फ़ासिस्ट ताक़तों के ख़िलाफ़ हैं आरिश
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
आयोवा में रहने वाले सिख अमरीकी आरिश सिंह डॉनल्ड ट्रंप की रैली के लिए पूरी तरह तैयार होकर पहुँचे थे.
उनके हाथों में एक पोस्टर था जिस पर लिखा था “स्टॉप हेट” यानी नफ़रत फैलाना बंद करो.
अपने भाषण के लगभग 20वें मिनट में ट्रंप ने हमेशा की तरह मुसलमानों को कोसना शुरू किया और ठीक उसी वक़्त लाल पगड़ी पहने सिंह ने पोस्टर को खोलकर लहराना शुरू कर दिया.
जैसा कि ट्रंप की रैलियों में अक्सर होता है जैसे ही कोई प्रदर्शनकारी खड़ा होता है उनके समर्थक ज़ोर-ज़ोर से ट्रंप-ट्रंप के नारे लगाने लगे.
सिंह को धक्का-मुक्की करके बाहर निकाला गया लेकिन जाते-जाते भी उन्होंने कहा—“क्यों आप गोरे नस्लपरस्तों को बढ़ावा दे रहे हैं.”
बीबीसी हिंदी से बात करते हुए 35 वर्ष के आरिश सिंह का कहना था कि उनकी अब तक की लगभग पूरी ज़िंदगी आयोवा में गुज़री है लेकिन आज तक उन्होंने किसी मुख्यधारा के राजनीतिक उम्मीदवार को ऐसा भाषण देते नहीं सुना.

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उनके माता-पिता भारत से यहां आए थे. आरिश सिंह यहीं पैदा हुए.
ट्रंप की रैलियों में पहले भी इस तरह के प्रदर्शनकारी आते रहे हैं. साउथ कैरोलाइना में हिजाब पहने एक मुसलमान महिला, रोज़ हामिद, खामोशी से खड़ी हो गईं, जब ट्रंप ने सीरिया से आने वाले शरणार्थियों को चरमपंथी इस्लाम से जोड़ना शुरू कर दिया.
महिला ने अपने कपड़े पर पीला तारा भी लगा रखा था, जो यहूदियों के ख़िलाफ़ जनसंहार का प्रतीक है. उन्हें भी सिंह की तरह ही बाहर कर दिया गया.
आरिश सिंह का कहना था कि वो किसी भी मज़हब को नीचा दिखाने वालों के ख़िलाफ़ हैं और इसलिए उन्होंने इस्लाम के विरुद्ध चल रही इस मुहिम के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई.
कहते हैं, “हमारे सिख धर्म की तो यह परंपरा है कि इंसान को इंसान के लिए लड़ना चाहिए, जिसके ख़िलाफ़ भी अन्याय हो, उसका साथ देना चाहिए.”
अमरीका में 11 सितंबर के हमलों के बाद सिखों को अक्सर मुसलमान समझकर निशाना बनाया गया है. गुरूद्वारों पर हमले हुए हैं, सिख बच्चों को स्कूलों में तंग किया गया है.

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कई सिख संस्थाओं ने अभियान चलाकर अमरीका को यह बताने की कोशिश की है कि सिख धर्म इस्लाम से अलग है.
आरिश सिंह का कहना है कि यह अभियान भी सही नहीं थे क्योंकि निशाने पर कोई भी धर्म हो, उसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने की ज़रूरत है. उनका कहना है कि बहुत सारे लोग ट्रंप की रैली में आवाज़ उठाने के लिए उन्हें बहादुर क़रार दे रहे हैं, शाबाशी दे रहे हैं.
कहते हैं, “मैंने कोई इतना बड़ा काम नहीं किया है. इस देश में पिछले 15 साल में जब भी सिख अपनी पगड़ी और दाढ़ी के साथ बाहर निकलते हैं, वो ख़तरा मोल लेते हैं.”
पेशे से पत्रकारिता और कॉमेडी से जुड़े सिंह का कहना है कि डॉनल्ड ट्रंप कहते हैं कि वो असली अमरीका का प्रतिनिधत्व करते हैं.

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उनका कहना है, “मैं असली अमरीका का हिस्सा हूं. मैं जानता हूं यह देश महान कैसे बना है.”
उनका कहना है कि वो किसी भी फ़ासिस्ट ताक़त के ख़िलाफ़ हैं “चाहे वो अमरीका में ट्रंप के समर्थक हों या भारत का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हो या फिर खालिस्तानी हों.”
कहते हैं कि ट्रंप के लिए उनका सिर्फ़ एक पैगाम है कि हर इंसान को इज़्ज़त दें और हर मुसलमान को चरमपंथी कहना बंद करें.
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