रमज़ान में टीवी सीरियलों की रेटिंग में उछाल

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अरब और मुस्लिम देशों में इस्लाम में ख़ास जगह रखने वाला रमज़ान का महीना टीवी धारावाहिकों के लिए भी जाना जाता है.
लाखों मुसलमान इस दौरान अपना रोज़ा खोलने के पहले और बाद घंटों टीवी देखते हैं.
रमज़ान के दौरान टीवी धारावाहिकों की रेटिंग साल में सबसे ज़्यादा होती है.
तज़ाकिस्तान और पाकिस्तान में रमज़ान के दौरान धार्मिक टीवी धारावाहिक और धार्मिक परिचर्चाएं नियमित दिखाई जाती हैं.
हालांकि इस्लामी चरमपंथ में उभार की आशंका के चलते ऐसे धारावाहिकों पर पहले जितना जोर नहीं है.
टीवी धारावाहिकों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय मिस्र और सीरिया के प्रोडक्शन हाउसों के बने सीरियल हैं.
संकट के दौर से निकल रहे मिस्र में बाब अल-हारा जैसे धारावाहिकों की लोकप्रियता में फिर से उछाल आया है. यह धारावाहिक सात साल से जारी है.
इस धारावाहिक की कहानी 1930 के दशक के दमिश्क के जीवन पर आधारित है. उस समय दमिश्क फ़्रांसीसी शासन के अधीन था.
लीक से हटकर

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एक और धारावाहिक दर्ब अल-यास्मीन में 1990 के दशक के दक्षिण सीरियाई गाँव की कहानी है, जो इसराइल के ख़िलाफ़ ख़ुफ़िया और सैन्य संघर्ष केंद्र के इर्द-गिर्द घूमती है.
मिस्र में ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाला धारावाहिक 'जेविश क्वार्टर' में वहाँ के ख़त्म हो चुके यहूदी समाज की कहानी कही जा रही है.
इस धारावाहिक में दिखाया जा रहा है कि एक वक़्त था जब यहूदी और मुस्लिम दोनों मेलजोल के साथ रहते थे.
धारावाहिक में एक यहूदी महिला और मुस्लिम युवक की प्रेम कहानी कही जा रही है.
हालांकि सोशल मीडिया पर इस धारावाहिक की कुछ लोगों ने आलोचना भी की है.
प्रेम और सामाजिक मुद्दे

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ज़्यादातार नए धारावाहिक प्रेम और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित हैं. धारावाहिकों में अब इंकलाब की थीम पृष्ठभूमि में जा रही है.
अल-रिस्क धारावाहिक में इंकलाब के बाद के ट्यूनीशिया की कहानी कही जा रही है.
धारावाहिक में एक ऐसा नेता की कहानी है जिसे पिछली सरकार ने जेल में डाल दिया था. जेल से छूटने के बाद वो उन लोगों से बदला लेने की ठानता है जिन्होंने उसे जेल भिजवाया था.
लेबनानी धारावाहिक सेलो में एक प्रेम त्रिकोण की कहानी है, जिसके केंद्र में एक संगीतकार युगल और एक कारोबारी हैं.
सोशल मीडिया पर इस धारावाहिक को लेकर काफ़ी उत्साह है. माना जा रहा है कि रमज़ान के दौरान इसकी रेटिंग काफ़ी बढ़ेगी.
कहा जा रहा है कि ये डेमी मूर और रॉबर्ट रेडफ़ोर्ड की हॉलीवुड फ़िल्म इन्डिसेंट प्रपोजल पर आधारित है.
कॉमेडी शो

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बिंत अल-शाहबंदर धारावाहिक में 1880 से 1912 के दौर के बेरूत के जीवन पर आधारित है. उम्मीद की जा रही है कि ये काफ़ी लोकप्रिय होगा.
ईरान की हिट कॉमेडी पाएतख्त (राजधानी) का चौथा सीज़न ईरान के सरकारी टीवी पर चल रहा है. इसमें धार्मिक और नैतिक पुट हावी है जिससे इसके रमज़ान स्पेशल होने का पता चलता है.
रमज़ान के दौरान पहले शिया इमाम अली की मौत की बरसी भी आएगी. उस समय तक सीरियल काफ़ी गंभीर हो जाता है.
सरकारी टीवी के धारावाहिकों में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चिंताओं पर ज़ोर दिया जाता है.
इस रमज़ान के दौरान लेबनानी धारावाहिक 'द स्वायल एंड साल्ट' में इसराइल के ख़िलाफ़ इस्लामिक प्रतिरोध दिखाया जा रहा है.
मस्जिद की अहमियत

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तुर्की के मुसलमान इस्तानबुल स्थित ब्लू मॉस्क़ में रमज़ान मनाते हैं.
देश के दो प्रतिद्वंद्वी चैनलों ने जब यहाँ के दो प्रसिद्ध मस्जिदों से लाइव प्रसारण के लिए इजाज़त मांगी तो उन्हें नहीं मिली. हालांकि एक दूसरे चैनल को ये इजाज़त मिल गई.
जनता की धार्मिक भावनाओं को छूने के लिए रमज़ान के दौरान मस्जिद की पृष्ठभूमि का प्रयोग काफ़ी प्रचलित है.
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