जलवायु परिवर्तन: मोदी का भाषण, 7 बड़ी बातें

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन की समस्या को पैदा करने में भारत का योगदान नहीं है, पर वह इसके दुष्परिणाम भुगत रहा है.

उन्होंने ये बात पेरिस में चल रहे संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन शिखर सम्मेलन में भारतीय पवेलियन का उद्घाटन करते हुए कही.

प्रधानमंत्री मोदी दुनिया के उन 147 देशों के नेताओं में शामिल हैं जो दुनिया के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करने के लिए आम सहमति बनाने के मकसद से पेरिस सम्मेलन में जुटे हैं.

भारत पेवेलियन में दिए मोदी के भाषण की अहम बातें इस प्रकार हैं:

  • जलवायु परिवर्तन हमारी बनाई समस्या नहीं है. ये ग्लोबल वॉर्मिंग का नतीजा जो औद्योगिक युग में जीवाश्व ईंधन के इस्तेमाल से पैदा हुई है. लेकिन इसके दुष्परिणाम हमें भी भुगतने पड़ रहे हैं, इसीलिए पेरिस में होने वाली बैठक का परिणाम बहुत अहम है और इसी के लिए हम यहां हैं.
  • जलवायु परिवर्तन से निपटने की हमारी प्रतिबद्धता हमारी अनंत परंपराओं और विश्वासों से उपजी है.
  • हम जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र में बनी सहमति के अनुसार साझेदारी की भावना के साथ अब समझौता करने का प्रयास करेंगे. ये समानता के सिद्धांतों पर आधारित हो, लेकिन इसमें जिम्मेदारियां समान नहीं होंगी.
  • जिनके पास विकल्प और तकनीकी क्षमता हैं, वो अपने कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती की व्यवस्था करें. उनकी प्रतिबद्धता और उनकी तरफ़ से उठाए जाने वाले क़दम उतने ही बड़े होने चाहिए जितना ज़्यादा कार्बन उत्सर्जन वो करते हैं.
  • वे (अमीर देश) अपनी तकनीक और संसाधन उनके साथ (गरीब देशों के साथ) साझा करें जो ज़रूरत और आशा के बीच रह रहे हैं. इससे क्लीन एनर्जी के वैश्विक लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी.
  • हम थर्मल प्लांट तकनीक में निवेश कर रहे हैं. हमने कोयले पर टैक्स लगाया है और पेट्रोलियम पदार्थों पर सब्सिडी घटाई है. हम वाहनों के लिए ईंधन मानक बढ़ा रहे हैं. हमने अक्षय ऊर्जा के लिए टैक्स फ्री बॉन्ड भी जारी किए हैं.
  • हम भारत को ग्लोबल मैन्यफैक्चरिंग हब बनाना चाहते हैं जो 'जीरो डिफेक्ट जीरो इफेक्ट' सिद्धांत पर आधारित और उसका पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव न हो.

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