बांग्लादेश: ब्लॉगर हत्याकांड जांच कहां पहुंची?

- Author, अहरार हुसैन
- पदनाम, बीबीसी बांग्ला, ढाका
बांग्लादेश में साल 2013 से अब तक पांच ब्लॉगर अपने लेखन की वजह से मारे जा चुके हैं. पर उनकी हत्या के मामलों की जांच ज़्यादा आगे नहीं बढ़ पाई है.
अदालत तक सिर्फ़ एक मामला ही पंहुच सका है और उसमें भी अब तक सुनवाई पूरी नहीं हुई है.
अहमद रजीब हैदर

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साल 1971 के युद्ध के दौरान किए गए अपराधों के दोषी पाए गए लोगों को फ़ांसी देने की मांग में शहबाग आंदोलन जब अपने पूरे उफान पर था, इस आंदोलन से जुड़े अहमद रजीब हैदर की हत्या कर दी गई.
बाद में पता चला कि वे नास्तिक थे और उन्होंने पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताख़ी करते हुए ब्लॉग लिखा था.
पुलिस ने सात लोगों को इस मामले में गिरफ़्तार किया. पुलिस प्रवक्ता मुनतासिरुल इस्लाम ने बीबीसी से कहा, “इस मामले में सुनवाई पूरी होने वाली है. हमें उम्मीद है कि जल्द ही फ़ैसला भी आ जाएगा.”
अविजीत राय

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अमरीका में रहने वाले बांग्लादेशी अविजीत राय ‘मुक्तोमोन’ नाम का ब्लॉग चलाते थे, जिस पर विज्ञान से जुड़ी सामग्री प्रकाशित होती थी.
बांग्लादेश में वे पत्नी के साथ एक पुस्तक मेले से लौट रहे थे जब उन पर हमला हुआ और वे मारे गए. उनकी पत्नी फ़हमीदा बन्या अहमद बुरी तरह ज़ख़्मी हुईं.
यह वारदात इस साल के 26 फ़रवरी की है.
पुलिस ने इस मामले में शफीउर रहमान फ़राबी नाम के शख़्स को गिरफ़्तार किया.
अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीआई ने इस मामले में बांग्लादेश की पुलिस की मदद करने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल ढाका भेजा.
सात लोगों की पहचान की गई, जिन पर इस हत्याकांड से जुड़े होने का संदेह है.
पुलिस प्रवक्ता इस्लाम ने बीबीसी से कहा, “किसी को अब तक गिरफ़्तार नहीं किया गया है. पर हम मामले की जांच तेजी से कर रहे हैं.”
वशीकुर रहमान

ढाका के तेजगांव इलाक़े में 30 मार्च को वशीकुर रहमान की गला घोंट कर हत्या कर दी गई.
प्रत्यक्षदर्शियों ने दो हमलावरों को मौके पर ही पकड़ लिया. पुलिस का दावा है कि इनमें से एक ने अदालत में अपना ज़ुर्म भी क़बूल कर लिया है.
पुलिस ने अब तक चार्जशीट तैयार नहीं किया है, हालांकि उसका दावा है कि काम काफ़ी तेजी से चल रहा है.
रहमान अपने ब्लॉग पर सभी धर्मों से जुड़े तमाम मुद्दे प्रकाशित किया करते थे.
अनंत विजय दास

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ढाका से दूर सिलेट में अनंत विजय दास की हत्या 12 मई को कर दी गई. वे अपने घर से निकल कर थोड़ ही दूर स्थित बैंक जा रहे थे कि उन पर हमला हुआ.
वे ‘मुक्तोमोन’ ब्लॉग में लिखते थे और एक विज्ञान पत्रिका के संपादक भी थे.
पुलिस ने इस मामले में जून महीने में इदरीस अली नामक एक फोटोग्राफ़र को हिरासत में लिया. उनसे पंद्रह दिनों तक गहन पूछताछ हुई.
पर यह पता नहीं चला है कि जांच कितना आगे बढ़ी.
नीलाद्रि चट्टोपाध्याय

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ब्लॉगर नीलाद्रि चट्टोपाध्याय के घर में घुस कर सात अगस्त को उनकी हत्या कर दी गई.
इस मामले में पुलिस ने अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया है.
इन सभी हत्याकांडों में कुछ ख़ास समानताएं भी हैं.
सभी वारदातों में तेज़ हथियारों का इस्तेमाल किया गया है, मारे गए लोगों पर निगरानी रखी गई.
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