ऑस्ट्रेलिया में अडानी का बहुत कुछ दांव पर

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- Author, आशुतोष सिन्हा
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
अडानी समूह को ऑस्ट्रेलिया में कोयला खदान का लाइसेंस रद्द करने के अदालत के फ़ैसले से बड़ा धक्का लगा है.
पिछले कई महीनों से इस मामले की सुनवाई चल रही थी जहाँ पर्यावरण के नुक़सान को लेकर कुछ लोग कोयले के खनन पर रोक लगाने की मांग कर रहे थे.
अडानी समूह ने इस आदेश पर खेद जताया है. समूह ने कहा है कि कुछ कागजात को उसने सरकार के सामने नहीं रखा है जिसके कारण ये आदेश आया है.
अडानी ने उम्मीद जताई है कि ये प्रोजेक्ट, जिसकी मदद से 10,000 लोगों को नौकरियां मिलेंगी और ऑस्ट्रेलिया की सरकार को 1 लाख 38 हज़ार करोड़ रुपए टैक्स और रॉयल्टी में मिलेंगे, ज़रूर आगे बढ़ेगा.
पुनर्विचार की गुंजाइश!

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अब अगले छह से आठ हफ्ते में ऑस्ट्रेलिया के पर्यावरण मंत्री अडानी समूह को जारी किए गए लाइसेंस पर एक बार फिर से विचार करेंगे.
अडानी समूह के निवेश के बाद ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड की ये खदान देश की सबसे बड़ी खदान बन जाती.
अडानी समूह के लिए ऑस्ट्रेलिया की ये कोयला खदान बहुत ज़रूरी है क्योंकि भारत में बिजली उत्पादन में कोयले से बनने वाली बिजली का हिस्सा सबसे बड़ा है.
इसके कारण पर्यावरण के मुद्दे भारत में भी उठाए गए हैं, लेकिन अभी तक कोयले की अहमियत कम नहीं हुई है.
भारत के बिजली उत्पादन में कोयले की अहमियत को आंकड़े बयान करते हैं.
पूरे देश में 2 लाख 71 हज़ार मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है. इसमें से कोयले से बनने वाली बिजली का हिस्सा 1 लाख 65 हज़ार मेगावाट, यानी 60 फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा है.
कोयले पर अडानी की पकड़
पिछले एक दो साल में भारत ने सौर ऊर्जा और दूसरे रिन्यूएबल एनर्जी की ओर ध्यान दिया है. पर कोयले पर उसकी निर्भरता ख़त्म होती नहीं दिखती है.

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अडानी समूह ने कुछ ऐसा किया था जिससे चाहे जो भी हो वो मोटा पैसा बना सके. ऑस्ट्रेलिया के अलावा उसने इंडोनेशिया में भी कोयले के खदान खरीदे हैं.
खदान मिल जाने के बाद उसे वहाँ से कोयला भारत पहुंचाना भी आसान होता.
अडानी समूह के भारत में पूर्वी ओर पश्चिमी हिस्से में अपने बंदरगाह हैं. इन बंदरगाह के ज़रिए कोयले को अपने सभी बिजली के प्लांट्स तक पहुंचाने की कंपनी की कोशिश रही है.
अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कोयले के दामों में भारी उथल-पुथल देखने को मिलती है.
अगर अडानी समूह के पास अपने ही खदानों से कोयला आएगा तो दामों में उछाल का कोई फर्क उस पर नहीं पड़ेगा.

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टाटा पावर, रिलायंस एनर्जी जैसी कुछ दूसरी कंपनियों ने भी ऐसी ही कोशिश की है पर 'कोल ब्लॉक लिंकेज', जिसका मतलब है अपने कोयले से चलने वाले पावर प्लांट के लिए कोयला सप्लाई सुनिश्चित करने में अडानी दूसरी कंपनियों से आगे रहा है.
देश की कोयले से बिजली बनाने वाली कंपनियों में अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर सबसे बड़ी कंपनी है. मार्च 2015 में ख़त्म हुए कारोबारी साल में कंपनी के 10440 मेगावाट बिजली के उत्पादन की क्षमता है.
अडानी पावर के CEO विनीत जैन के अनुसार अगले पांच साल में कंपनी अपनी इस क्षमता को दोगुना कर 20000 मेगावाट पहुंचाने की तैयारी कर रही है.
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