संगीत का कामोत्तेजना के अहसास से रिश्ता?

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- Author, डेविड रॉबसन
- पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर
कई बार संगीत का असर शरीर पर ऐसा होता है जैसे बदन में नई ऊर्जा का संचार हो गया हो.
कोई धुन या फिर गाने के बोल या फिर कोई सुरमई सी ध्वनि सुनते ही शरीर में अजीब कंपन सी महसूस होती है.
साइके लुई का उदाहरण लीजिए. वह बताती हैं, "ग्रेजुएशन का तीसरा साल था, मैं अपने दोस्त के कमरे में थी. अचानक रेडियो पर रख़मैनिनोव का पियानो कॉन्सर्ट नंबर 2 बजने लगा और मैं मंत्रमुग्ध हो गई. रीढ़ की हड्डी में कंपन सी महसूस हुई, दिल की धड़कने तेज़ हो गई, पेट में जैसे तितलियां उड़ने लगीं. कॉन्सर्ट के दूसरे भाग को सुनने पर मुझे आज भी वहीं एहसास होता है."
ये कलात्मक अनुभव इतना तीव्र होता है कि इंसान उसे महसूस करने के अलावा और कुछ नहीं कर सकता है.
लुई ख़ुद भी पियानो और वायलिन बजाती हैं. लेकिन इस अहसास के लिए संगीत का विशेषज्ञ होने की जरूरत नहीं है. यह किसी के साथ, कहीं भी हो सकता है.
चर्च में, शॉपिंग माल में, शादी के समारोह में और मेट्रो ट्रेन में. कुछ लोगों में यह एहसास इतना सघन होता है कि वे इसे 'त्वचा की कामोत्तेजना' भी कहते हैं. लुई कहती हैं, "कई बार अहसास ऐसा होता है कि आप कुछ और कर ही नहीं सकते."
संगीत की धुनों में क्या है?

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ऐसे में एक सवाल यह जरूर उठता है कि संगीत की मधुर धुनों में ऐसा क्या है जो शरीर और दिमाग की उत्तेजना को उस चरम तक ले जाता है जैसा अहसास सेक्स के दौरान होता है.
ये सवाल लुई को भी परेशान करता रहा. सालों बाद लुई वेसलेयन यूनिवर्सिटी में मनोचिकित्सक हैं. उन्होंने हाल ही में अपने छात्र ल्यूक हैरिसन के साथ मिलकर ऐसे अनुभव की समीक्षा की, उसके सबूत और सिद्धांतों की व्याख्या भी की है.
लुई और हैरिसन ने इन संवेदनाओं को असाधारण बताया है. इससे पहले 1991 में पेशेवर संगीतकारों और गैर-संगीतकारों पर एक सर्वे हुआ था. इस सर्वे में भाग लेने वाले करीब आधे लोगों ने माना कि पसंदीदा गाना सुनने के बाद उन्हें अपने शरीर में कंपन, पसीने का आना और कामोत्तेजना जैसे भाव का एहसास होता है. इसी अहसास को मनोवैज्ञानिकों ने 'त्वचा की कामोत्तेजना' की संज्ञा दी है.
उत्तर भारतीय और पाकिस्तानी सूफ़ी संगीत में भी एकाग्र चित्त होकर संगीत में तल्लीन होने के एहसास को कामवासना के अहसास से जोड़कर देखा जाता रहा है. लुई और हैरिसन ने इस एहसास के लिए एक शब्द 'फ्रिस्सन' (सिहरन) का इस्तेमाल किया, जिसका मतलब रोमांच से ज़्यादा और उत्तेजना के करीब है.
बहरहाल, ऐसे मामलों में शोधकर्ताओं ने ये देखने की कोशिश की कि पसंदीदा संगीत कार्यक्रम के दौरान लोगों में किस तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं. इस दौरान ये देखा गया कि यदि संगीत सामान्य होता है तो वह इस तरह का भाव पैदा नहीं करता है.

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लेकिन यदि संगीत सेट पैटर्न से हट कर हो, और परिचित - अपरिचित संगीत के बीच की रेखा को छुए तो 'फ्रिस्सन' का एहसास होता है.
लुई कहती हैं, "यह भाव तब उत्पन्न होता है जब संगीत एक ख़ास बिंदू पर पहुंचे. जब आप ड्रग्स का सेवन करते हैं या फिर सेक्स करते हैं तब भी ऐसा ही एहसास होता है. इसीलिए लोगों को इसकी आदत पड़ जाती है."
दिमाग में बदलाव
पसंदीदा म्यूज़िक सुनने के दौरान दिमाग पर होने वाले असर को भी न्यूरो-साइंटिस्ट ने आंकने की कोशिश की है.
संगीतकार यदि परिचित और अपरिचित धुनों के बीच में से कुछ ऐसा निकालता है तो इसका दिमाग पर असर हो सकता है, दिल तेजी से धड़कने लगता है, सांस उखड़ने लगती है. इतना ही नहीं, इस दौरान शरीर में डोपामाइन का प्रवाह भी देखने को मिलता है. ऐसा ड्रग्स लेने के बाद और सेक्स करने के बाद भी होता है.
लुई के मुताबिक इस डोपामाइन प्रवाह के चलते ही हमारे लिए कई बार संगीत परम आनंद का कारण बन जाता है. कुछ इसी तरह का निष्कर्ष स्टैंफर्ड यूनिवर्सिटी के एवेराम गोल्डस्टीन ने भी निकाला.
लुई ये मानती हैं कि ये कामोत्तेजना काफी हद तक ज़्यादा कोकीन लेने, हस्तमैथुन करने और पोर्नोग्राफी देखने के एहसास जैसा ही होता है.
संगीत का असर
बहरहाल, इन नतीजों से गीत-संगीत से जुड़ी दिलचस्प जानकारियां भी हासिल होती हैं. वैज्ञानिक स्टीवन पिनकेर के मुताबिक यह लोगों के रवैये को कहीं ज़्यादा सहयोगात्मक बनाता है. अच्छा गीत संगीत सुनने पर आप में दूसरों की मदद करने की भावना भी विकसित होती है.

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वैसे लुई इन बातों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन वो मानती हैं कि संगीत मानव मन और समाज में बदलाव लाने का अहम जरिया है.
लुई के मुताबिक संगीत हमारे दिमाग को प्रशिक्षित करता है और अनुभव को विस्तार देता है. यह हमारी भावनात्मक जागरुकता को भी बढ़ता है. यह लोगों से कनेक्ट भी करता है. इतना ही नहीं संगीत हमारे भावनात्मक संवाद की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाता है.
बहरहाल, लुई ये मानती हैं कि आपके सुनने की क्षमता, सामाजिक सोच का दायरा और भावनात्मक समझ के बीच आपसी रिश्ता जितना मजबूत होगा, संगीत उतना ज्यादा आपको कामोत्तेजना तक पहुंचा सकता है. इस बहाने से आप संगीत के सामाजिक परिवेश पर असर की अहमियत को भी समझ सकते हैं.
लेकिन लुई का एक सवाल है जिससे शायद आप भी सहमत होंगे. "अगर रख़मैनिनोव का पियोना बज रहा हो तो किसे सेक्स और ड्रग्स की जरूरत महसूस होगी?" लेकिन यदि संगीत में आपकी दिलचस्पी नहीं, तो ये सवाल आपके लिए बेमानी ही है.
<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20150721-when-was-the-last-time-music-gave-you-a-skin-orgasm" platform="highweb"/></link> यहां पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>
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