'पेरिस हमले से मुसलमानों में डर बढ़ेगा'

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- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली से
पेरिस में हुए चरमपंथी हमला विश्व मीडिया में छाया है. शुक्रवार रात पेरिस में छह स्थानों पर हुए हमलों में 127 लोग मारे गए थे.
फ्रांस के अख़बारों और मैगज़ीनों में इसे भयानक बताया गया है.
अखबार 'लमांड' ने एक ट्वीट में हमले को चरमपंथी हत्या और संहार बताया. ज़्यादातर अखबारों में हमले, बम विस्फ़ोटों की तस्वीरें अपने पहले पन्ने पर छापी हैं. मीडिया में इसे द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद फ्रांस में सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है.
'अल अरबिया' समाचार चैनल से बात करते हुए पेरिस के एक विश्लेषक ने इसे अमरीका के 11 सितंबर हमले के बाद किसी पश्चिमी देश पर किया गया सबसे बड़ा हमला बताया.
अल अरबिया की वेबसाइट पर छपे एक लेख में पत्रकार मोहम्मद छबेरे लिखते हैं, "फ्रांस पर हमला उसे चेतावनी है कि वो कमज़ोर लोगों के साथ न खड़ा हो, अपने मूल्यों को छोड़ दे और सीरिया में अपनी नीति में बदलाव करे."

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ब्रिटेन के अख़बार गार्डियन में विश्लेषक नैटली नूगेरीड लिखती हैं कि इस हमले से मुसलमानों में डर बढ़ेगा कि उन्हें आतंकवाद से और जोड़ा जाएगा साथ ही दक्षिणपंथी समूह ज़्यादा नफ़रत फ़ैलाएंगे.
ब्रिटेन के एक और अख़बार 'द टेलीग्राफ़' में विश्लेषक कॉन कफ़लिन लिखते हैं कि पेरिस पर हमले ब्रिटेन सहित प्रमुख पश्चिमी देशों के लिए संकेत हैं कि इस्लामिक स्टेट जैसे गुट उनके लिए किस तरह के ख़तरे पेश कर सकते हैं.
ऑस्ट्रेलिया के अख़बार 'द एज' ने संपादकीय में इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि जो लोग मासूमों का क़त्ल करते हैं उनके लिए इस निंदा का कोई अर्थ नहीं लेकिन फिर भी वो इस हमले की निंदा करते हैं क्योंकि ऐसा किया जाना चाहिए.

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रूसी मीडिया में पेरिस पर हमले पर लगातार कवरेज जारी है. सभी टीवी चैनलों पर हमले पर आश्चर्य और दुख जताया गया और आतंकवाद के विरुद्ध फ्रांस का साथ देने की बात कही गई है.
इस हमले को यूरोप में प्रवासियों के प्रवेश के साथ भी जोड़ कर देखा जा रहा है. सरकारी टीवी चैनल 'रोसिया 24' पर इसे मानवता पर हमला बताया गया जबकि क्रेमलिन समर्थक एक निजी टीवी चैनल पर इसे अभूतपूर्व आतंकी हमला बताया गया.
एक चैनल पर एक टीवी प्रस्तोता ने कहा कि क्या वक्त नहीं आ गया है कि पश्चिमी देश कमज़ोर दलीलों को किनारे रखकर रूस के साथ मिलकर एक दुष्ट ताकत (आईएस) से लड़ें. एक पत्रकार ने दुख जताया कि मैगज़ीन शार्ली एब्डो पर हमले के बाद भी फ्रांस में लोग चौकस नहीं हुए.

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भारतीय अखबार टाइम्स ऑफ़ इंडिया की वेबसाइट पर विश्लेषक नलिन मेहता ने लिखा कि फ्रांस के लिए सबसे बड़ी समस्या देश के भीतर बढ़ता चरमपंथ का खतरा है और माना जाता है कि कम से कम 1,500 फ्रांसीसी नागरिक इस्लामिक स्टेट के साथ लड़ने के लिए सीरिया और इराक में गए हैं.
अमरीकी मैगज़ीन 'न्यूज़वीक' ने हमले पर इस्लामिक स्टेट समर्थकों के ट्विटर पर खुशियां मनाने की ख़बर छापी है.
एक निजी अफ़ग़ान टीवी चैनल से बातचीत में एक राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय को पता चलेगा कि चरमपंथ एक अफ़गान समस्या नहीं है बल्कि ये एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की ज़रूरत है.
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