म्यांमार में इस बार का 'डिजिटल चुनाव'

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- Author, समीहा नेत्तीकरा
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग के लिए
म्यांमार में रविवार को होने वाले आम चुनाव की तैयारी के साथ ही सोशल मीडिया पर भी मोर्चे खुले हुए हैं.
विपक्षी दल नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी की नेता आंग सान सू ची ने लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट्स से ही अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत की.
पूर्व सेना प्रमुख और राष्ट्रपति थीन सीन ने भी फ़ेसबुक पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में चेतावनी दी थी कि अगर सेना के समर्थन वाली यूएसडीपी चुनाव हार जाती है तो अरब स्प्रिंग के बाद मध्य-पूर्व वाली स्थिति आ सकती है, म्यांमार में उथल-पुथल मच सकती है.

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सोशल मीडिया साइट्स के माध्यम से जातीय और धार्मिक हिंसा भड़काने के इतिहास को देखते हुए सरकार ने कहा है कि वह कोशिश करेगी कि फ़ेसबुक से बात कर उन पोस्ट को हटवा देगी जिनसे चुनाव के पहले हिंसा भड़कने की आशंका हो.
लेकिन हाल ही में ऑनलाइन मानहानि के आरोप में चार लोगों की गिरफ़्तारी की गई, जिसकी काफ़ी आलोचना हुई है.
एक महिला को इसलिए हिरासत में ले लिया गया था कि उन्होंने सुझाव दिया था कि सेना प्रमुख को सू ची के सारोंग को अपने सिर पर लपेट लेना चाहिए. इंटरनेट यूज़र्स ने देखा कि सेना की नई वर्दी के रंग सू ची के कपड़े से मिलते-जुलते हैं.
एक दूसरे आदमी को इसलिए गिरफ़्तार कर लिया गया क्योंकि उसने सेना प्रमुख की तस्वीर पर गंदगी सुपरइंपोज कर उसे फ़ेसबुक पर पोस्ट कर दिया.

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सरकार ने दावा किया कि सारी गिरफ़्तारियां वैध हैं लेकिन वकीलों और दूसरे लोगों का कहना है कि सरकार सही नहीं कर रही है.
म्यांमार टाइम्स के अनुसार चुनाव लड़ रहे 91 दलों में से एक तिहाई फ़ेसबुक पर हैं. फ़्रंटियर म्यांमार ने इन चुनावों को डिजिटल चुनाव करार दिया है.
कई चुनाव ऐप जारी हो चुके हैं, मसलन, 'एमवोटर2015', 'मेपेसोह' ('आअो मतदान करें'), 'दो सांदा' ऐप, 'वोट' ऐप और 'वेवे या आंग' ऐप.
म्यामांर में 3.50 करोड़ मतदाता हैं, पर फ़ेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की तादाद करीब 33 लाख से 60 लाख है.
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