'भीड़ के सज़ा देने से अफ़रा-तफ़री फैल जाएगी'

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- Author, शहज़ाद मलिक
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर लोगों ने ईशनिंदा के आरोपियों को ख़ुद ही सज़ाएं देने का फ़ैसला कर लिया तो देश में अफ़रा-तफ़री फैल जाएगी और लोग एक दूसरें पर ईशनिंदा के आरोप लगाकर दुश्मनी निकालने की कोशिश करेंगे.
जस्टिस आसिफ़ सईद खोसा की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय बेंच ने पंजाब के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या के मुक़दमें की सुनवाई की.
इस मामले में मौत की सज़ा पाने वाले अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी ने इस्लामाबाद हाई कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की थी.
अदालत ने अभियुक्त की ओर से वकील जस्टिस रिटायर्ड मियां नज़ीर से सवाल किया कि ईशनिंदा के क़ानून में किसी को निजी हैसियत में क्या अधिकार दिए गए हैं और क्या एक व्यक्ति ख़ुद ही जज बनकर ईशनिंदा के आरोपी को सज़ा दे सकता है.
जस्टिस आसिफ़ सईद खोसा ने कहा कि अदालत को प्रचलित क़ानून को देखना होगा.
मुमताज़ क़ादरी के वकील का कहना था कि उनके मुवक्किल की सलमान तसीर से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी.

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उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को दुख था कि सलमान तासीर ने ईशनिंदा के क़ानून का उल्लंघन किया है और इसलिए पंजाब के गवर्नर क़त्ल करने लायक थे.
अदालत ने मुमताज़ क़ादरी के वकील को बुधवार तक जवाब देने के लिए कहा है.
मुमताज़ क़ादरी के एक और वकील और लाहौर हाई कोर्ट के पूर्व चीफ़ जस्टिस ख़्वाजा मोहम्मद शरीफ़ से भी दलील देने की संभावना है.
ग़ौरतलब है कि इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने इस साल मार्च में अभियुक्त मुमताज़ क़ादरी की अपील पर फ़ैसला सुनाते हुए उन्हें दी गई सज़ा-ए-मौत को बरक़रार रखा था जबकि चरमपंथ के मामले में उन्हें दी गई मौत की सज़ा पर रोक लगा दी थी.
चरमपंथ के मामले में दी गई मौत की सज़ा पर रोक के ख़िलाफ़ पाकिस्तान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है.
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