाज़ दी. मुझे उम्मीद थी कि वह मुझे उस होटल में ले जाएगा जहां मुझे काम करना है. होटल शिकागो में था और मैं न्यूयॉर्क के जेएफ़के एयरपोर्ट पर उतरी थी. यहां से होटल 800 मील दूर था.
मैं तब 24 साल की थी. फ़ाइनांस में स्नातक करने के बाद मैंने इंडोनेशिया में एक अंतरराष्ट्रीय बैंक में एनेलिस्ट का काम किया था.
1998 में एशियाई आर्थिक संकट के कारण इंडोनेशिया की अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ा और मुझे नौकरी खोनी पड़ी. अपनी तीन साल की बेटी के लिए मैंने बाहर नौकरी ढूंढ़ने की कोशिश शुरू की.

इमेज स्रोत, Shandra Woworuntu
जब मैंने अख़बार में अमरीका, जापान, हांगकांग और सिंगापुर के होटल कारोबार में नौकरी का इश्तेहार देखा, तो अमरीका में नौकरी का विकल्प चुना. औपचारिकताएं पूरी हुईं और मुझे नौकरी मिल गई. मैं अमरीका के लिए रवाना हो गई.
तब तय हुआ था कि छह महीने तक बाहर रहकर, मैं हर महीने पांच हज़ार अमरीकी डॉलर के हिसाब से कमाऊंगी. उधर मेरी बेटी को मेरी मां और बहन संभालेंगी.
मैं चार औरतों और एक आदमी के साथ अमरीका पहुंची थी. हमें दो दलों में बांट दिया गया. जॉनी ने मेरे सारे दस्तावेज़ और पासपोर्ट ले लिए. वह मुझे और दूसरी औरतों को अपनी कार तक ले गया. तभी से मुझे कुछ अजीब लगने लगा. ड्राइवर ने एक शॉर्टकट लिया और एक कार पार्क में ले जाकर कार रोक दी.
जॉनी ने हम तीनों को कार से उतरने को कहा और दूसरी कार में दूसरे ड्राइवर के साथ जाने को कहा. हमने वैसा ही किया, जैसा हमें कहा गया. मैंने देखा कि नए ड्राइवर ने जॉनी को कुछ पैसे दिए.
मुझे लगा कि कुछ ग़लत हो रहा है, लेकिन मैंने खुद को समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है.
ड्राइवर हमें ज़्यादा दूर नहीं ले गया और एक ढाबे के बाहर कार रोक दी. यहां फिर से हमारी गाड़ी और ड्राइवर बदले गए और पैसों का लेनदेन हुआ.

इमेज स्रोत, Getty
इस तीसरे ड्राइवर ने हमें एक घर तक पहुँचाया. वहां फिर से हमें एक ड्राइवर को सौंप दिया गया. चौथे ड्राइवर के पास एक पिस्तौल थी. उसने हमें जबरन एक कार में बैठाया और ब्रुकलिन में एक घर ले गया.
वहां उसने दरवाज़े से ही आवाज़ लगाई, "मामा-सान नई लड़की". अब मुझे डर लगने लगा क्योंकि मैं जानती थी कि 'मामा-सान' वेश्यालय की मालकिन को कहा जाता है. लेकिन बंदूक़ के डर से मैं खामोश रही.
दरवाज़ा खुला तो मैंने 12-13 साल की एक लड़की को नीचे फ़र्श पर चीख़ते देखा. उसे कुछ मर्द लातों से मार रहे थे. उसकी नाक से ख़ून निकल रहा था.
उसमें से एक आदमी मेरे सामने बेसबॉल बैट दिखाते हुए, दांत पीस रहा था और धमकी दे रहा था. इस तरह अमरीका पहुँचने के कुछ ही घंटे बाद मुझे सेक्स के लिए मजबूर किया गया.
इसी दिन मेरी मुलाक़ात फिर जॉनी से हुई. उसने जो कुछ हुआ था, उसके लिए माफ़ी मांगी और कहा कि यह सब भारी ग़लती के कारण हुआ.
उस दिन आईडी कार्ड बनवाने के लिए हमारी तस्वीरें ली गईं और हमें यूनिफ़ार्म ख़रीदवाने ले जाया गया. जहां ले जाया गया था वो अंडरगार्मेंट्स की दुकान थी. वहां कोई यूनिफ़ॉर्म नहीं थी.

इमेज स्रोत, Shandra Woworuntu
मुझे लगा कि मुझसे फिर झूठ बोला गया है. अब मैं बहुत डर गई थी. मैं किसी को अमरीका में जानती भी नहीं थी और अपने साथ इंडोनेशिया से आई दो लड़कियों को अकेले नहीं छोड़ना चाहती थी. मगर मुझे यह अनुभव हो रहा था कि हम मानव तस्करी का शिकार हुए हैं.
अगले दिन हमारे ग्रुप को बांट दिया गया और उसके बाद मैं उन दोनों महिलाओं से बहुत ज़्यादा नहीं मिल पाई. मुझे कार से ले जाया गया. मगर शिकागो नहीं बल्कि एक अन्य जगह जहां मेरे तस्करों ने मुझे सेक्स के लिए मजबूर किया.
तस्कर इंडोनेशियाई, ताइवानी, मलेशियाई, चीनी और अमरीकी थे. उनमें से केवल दो ही अंग्रेज़ी बोलते थे. मुझे यह देखकर और घबराहट हुई कि उनमें से एक के सीने पर पुलिस का बैज लगा था. मुझे नहीं पता कि वह असल पुलिसवाला था या नहीं.
उन्होंने मुझे बताया कि मैं उनकी 30 हज़ार डॉलर की क़र्ज़दार हूँ और यह क़र्ज़ हर बार किसी शख़्स के साथ सोने पर 100 डॉलर के हिसाब से उतरेगा. इसके बाद कई हफ़्तों और महीनों तक मैं कई चकलाघरों, अपार्टमेंट की इमारतों, होटलों और कसीनो में भेजी जाती रही.
किसी भी जगह मैं शायद ही दो दिन से ज़्य़ादा रही होऊंगी. इन चकलाघरों में कोकीन, क्रिस्टल मेथ और दूसरे नशे के पदार्थ रहते थे और वो तेज़ म्यूज़िक और रोशनी में नहाए होते थे. मेरे तस्कर मुझे पिस्तौल दिखाकर ड्रग्स लेने को कहते, ताकि मेरे लिए यह सब सहन करने लायक बन जाए.

इमेज स्रोत, Getty
दिन के 24 घंटे हम लड़कियां पूरी तरह नग्न हालत में बैठी रहतीं और ग्राहकों के आने का इंतज़ार करती रहती थीं. अगर कोई नहीं आता तो हम सो जाती थीं. कभी-कभी तस्कर ही हमसे बलात्कार करते थे. इसलिए हमें हमेशा सावधान रहना पड़ता था. कुछ भी तय नहीं था.
मगर ख़तरे के बारे में आगाह रहते हुए भी मैं मानो सुन्न हो गई थी, रो नहीं पाती थी. उदासी, ग़ुस्सा और हताशा से भरी हुई. मैं बस जीने की कोशिश कर रही थी.
वो मुझे कैंडी कहकर बुलाते थे. तस्करी का शिकार सभी औरतें एशियाई थीं. हम इंडोनेशियाई महिलाओं के अलावा ये महिलाएं थाईलैंड, चीन और मलेशिया की थीं. हालांकि वहां और भी महिलाएं थीं जो सेक्स दास नहीं थीं. वो वेश्याएं थीं जो पैसा कमाती थीं और लगता था कि कहीं भी जाने के लिए आज़ाद थीं.
मैं एक डायरी भी रखती थी, जिसे मैं बचपन से लिखती आई थी. इंडोनेशियाई, अंग्रेज़ी, जापानी और कुछ संकेतों के साथ मैं इसमें लिखती थी और जो मेरे साथ घटता था उसे रिकॉर्ड करने की कोशिश करती थी. मैं तारीखें भी दर्ज करती चलती थी.
मेरा दिमाग़ हमेशा भागने के बारे में सोचता रहता था मगर ऐसे मौक़े बहुत कम थे. कई दिन बाद मुझे अपनी कहानी इंडोनेशियाई कंसल्टेंट को सुनाने का मौक़ा मिला और मेरे वापस जाने का रास्ता साफ़ हो सका.
मगर जो बात मैंने शिद्दत से महसूस की, वो ये थी कि लोग तस्करी की शिकार महिलाओं को वेश्या की तरह देखते हैं. वे उन्हें पीड़ित नहीं बल्कि अपराधी की तरह देखते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)













