पेरिस ही क्यों बना निशाना?

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- Author, लॉरेंस पीटर
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
इसी साल जनवरी महीने में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के दफ़्तर पर हुए हमले के बाद से ही पेरिस कड़ी सुरक्षा की निगरानी में था.
इस हमले में 17 लोग मारे गए थे.
कहा जा रहा है कि चार बंधकों के मारने के बाद पुलिस की गोली का शिकार बने एमेडी काउलिबली आईएस के नाम पर काम कर रहे थे.
बीते कुछ साल से पेरिस के साथ ही दूर-दराज़ के कई इलाके इस्लामी चरमपंथियों के लिए मददगार रहे हैं.

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इन इलाकों में बेरोज़गारी और शहरी सुख-सुविधाओं के अभाव के कारण मुस्लिम युवक 'जिहाद' की ओर आकर्षित हुए.
जानकारों का मानना है कि फ्रांस से 500 से ज़्यादा मुस्लिम लोग जिहादियों के साथ लड़ने के लिए सीरिया और इराक़ तक गए.
किसी भी पश्चिमी देश से लड़ने जाने वालों की यह सबसे बड़ी संख्या है.
अमरीका के साथ मिलकर फ़्रांस के लड़ाकू विमानों ने कई बार सीरिया और इराक़ में आईएस चरमपंथियों पर हमला किया.
पेरिस में हुआ हमला सीधे तौर पर बेक़सूर नागरिकों को निशाना बनाकर किया गया. इसका मक़सद अचानक ही ज़्यादा से ज़्यादा लोगों की जान लेना था.
एक हाई-प्रोफ़ाइल फ़ुटबॉल मैच को निशाना बनाना तो समझ में आता है. लेकिन खाना खाने की जगह पर तीन लोगों ने खुद को उड़ा लिया, यह असामान्य बात है.

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फ्रांस ने इससे पहले कभी ऐसा हमला नही झेला है.
बेटाकलां कन्सर्ट हॉल पर हमले का मक़सद भी फ़्रांस के आम लोगों की जान लेना ही था. यहां लोग शुक्रवार की रात मनोरंजन कर रहे थे. इस हमले में रॉक संगीत को पसंद करने वाले 80 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई.
इस हमले ने फ़्रांस के कुछ लोगों को 2002 में मॉस्को के थिएटर पर हुए हमले की याद दिला दी. उस वक़्त चेचन विद्रोहियों ने एक लाइव शो के दौरान हमला किया था. हमले से निपटने की रूस की कार्रवाई के बाद 130 बंधकों और 40 हमलावरों की मौत हो गई थी.
फ्रांस की पत्रकार एजेन्स पायोरियर ने बीबीसी को बताया कि 13 नवंबर के हमले में आम लोगों को निशाना बनाया गया न कि पर्यटक स्थलों को.
हमलों की ज़िम्मेदारी लेते हुए आईएस ने कहा कि पेरिस नफ़रत और विकार की राजधानी बन गया था. उसने संगीत समारोह में जाने वालों को काफ़िर कहा.

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लंदन के रॉयल यूनाइटेड सर्विस संस्थान में सुरक्षा नीति के जानकार शशांक जोशी कहते हैं कि इन हमलों का एक पहलू स्पष्ट तौर पर 'संस्कृति' है.
शशांक जोशी ने बीबीसी सो बताया कि हमलावर जिसे अनैतिक बता रहे हैं उन जगहों को जान-बूझकर चुना गया. हमलावर भीड़-भाड़ वाली जगहों पर गए और छुट्टी मनाने वाली जगहों पर जहां लोग आराम कर रहे होते हैं, वहां हमले किए गए.
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