लीबिया में मिसाइल हमले में भारतीय नर्स की मौत

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लीबिया में मिसाइल हमले के दौरान एक भारतीय नर्स और उसके 18 महीने के बेटे की मौत के बाद वहां से भारतीय नागरिकों को निकालने की संभावना पर दोबारा विचार हो रहा है.
इनमें से ज्यादातर लोग दक्षिण भारत के राज्य केरल के हैं.
केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात की है.
उन्होंने अल-ज़ाविया मेडिकल टीचिंग हॉस्पिटल में काम कर रहीं एक दर्जन से ज्यादा नर्सों को बाहर निकालने को कहा.

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मुख्यमंत्री चांडी ने बीबीसी हिंदी को बताया," लीबिया में फंसे लोगों में से कुछ के साथ मैंने खुद बात की. वो सभी तुरंत वापस लौटना चाहते हैं. मैंने सुषमा जी से बात की और उन्हें बाहर निकालने का अनुरोध किया."
उसी अस्पताल में काम करने वाली नीति थॉमस ने बीबीसी को बताया, "अस्पताल परिसर में नर्स सुनू के अपार्टमेंट पर शुक्रवार की शाम मिसाइल गिरी. जिसमें उनकी और उनके बेटे प्रणव की मौत हो गई."
सुनू के पति विपिन नायर भी इसी अस्पताल में काम करते हैं. जिस वक्त मिसाइल गिरी, तब वो ड्यूटी पर थे.
अल ज़ाविया लीबिया का पांचवा सबसे बड़ा शहर है. ये राजधानी त्रिपोली से करीब 45 किलोमीटर की दूरी पर है.
नीति थॉमस ने बताया, "हम सभी 32 लोग एक ही परिसर में रहते हैं. दिक्कत ये है कि यहां हर वक्त संघर्ष जारी रहता है. दो दिन पहले यहां शांति थी. कल संघर्ष शुरु हो गया."
नीति थॉमस 17 पुरुष और महिला नर्सों के साथ 2011 से इस अस्पताल में काम कर रही हैं.
ये पूछने पर कि लीबिया में संघर्ष जारी होने के बाद भी वो लोग वहां क्यों हैं, उन्होंने कहा, "हम 19 फरवरी से वापसी के लिए इंतज़ार कर रहे हैं लेकिन अस्पताल ने हमारा पूरा हिसाब नहीं किया है. "
केरल के अप्रवासियों से जुड़े विभाग के मंत्री के सी जोसफ कहते हैं, "स्थानीय हालात की वजह से वो काफी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. उन्हें वेतन नहीं मिल रहा है या फिर उसमें कटौती कर दी गई है. काम करने के हालात भी सुरक्षित नहीं हैं. "
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस संबंध में तीन ट्वीट किए हैं. इनमें से दो ट्वीट में उन्होंने नर्स की मौत का जिक्र किया है.
तीसरे ट्वीट में उन्होंने उस क्षेत्र में भारतीय अधिकारियों के सामने पेश आने वाली समस्याओं का जिक्र किया है.
"हमने कई बार सलाह जारी की है. मैं आपसे एक बार फिर अनुरोध करती हूं कि संघर्ष प्रभावित क्षेत्र से बाहर आ जाएं "
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