क्या भारत को भी है आईएस से ख़तरा ?

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    • Author, सी. उदय भास्कर
    • पदनाम, निदेशक, सोसायटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़

पेरिस में हुए हमले के पीछे वजह क्या है उसे समझना बहुत जटिल है.

शायद ग़लत नीतियों को अपनाने का नतीजा है. इसकी जड़ शायद 2003 में इराक़ पर अमरीकी हमले से जुड़ी है.

इस हमले के बाद पश्चिमी एशिया क्षेत्र में कई अलग-अलग प्रकार के गुट उग आए. अमरीका ने कुछ का समर्थन किया तो कुछ के विरोध में अलग गुट खड़े कर दिए.

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ये एक बेहद ख़तरनाक़ खेल की शुरुआत थी.

सऊदी अरब, तुर्की, ईरान और क़तर जैसे देशों ने भी अपनी-अपनी अलग नीतियां अपनाईं.

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इस्लामिक स्टेट के उदय को कई देशों का समर्थन भी है.

इन देशों ने अपने अल्पकालिक फ़ायदों के लिए इस्लामिक स्टेट को इतना मज़बूत कर दिया कि अब वो इनके लिए ही ख़तरा बन गया है.

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सीरिया में इस्लामिक स्टेट ने मज़बूत स्थिति बना ली. जब तक सीरिया के मुद्दे पर अमरीका और रूस के बीच जो तनाव है उसे ख़त्म नहीं किया जाता तब तक शायद इस्लामिक स्टेट को ख़त्म करना या उसकी क्षमता को कम करना बहुत जटिल होगा.

जहां तक दक्षिण एशिया का सवाल है यहां चरमपंथ के अपने अलग अनुभव हैं.

यहां का चरमपंथ 9/11 हमलों से नहीं जुड़ा हुआ है.

भारत जैसे देश पाकिस्तान की ओर से चरमपंथ का सामना कर रहे हैं. इसे हम राष्ट्र प्रायोजित चरमपंथ भी कहते हैं. इसका अपना एक दायरा है और वो उसमें आगे बढ़ता रहा है.

लेकिन अब एक नया माहौल बन रहा है. इस्लामिक स्टेट से जुड़ी विचारधारा अलग-अलग रूप में सामने आ रही हैं.

उदाहरण के तौर पर बांग्लादेश में ब्लॉगरों और विदेशी नागरिकों पर हमले.

भारत में भी इस्लामिक स्टेट के पैर पसारने और यहां के युवाओं को आकर्षित करने की रिपोर्टें आती रही हैं.

अगर इस्लामिक स्टेट पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमरीका में वहां के नागरिकों को अपने साथ जोड़ सकता है तो ये स्वभाविक है कि वो भारत या दक्षिण एशिया पर भी उसकी नज़र होगी.

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