ऑफ़िस में जो चाहें, वो पाने की 6 तरकीबें

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    • Author, एलिना दिज़िक
    • पदनाम, बीबीसी कैपिटल

क्या आप अपने दफ़्तर में जो चाहते हैं, वह हासिल कर लेते हैं?

लिंक्डइन के एक सर्वे के मुताबिक पूरी दुनिया में लगभग 35 प्रतिशत कर्मचारी दफ़्तर से संबंधित नेगोसिएशन या कामकाजी बातचीत से घबराते हैं.

लगभग 2000 लोगों पर हुए सर्वे के अनुसार पुरुष इस बारे में स्त्रियों के मुकाबले में ज़्यादा घबराते हैं. इसका राज़ तो मात्र इतना है कि आप अपनी बात दूसरों को समझाने में कितने कामयाब रहते हैं.

बिज़नेस स्कूल के पाठ्यक्रमों में आपको बातचीत या कामकाजी नेगोसिएशन में भी कुशल बनाया जाता है. हममें से ज्यादातर लोग इस बातचीत में पुराने तौर तरीके ही अपनाते हैं जिनमें से अधिकतर अब काम भी नहीं आते हैं. उनकी जगह नए और बेहतर विकल्प आ गए हैं.

वर्जीनिया स्थिति लीडरशिप कोच क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "हम अपना दिमाग- हम क्या चाहते हैं- ऐसी बातों पर ज़्यादा लगाते हैं. हम दूसरों की ज़रूरत और इच्छा को समझने में ज्यादा समय नहीं लगाते."

जानते हैं वो 6 तरकीबें जिनसे आप दफ़्तर में प्रोजेक्ट को पास करा सकते हैं या फिर वेतन में वृद्धि की बातचीत कर सकते हैं.

1. मनोवैज्ञानिक की तरह सोचिए

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इस पर ध्यान मत दीजिए की सामने वाला क्या कह रहा है. बल्कि ध्यान इस पर होना चाहिए कि वह क्या सोच रहा है. ये कहना है कॉरपोरेट मामलों को सुलझाने वाली लॉस एंजिलिस स्थित फ़र्म विल्सन इल्सर के इयान स्टीवर्ट का.

इयान की मानें तो यह ना केवल लेन-देन के मामले में कारगर होता है, बल्कि नई साझेदारी शुरू करने और दूसरों की ज़रूरत को समझने में भी कारगर होता है.

2. मांग ज़रूरत से अधिक की रखें

आप जितना चाहते हैं, उससे कहीं ज़्यादा की मांग कीजिए. हालांकि सैलरी के मामले में ये कारगर भले ना हो लेकिन दूसरे मामलों में यह कारगर हो सकता है.

ज़्यादातर मामलों में आप जितना मांगते हैं उससे कम की मांग पूरी की जाती है. इयान स्टीवर्ट कहते हैं, "अगर आप बहुत ज़्यादा की मांग करते हैं और उसके बाद उससे कम पर मान जाते हैं तो इसे आपकी उदारता माना जाता है और उस पर विचार किया जाता है."

कई मामलों में पहले मांग रखना फ़ायदे का सौदा होता है. क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "अगर आप पहला ऑफ़र देंगे तो नतीजा अच्छा निकलता है."

3. टाइमिंग की अहमियत

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बातचीत कब शुरू करनी है, ये जानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आप क्या मांग रहे हैं.

बेल्जियम की एक्जीक्यूटिव रेक्रूटमेंट फ़र्म रॉबर्ट हाफ़ के प्रबंध निदेशक फ़्रेडरिक ब्रगमैन कहते हैं कि किसी प्रोजेक्ट की कामयाबी के बाद कुछ मांग करना ठीक होता है या फिर सालाना रिव्यू के बाद कुछ मांग रखना सही है.

वह कहते हैं, "नियोक्ता उस वक्त आपसे बातचीत के लिए तैयार होते हैं."

4. सांस्कृतिक मान्यताओं की परवाह ना करें

हम दुनिया भर के लोगों के साथ काम करते हैं. एक ही जगह पर कई जगहों की संस्कृतियों का मिश्रण देखने को मिलता है.

ऐसे में संस्कृतियों में अंतर को महत्व ना दें. समानता पर ध्यान देने की कोशिश करें.

बार्सिलोना, स्पेन के आईईएसई बिज़नेस स्कूल में उद्यमशीलता विषय पर लेक्चरर कानदार्प मेहता कहते हैं, "बातचीत शुरू करने से पहले संस्कृति को अलग ही छोड़ना सही है."

5. दोस्ताना व्यवहार रखें

दूसरे पक्ष के साथ अच्छा संबंध बनाने की कोशिश कीजिए. अपने बारे में कुछ निजी जानकारी भी शेयर करनी चाहिए.

बच्चों के प्रिय खेल, हॉली डे प्लान जैसी बातें करनी चाहिए, ताकि आप अपनी मांग ज्यादा मानवीय ढंग से कह सकें.

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क्रिस्टी हेजेस कहती हैं, "निजी जानकारी शेयर करने से पॉज़िटिव रिज़ल्ट मिलने की संभावना ज़्यादा होती है."

जिसके साथ संवाद कर रहे हैं, उसके प्रति निगेटिव भाव नहीं रखना चाहिए.

6. फेवर की मांग

वैसे तो एक्सपर्ट्स की राय में कुछ हासिल करने के लिए कुछ देना पड़ता है.

लेकिन अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन रॉस स्कूल ऑफ़ बिज़नेस के प्रोफ़ेसर जॉर्ज साइडल कहते हैं कि ये ज़रूरी नहीं है.

आप दूसरों से फेवर भी मांग सकते हैं. तार्किक रूप से ये बेमतलब सी मांग लग सकती है. लेकिन जब आप किसी से फेवर मांगते हैं तो एक संपर्क, एक रिश्ता कायम होता है और उस व्यक्ति से आपको भविष्य में भी फेवर मिलने की संभावना होती है.

<italic><bold>अंग्रेज़ी में <link type="page"><caption> मूल लेख</caption><url href="http://www.bbc.com/capital/story/20150707-six-ways-to-get-what-you-want" platform="highweb"/></link> यहाँ पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="http://www.bbc.com/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.</bold></italic>

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