इंजन में ब्रेक लगने से बिजली पैदा होगी..

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    • Author, डेविड के. गिब्सन
    • पदनाम, बीबीसी ऑटोस

लंदन में इन दिनों पांच सप्ताह तक एक सफल प्रयोग किया गया है, जिसके तहत मेट्रो ट्रेन (ट्यूब) के रुकने पर पैदा हुई ऊर्जा को इस्तेमाल करने की कोशिश हुई है.

इस तरह ऊर्जा संजोकर बिजली बनाने में सफलता मिलने से हर साल लाखों पाउंड की बचत संभव हो सकेगी.

इस प्रयोग में ऐसी नई तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके बारे में अभी विस्तार से बताया नहीं गया है.

हमें केवल इतना पता है कि यात्रियों से भरी ट्रेन जब ब्रेक लगाने से रोकी जाती है तो इस प्रक्रिया में ऊर्जा उत्पन्न होती है जिसे स्टोर करने के बाद इस्तेमाल किया जा सकता है.

एक बार में इतनी ऊर्जा उत्पन्न होती है कि पूरे होबर्न स्टेशन के परिसर को सप्ताह में पूरे दो दिन तक की बिजली की आपूर्ति हो सकती है.

यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है जिसमें लंदन के अंडरग्राउंड सिस्टम में एक इनवर्टर सिस्टम लगाया गया है, जो ट्रेन में ब्रेक लगाने से पैदा हुई ऊर्जा को बिजली में बदलने का काम करता है.

पांच सप्ताह तक चलने वाले इस प्रयोग में सिस्टम के इनवर्टर ने रोज़ाना एक मेगावाट आवर बिजली संग्रहित की, जो ऊर्जा 100 घरों में बिजली देने में सक्षम है.

अगर इस तकनीक को पूरे ट्यूब सिस्टम में लगाया जाए तो अनुमान है कि इससे 60 लाख से 90 लाख पाउंड की सालाना बचत हो सकती है.

इतना ही नहीं, इस तकनीक में जिस तरह ट्रेन में ब्रेक लगाए जाते हैं, उससे परंपरागत घर्षण के कारण उष्मा उत्पन्न नहीं होती.

इससे ज़ाहिर है कि ट्यूब जिन सुरंग से चलती है वो ठंडी रहेंगी और जलवायु को नियंत्रित करने पर ख़र्च होने वाली ऊर्जा कम होगी.

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इसका मतलब सुरंगों और अंडरग्राउंड स्टेशन पर क्लाइमेट कंट्रोल के लिए भी कम ख़र्च होगा.

यह प्रयोग लंदन में उस अंडरग्राउंड पहल का हिस्सा है जिसमें पूरे जीवन के दौरान इस्तेमाल होने वाली ऊर्जा के ख़र्च को कम करने की कोशिश की जा रही है.

ये प्रयोग लंदन की ट्यूब में इसलिए हो रहा है क्योंकि शहर की आबादी के बढ़ने के साथ वहाँ आने वाले दिनों में मेट्रो की क्षमता को 30 फ़ीसदी बढ़ाने की योजना है.

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