तीस मिनट पीछे हुआ उत्तर कोरिया का समय

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दूसरे विश्वयुद्ध के अंत में जापानी साम्राज्यवाद से मुक्ति की याद में उत्तरी कोरिया ने अपने टाइम ज़ोन में बदलाव कर घड़ियों को तीस मिनट पीछे कर दिया है.
शुक्रवार रात को राजधानी प्योंगयांग में घंटियां बज उठीं और नया टाइम ज़ोन प्रभाव में आ गया.
उत्तरी कोरिया ने इसी सप्ताह समय क्षेत्र में बदलाव की घोषणा की थी. इस क़दम से अचंभित दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति ने कहा था कि ये सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के विपरीत है.
उत्तर कोरिया जापान और दक्षिण कोरिया की ही तरह ग्रीनिच मीन टाइम यानी जीएमटी से नौ घंटे आगे रहा है.
लेकिन 1910 में जापानी साम्राज्य के अधीन आने से पहले समूचा कोरियाई प्रायद्वीप जीएमटी से साढ़े आठ घंटे आगे था.
उत्तर कोरिया के मुख्य भविष्यवक्ता जोंग सोक का कहना है कि टाइम ज़ोन में बदलाव समझदारी भरा है और जापान से मुक्ति के सत्तर साल पूरे होने के उपलक्ष्य में सही है.
मानक समय

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उन्होंने समाचार एजेंसी एपी से कहा, "हम अब तक जो समय मानक इस्तेमाल कर रहे थे उसके हिसाब से सूर्य जब सबसे ऊपर होता है तो वो दोपहर का सही समय नहीं होता है."
उन्होंने कहा, "ये एक स्वतंत्र राष्ट्र का क़ानूनी अधिकार है कि हमारे गणतंत्र ने जापानी साम्राज्यवाद की हार और हमारी स्वतंत्रता के 70 साल पूरे होने पर प्योंगयोंग टाइम का ऐलान किया है. वो जो हमारे पूर्वज इस्तेमाल करते थे और जिसे जापानी साम्राज्यवादियों ने हमसे छीन लिया था."
सरकारी समाचार सेवा केसीएनए ने इसी सप्ताह कहा था, "शैतान जापानियों ने क़ब्ज़े के दौरान समय में बदलाव कर कोरिया से उसका अपना मानक समय भी छीन लिया था."
दक्षिण कोरिया की राष्ट्रपति पार्क ग्वेन हे ने सोमवार को कहा था, "सियोल से सलाह मशवरे के बिना लिया गया प्योंगयांग का फ़ैसला अफ़सोसजनक है और दो कोरिया के बीच मतभेद की खाई को और गहराता है."
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