तस्करों की मदद यज़ीदियों को छुड़ाया

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इराक़ में मौजूद ख़ुद को 'इस्लामिक स्टेट' कहने वाले चरमपंथी संगठन के चंगुल से कुछ यज़ीदी अल्पसंख्यकों को भगाने में वहां के तस्करों के एक नेटवर्क ने मदद की है.
बीबीसी परशियन सेवा के अनुसार यह नेटवकर्क वहां के एक व्यवसायी चलाते हैं. 35 वर्षीय ख़ातून और उनके चार बच्चे जिनकी उम्र चार से 10 साल के बीच है, उन्हें 'आईएस' ने पिछले साल अगवा कर लिया था.
लेकिन आज वो 'आईएस' के चंगुल से मुक़्त हो चुकी हैं. इनके परिवार को रक्का शहर ले जाया गया था. ख़ातून की हालत इतनी ख़राब थी कि वो सही से ख़ड़ी भी नहीं हो पा रही थीं.
उन्होंने बताया, ''यह बहुत ही डरावना अहसास था. उन्होंने न हमें खाना दिया और न ही पीने के लिए पानी. कभी-कभी वो हमें मारते भी थे.''
चंगुल में फंसे लोगों को 'ख़रीदते' हैं

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ख़ातून और उनके बच्चे अपनी इस आज़ादी के लिए अब्दुल्ला नाम के इराकी व्यवसायी की मदद का धन्यवाद देते हैं.
अब्दुल्ला पहले सीरिया से कृषि उत्पाद ख़रीदते थे लेकिन अब उन लोगों को ख़रीदते हैं जिनका अपहरण 'आईएस' ने किया होता है.
ख़ातून और उनके बच्चों को परिवार से मिलाने के बाद अब्दुल्ला बीबीसी को अपने छोटे से घर में ले जाते हैं और अपनी 22 वर्षीय भांजी मारवा से मिलवाते हैं.
ख़ातून की ही तरह मारवा और अब्दुल्ला के 55 अन्य रिश्तेदारों को 'आईएस' ने सिंजर शहर में बंदी बना लिया था.
अगवा किए जाने के बाद मारवा ने किसी तरह अब्दुल्ला से संपर्क साधा और बताया कि उसे रक्का में बंदी बना कर रखा गया है.
अब्दुल्ला बताते हैं, ''मैंने उससे कहा कि उन लोगों को कुर्दिश भाषा नहीं आती. इसलिए अगर तुम वहां से भाग निकलने का रास्ता निकाल लेती हो तो मैं तुम्हें वापस ला सकता हूं.''
तय हुई कीमत

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मारवा वहां से भागने में कामयाब रही लेकिन कुछ देर बाद 'आईएस' को उसके ठिकाने का पता लग गया और उन्होंने दोबारा उसका अपहरण कर अब्दुल्ला से 7500 डॉलर (क़रीब 5 लाख रुपये) मांगे.
अब्दुल्ला कहते हैं, ''जब उन्होंने पैसों की मांग की तो मैंने उनसे कुछ समय की मोहलत मांगी लेकिन यह भी कहा कि वो मेरी भांजी को हाथ न लगाएं.''
वो बताते हैं, ''इसके बाद मैंने किसी तरह पैसे का इंतज़ाम किया और मारवा को छुड़वा लिया.''
नेटवर्क बनाया
पिछले एक साल में अब्दुल्ला ने सीरिया, तुर्की और इराक में स्रोत और तस्करों का एक नेटवर्क तैयार किया है.
इस दौरान उन्होंने क़रीब 300 यज़ीदी महिलाओं और बच्चों को 'आईएस' के चंगुल से छुड़ाकर उनके परिवार से मिलवाया है. इसके लिए उन्होंने छह हज़ार डॉलर (क़रीब 4 लाख रुपये) से लेकर 35 हज़ार डॉलर (क़रीब 23 लाख रुपये) तक अदा किए हैं.
अब्दुल्ला कहते हैं, ''जिन लड़कियों की उम्र कम होती है उनकी क़ीमत और भी ज़्यादा देनी पड़ती है, यहां तक यह संगठन नवजात शिशुओं का भी नहीं छोड़ता.''
अब्दुल्ला के अनुसार एक परिवार को अपने 30 दिन के बच्चे को छुड़ाने के लिए छह हज़ार डॉलर (क़रीब 4 लाख रुपये) देने पड़े थे.
अपना सबकुछ बेच दिया

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अब्दुल बीबीसी को बताते हैं, ''मेरे पास जो कुछ भी था मैंने अपने रिश्तेदारों और अन्य लोगों को छुड़ाने के लिए बेच दिया.
अब मैं लोगों से कर्ज़ लेकर इन लोगों को छुड़ाने की कोशिश में लगा हुआ हूं.''
उन्होंने कहा, ''अब मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है और मेरे परिवार के 17 सदस्य अभी भी 'आईएस' के चंगुल में हैं.''
उन्होंने आगे बताया, '''आईएस' के लिए महिलाएं और लड़कियां किसी सामान से ज़्यादा नहीं हैं. इसलिए मुझे मजबूरी में उन्हें छुड़ाने के लिए उनका सौदा करना पड़ता है.''
उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में इनके साथ काम करने वाले 23 तस्करों में से चार तस्करों की 'आईएस' हत्या कर चुका है.
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