लैब में बन सकेगा 'ब्लड प्लेटलेट्स'!

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    • Author, जेम्स गैलेघर
    • पदनाम, स्वास्थ्य संपादक, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट

बड़ी मात्रा में 'ब्लड प्लेटलेट्स' तैयार करने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफ़लता हासिल की है.

'ब्लड प्लेटलेट्स' की वजह से ही रक्त का थक्का जमता है, जिससे चोट लगने के बाद ख़ून का बहना बंद होता है.

शरीर में प्लेटलेट्स बनाने वाली चीज़ को प्रयोगशाला में किस तरह से तैयार किया जा सकता है, इसकी खोज 'एनएचएस' और कैंब्रिज़ यूनिवर्सिटी की टीम ने की है.

इससे प्लेटलेट्स को हासिल करने का एक नया स्रोत मिल सकता है.

लेकिन इसका परीक्षण करने से पहले, शोधकर्ताओं को इस तरीक़े को और कारगर बनाना होगा.

अगर कोई इंसान रक्तदान करता है, तो इसे लाल रक्त कोशिकाओं, प्लाज़्मा और प्लेटलेट्स में बांटा जाता है, और मरीज़ों को उसकी ज़रूरत के हिसाब के आवश्यक हिस्सा दिया जाता है.

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किसी भी दुर्घटना, सर्जरी, ब्लड कैंसर के उपचार या 'हिमोफ़िलिया' जैसी रक्त से जुड़ी कुछ बीमारियों में प्लेटलेट्स की ज़रूरत होती है.

ख़ून से जुड़ी बीमारियों के परामर्शदाता डॉक्टर सेड्रिक ग़ेवार्ट कहते हैं, "हम ऐसी परिस्थियों में प्लेटलेट्स की ज़रूरत के लिए पूरी तरह से रक्तदान पर निर्भर करते हैं".

उनकी टीम 'मेगाकार्योसाइट्स' के विकास की कोशिश में लगी है. यह इंसान के शरीर की एक मातृ कोशिका है, जो बॉन मैरो (अस्थि मज्जा) में पाई जाती है. यही थक्के के रूप में जमने वाला प्लेटलेट्स बनाती है.

सेड्रिक ग़ेवार्ट प्रयोगशाला के इस परिणाम को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानते हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि "हर मेगाकार्योसाइट से बड़ी मात्रा में प्लेटलेट्स हासिल करना, अगला बड़ा क़दम होगा."

प्रयोगशाला में तैयार की गई एक कोशिका से 10 प्लेटलेट्स हासिल होते हैं. लेकिन 'बोन मैरो' में मौजूद ऐसी हर कोशिका से 2000 से ज़्यादा प्लेटलेट्स पैदा होते हैं.

उम्मीद की जा रही है कि बॉन मैरो जैसी परिस्थिति को तैयार कर लेने से, ये कोशिकाएं ज़्यादा असरदार हो सकती हैं.

अगर शोधकर्ताओं को इसमें सफलता मिल जाती है, तो रक्तदान से मिले प्लेटलेट्स की तुलना में प्रयोगशाला में तैयार प्लेटलेट्स ज़्यादा उपयोगी हो सकते हैं.

डॉक्टर सेड्रिक ग़ेवार्ट कहते हैं, "ऐसी स्थिति में हम प्लेटलेट्स में बदलाव भी कर सकते हैं, जिससे की रक्त का थक्का जमना ज़्यादा तेज़ हो जाए. इससे ज़रूरतमंद लोगों, मरीज़ो या घालय सैनिकों तक को बड़ी मदद मिल सकती है."

इससे डॉक्टरों को भी बड़ी मात्रा में अलग-अलग तरह के पलेटलेट्स को जमा करने का अवसर मिल पाएगा. जिस तरह से ख़ून A, B, O और AB जैसे अलग-अलग ग्रूप में पाया जाता है, वैसे ही प्लेटलेट्स अलग-अलग तरीके के होते हैं.

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